विरोध के बीच अलग तेलंगाना को सरकार की हरी झंडी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संसद से सड़क तक चल रहे विरोधों और दोनों सदनों में ठप पड़े कामकाज के बीच कैबिनेट ने आंध्र प्रदेश का विभाजन कर अलग नए तेलंगाना राज्य के गठन संबंधी बिल के अंतिम मसौदे को हरी झंडी दे दी।
इसे अगले हफ्ते संसद में पेश किया जाएगा। बिल को संसद के पटल पर रखने से पहले राष्ट्रपति की औपचारिक मंजूरी के लिए भेज दिया गया है।
तेलंगाना पर मंत्रियों के समूह (जीओएम) की अगुवाई कर रहे गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कहा कि आंध्र प्रदेश के तेलंगाना क्षेत्र के लोगों से अलग राज्य बनाने का केन्द्र सरकार वादा कर चुकी है। लिहाजा सरकार का अपने फैसले से पीछे हटने का कोई इरादा नहीं।
तेलंगाना गठन की राह आसान नहीं
हालांकि यूपीए सरकार को तेलंगाना गठन की राह आसान नहीं दिख रही है। तेलंगाना पर फैसले के लिए बने जीओएम की पिछले हफ्ते भर से चल रही मशक्कत के बावजूद तेलंगाना विरोधी सीमांध्र इलाके के सांसदों को मनाना सरकार के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।
तेलंगाना विरोधी सीमांध्र के कांग्रेसी सांसद ही संसद में हंगामा बरपा रहे हैं। इस हंगामे में सरकार के लिए नए राज्य के गठन संबंधी बिल को पारित करना बेहद मुश्किल चुनौती बन गई है।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक बिल के मसौदे में बड़ा फेरबदल नहीं किया गया है। हालांकि आंध्र प्रदेश विधानसभा से बिल के खारिज होने के बाद जीओएम ने मसौदे में जोड़ घटाव करने के मकसद के तीन बैठक की हैं। लेकिन सीमांध्र को नए कुछ वित्तीय पैकेज देने के अलावा कुछ भी बड़ा परिवर्तन नहीं हुआ है।
सीटों के नफा नुकसान की समीक्षा शुरू
तेलंगाना विरोधी कांग्रेस और टीडीपी सांसदों की ओर से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की घोषणा को सरकार भले खुले तौर पर दबाव की रणनीति मान रही हो, लेकिन वह इसके दूरगामी परिणामों को नजरअंदाज नहीं कर रही है।
आम चुनाव के मद्देनजर सरकार के रणनीतिकारों ने अब सीमांध्र और रायलसीमा में सीटों के नफा नुकसान की समीक्षा नए सिरे से करनी शुरू कर दी है।
10 साल तक हैदराबाद संयुक्त राजधानी
हैदराबाद को केंद्र शासित प्रदेश बनाने की सीमांध्र नेताओं की मांग सरकार ने ठुकरा दी है। पूर्व निर्धारित प्रस्ताव के अनुरूप हैदराबाद 10 साल तक दोनों राज्यों की संयुक्त राजधानी रहेगी।
इसके बाद हैदराबाद तेलंगाना का हिस्सा बन जाएगा। मसौदे में तेलंगाना को दस जिलों में बांटने का प्रस्ताव रखा गया है। संसद में पेश होने वाले बिल में राज्य के बंटवारे के बाद अफसरशाही, प्राकृतिक और अन्य संसाधनों के बंटवारे को पूरा ब्यौरा पेश किया जाएगा।
आर पार की लड़ाई को तैयार किरण रेड्डी
अलग तेलंगाना गठन का विरोध कर रहे आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री किरण रेड्डी ने संयुक्त आंध्र प्रदेश के लिए केंद्र से आर पार की लड़ाई का ऐलान कर सरकार की मुसीबत और बढ़ा दी है। किरण ने कहा है कि वह विरोध के चलते पार्टी से निलंबित होने को भी तैयार हैं।
सरकार के लिए संसद में तेलंगाना बिल को पास कराना आसान नहीं होगा। हालांकि भाजपा ने इस पर समर्थन देने का फैसला लिया है, लेकिन हंगामे के बीच बिल पारित कराने पर वह राजी नहीं है। सरकार के लिए तेलंगाना विरोधी सांसदों को सदन से सस्पेंड कर बिल पारित कराने के अलावा दूसरा रास्ता नहीं दिख रहा। मगर भाजपा समेत कई दल इस विकल्प से सहमत नहीं हैं।