फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   Cabinet clears proposal about juveniles

जघन्य अपराधों में किशोर को होगी वयस्क जैसी सजा

Thu, 23 Apr 2015 12:06 PM IST
Updated Thu, 23 Apr 2015 12:06 PM IST
विज्ञापन
Cabinet clears proposal about juveniles

जघन्य अपराध में शामिल किशोर गुनहगार को अब कम उम्र होने का लाभ नहीं मिलेगा। कैबिनेट ने 16 से 18 वर्ष के बीच के किशोरों के जघन्य अपराध को बालिगों की तरह मानने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है।

विज्ञापन


जघन्य अपराध में शामिल किशोर को वयस्कों को अपराधी मानने वाले बहु प्रतीक्षित किशोर न्याय अधिनियम 2014 संशोधन बिल पर कैबिनेट ने अपनी मुहर लगा दी है।

केंद्र सरकार ने इस फैसले के साथ ही दुष्कर्म, हत्या और तेजाब हमले जैसे गंभीर मामलों में 16-18 साल के किशोर को वयस्क की तरह कड़ी सजा देने पर अंतिम निर्णय ले लिया है। सरकार संसद के मौजूदा सत्र में ही इस बिल को पेश करेगी।
विज्ञापन


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में इस बिल को हरी झंडी दी गई। हालांकि इससे पहले 8 अप्रैल को कैबिनेट में इस बिल पर चर्चा हुई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


लेकिन कुछ मामलों पर आम राय नहीं होने के कारण अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सका था। किशोर अपराधी बालिगों की तरह सजा पूरी करने के बाद चुनाव न लड़ सके। इस पर फैसला अब तक नहीं हुआ था।

वयस्क जेल में नहीं रखा जाएगा

Cabinet clears proposal about juveniles

सजायाफ्ता किशोर को वयस्क अपराधियों के साथ जेल में नहीं रखा जाएगा। बल्कि उनके कारावास के लिए अलग और विशेष व्यवस्था होगी।

वहीं 21 साल की आयु होने पर बाल अपराधी की मानसिक स्थिति की समीक्षा कर यह देखा जाएगा कि आगे उस पर किस तरह की कार्रवाई हो। अगर उसकी मानसिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव नजर आया तो 21 साल में उसे रिहा भी किया जा सकता है।

सजा के तरीके पर फैसला जेजे बोर्ड के हाथ

नए कानून के प्रस्तावित मसौदे के मुताबिक जघन्य अपराध के मामले में किशोर को किस तरह दंडित किया जाएगा इसका निर्णय जेजे बोर्ड को लेगा। जेजे बोर्ड में मनोवैज्ञानिक, बाल अधिकार से जुड़े एनजीओ, कानूनविद् जैसे तमाम पक्षकारों को शामिल किया गया है।

अगर बोर्ड बाल अपराधी को सुधार गृह में रखने की जगह सामान्य अपराधियों की तरह कानूनी प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लेता है तो उस पर अमल किया जाएगा।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed