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कैग की रिपोर्ट से मुश्किल में मोदी के खास मंत्री

Sat, 02 May 2015 12:10 PM IST
ब्यूरो/एजेंसी, अमर उजाला, दिल्ली
ब्यूरो/एजेंसी, अमर उजाला, दिल्ली Updated Sat, 02 May 2015 12:10 PM IST
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cag report on the company of nitin gadkari

संसद में पेश की गई नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की एक रिपोर्ट ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की मुश्किल बढ़ा दी है। कैग ने अपनी रिपोर्ट में नागपुर स्थित पूर्ति साखर कारखाना लिमिटेड कंपनी को भारतीय अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी (इरेडा) द्वारा 48.65 करोड़ रुपये का टर्म लोन दिए जाने में नियमों के उल्लंघन की बात कही है।

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कंपनी में नितिन गडकरी को एक प्रमोटर और निदेशक के रूप में दर्शाया गया है।

कांग्रेस ने मामले की न्यायिक जांच होने तक गडकरी से अपने पद से इस्तीफा देने की मांग की है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि गडकरी और उनके परिवार के पूर्ति कंपनी से करीबी संबंध हैं।
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पूर्ति समूह की कंपनी पूर्ति पावर एंड सुगर ने आरोपों का खंडन किया है। इरेडा ने मार्च 2002 में पूर्ति साखर कारखाना को महाराष्ट्र के नागपुर में 22 मेगावाट के को-जेनरेशन पावर प्रोजेक्ट को लगाने के लिए 48.65 करोड़ रुपये के लोन को मंजूरी दी थी।

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लाभ पाने के लिए नियमों का उल्लंघन

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कैग रिपोर्ट में कहा गया है कि लोन लेने वाले कंपनी के प्रमोटरों और निदेशकों ने लोन के लिए व्यक्तिगत गारंटी दी थी। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी के प्रमोटर और निदेशकों में नितिन जयराम गडकरी, जयकुमार रमेशजी वर्मा, आनंदराव मोतीराम राउत, आस्तिक जांगलू सहारे और विष्णु गोविंद शामिल हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पूर्ति कंपनी ने सब्सिडी लेने के लिए जरूरी नियमों का भी पालन नहीं किया। इसमें कहा गया है कि कर्ज लेने वाले कंपनी ने सब्सिडी योजना का लाभ लेने के लिए जरूरी नियमों और शर्तों का उल्लंघन किया है।

मोदी सरकार में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी कुछ साल पहले भी पूर्ति समूह से अपने संबंधों को लेकर विवादों में रह चुके हैं। उस वक्त गडकरी ने कहा था कि उनका कंपनी से कोई लेना देना नहीं है।

प्रोजेक्ट को फरवरी 2004 में शुरू होना था लेकिन वह मार्च 2007 में चालू हो पाया। इसे जून 2009 में 100 फीसदी कोयला आधारित कर दिया गया जबकि सब्सिडी योजना में शामिल कोई भी प्रोजेक्ट 25 फीसदी ही कोयला आधारित हो सकता है। कैग की रिपोर्ट के बहाने कांग्रेस ने नितिन गडकरी पर हमला बोला है।

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