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अब कभी भी लग सकता है रेल किराए का करंट

Fri, 02 Aug 2013 12:05 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Fri, 02 Aug 2013 12:05 AM IST
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cabinet gives in principle nod to rail tariff authority

अभी तक तो सिर्फ रेल बजट के दौरान ही आम लोगों को किराया वृद्धि का झटका लगता था, लेकिन अब कभी भी रेल किराए का करंट आपको हिला सकता है।

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रेलवे के यात्री किराये एवं मालभाड़ा तय करने के लिए बहुचर्चित रेलवे टैरिफ प्राधिकरण के गठन के प्रस्ताव को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बृहस्पतिवार को मंजूरी दे दी।
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प्राधिकरण के माध्यम से रेलवे के इतिहास में पहली बार रेल किराये और मालभाड़ा बजट या राजनीतिक निर्णय के दायरे से बाहर लाए जाएंगे।

संसद में रेलवे एक्ट 1989 में संशोधन करके अब इस अथॉरिटी के गठन की प्रक्रिया को जल्द ही पूरा किया जाएगा। प्रस्तावित प्राधिकरण को अमल करने पर फैसला मंत्रालय को लेना होगा।
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प्राधिकरण के फैसले को मंत्रालय खारिज भी कर सकता है क्योंकि प्रस्तावित प्राधिकरण को अभी नियामक संस्था का अधिकार नहीं होगा। यह सिर्फ किराया एवं भाड़ा की दरों को तय करने पर सुझाव देगी।

रेल टैरिफ प्राधिकरण का प्रस्ताव सबसे पहले रेल मंत्री के रूप में दिनेश त्रिवेदी ने 2012 में रेल बजट पेश करते समय रखा था। बाद में पवन कुमार बंसल ने भी 2013-14 के बजट में रेल टैरिफ अथॉरिटी के गठन का प्रस्ताव संसद में पेश किया।


कैबिनेट द्वारा स्वीकृत प्रस्तावित रेल टैरिफ प्राधिकरण में अध्यक्ष सहित कुल पांच सदस्य होंगे। इन्हें हर साल यात्री ट्रेनों के किराया तथा मालभाड़े की दरों को तय करने का अधिकार दिया गया है। इसके लिए प्राधिकरण विभिन्न पक्षों से विचार विमर्श करके नई दरों का प्रस्ताव तैयार करेगा।

प्राधिकरण प्रस्तावित किराया एवं मालभाड़े की दरों को लागू करना रेलवे के लिए वैधानिक मजबूरी नहीं होगी। प्राधिकरण के प्रस्ताव पर अमल का फैसला मंत्रालय अपने स्तर पर ही करेगा।

उल्लेखनीय है कि पूर्व रेल मंत्रियों की ओर से रेल टैरिफ अथारिटी को नियामक संस्था बनाये जाने की बात कही गई थी।

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