बुरी खबर: बात करना होगा महंगा, बढ़ जाएगी कॉल रेट
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अब बात करना आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है क्योंकि भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण अब कॉल दरों में 6 से 7 पैसे प्रति मिनट की दर के बढोतरी करने की योजना बना रहा है। स्पेक्ट्रम नीलामी खत्म होने के चंद दिनों बाद ही ट्राई का यह फैसला उपभोक्ताओं को थोड़ा मुश्किल में डाल सकता है।
25 मार्च को खत्म हुई स्पेक्ट्रम नीलामी प्रक्रिया के बाद ट्राई के मुखिया राहुल खुल्लर ने बताया कि उपभोक्ताओं पर बढ़ी हुई कॉल दरों का असर अलग तरीकों से पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि कॉल दरों में बढ़ोतरी 6 से 7 पैसे प्रति मिनट तक हो सकती है और मौजूदा समय में वॉइस टैरिफ के जरिए उपभोक्ताओं पर इसका भार डाला जा सकता है। वॉइस और डाटा सर्विस के जरिए कंपनियों को 48 पैसे प्रति मिनट की प्राप्ति होती है।
गौरतलब है कि खुल्लर की यह प्रतिक्रिया 2जी और थ्री जी स्पेक्ट्रम नीलामी खत्म होने के दो हफ्ते बाद आई है। इस नीलामी प्रक्रिया में 1.1 लाख करोड़ गई।
800 और 900 मेगाहर्ट्ज के 2जी बैंड के लिए सरकार की तरफ से जो बेस वैल्यू रखी गई थी वो ट्राई की तरफ से प्रस्तावित कीमतों से 17 और 23 फीसदी ज्यादा थी।
सबसे ज्यादा हाईवोल्टेज बिडिंग 900 और 800 मेगाहर्ट्ज को लेकर हुई जिसमें बेस वैल्यू से 93 फीसदी और 77 फीसदी के स्तर तक बढ़कर बोली लगी।
खुल्लर ने की सरकार की आलोचना
दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा था कि स्पेक्ट्रम नीलामी प्रक्रिया के बाद टेलीकॉम कंपनियों पर सिर्फ 1.3 पैसा प्रति मिनट का ही अतिरिक्त भार पड़ेगा। वहीं इस मामले में खुल्लर का कहना है कि नीलामी के बाद हम पर पड़ने वाला अतिरिक्त भार सरकार के अनुमान से कहीं ज्यादा है।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि टैरिफ के दाम बढ़ने से उपभोक्ताओं की जेब पर ज्यादा असर नहीं होगा। वहीं अगले महीने रिटायर हो रहे ट्राइ के चेयरमैन ने ऐसे हालात पैदा करने के लिए सरकार की आलोचना की है जिसमें संचालकों को सिर्फ सेवाओं के लिए बोली लगाने को मजबूर किया गया, लेकिन टॉवरों की संख्या में कमी और वॉइस और डॉटा सर्विस की तमाम खामियों के बावजूद भी वो पर्याप्त स्पेक्ट्रम रिलीज नहीं कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि इस तरह की बोली लगाने का खामियाजा एक अप्रैल से शुरु हो रहे इस वित्तीय वर्ष के आपरेटिंग मार्जिन पर पड़ सकता है।