'कानून की आड़ में नहीं कर सकते समुदाय को परेशान'

नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Thu, 27 Sep 2012 12:55 AM IST
विज्ञापन
can not disturb any community in guise of law

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹249 + Free Coupon worth ₹200

ख़बर सुनें
शाहरुख खान की फिल्म के डायलॉग ‘माइ नेम इज खान, बट आई एम नॉट टेररिस्ट’ पर जोर देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि किसी भी व्यक्ति को उसके धर्म के आधार पर परेशान करने के लिए कानून का दुरुपयोग नहीं किया जा सकता। गुजरात में आतंकवाद फैलाने के लिए दोषी करार दिए गए 11 लोगों को बरी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह टिप्पणी की।
विज्ञापन

जस्टिस एचएल दत्तू व जस्टिस सीके प्रसाद की पीठ ने कहा कि जिला पुलिस अधीक्षक, आयुक्त व अन्य अधिकारियों को इस पर भी जोर देना चाहिए कि किसी भी हाल में कानून का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। कानून का दुरुपयोग होने से कोई भी निर्दोष खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करेगा और उसे कहना पड़ेगा कि वह खान है, लेकिन वह आतंकवादी नहीं है।
पीठ ने यह टिप्पणी 1994 में गुजरात के अहमदाबाद शहर में भगवान जगन्नाथ पुरी यात्रा के दौरान हुई सामुदायिक हिंसा की कथित साजिश के आरोप में दोषी करार दिए गए 11 लोगों को बरी करते हुए की है। पीठ ने आतंकरोधी अदालत के फैसले के खिलाफ दायर 11 लोगों की अपील को स्वीकार की है। निचली अदालत ने आतंक के आरोप में उन्हें दोषी करार दिया था और हरेक को पांच साल जेल की सजा सुनाई थी।
पीठ ने राज्य सरकार की ओर से दायर अपीलों को खारिज कर दिया है जिसमें दोषियों की सजा को बढ़ाए जाने की मांग की गई थी। सर्वोच्च अदालत ने टाटा की जरूरी धारा 20-अ(1) का अनुसरण न किए जाने के आधार पर इस मामले में सभी आरोपियों की सजा को निरस्त किया है। दरअसल टाडा के तहत एफआईआर दर्ज करने से पहले जिला पुलिस अधीक्षक की अनुमति जरूरी होती है। लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
X

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
  • Downloads

Follow Us