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कानून में बदलाव, रेप के बाद मौत पर फांसी

Sat, 02 Feb 2013 10:17 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Sat, 02 Feb 2013 10:17 AM IST
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cabinet clears amendments suggested by justice verma committee

महिलाओं के साथ यौन हिंसा करने वालों को अब कड़ी सजा मिलेगी। दुष्कर्म के ऐसे जघन्य मामले, जिनमें पीड़ित की मौत हो जाती है या फिर वह मरणासन्न हालत में पहुंच जाती है, उन मामलों में दोषियों को सजा-ए-मौत दी जा सकेगी।

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दिल्ली गैंगरेप की घटना के बाद महिलाओं की सुरक्षा पर उठे सवालों के जवाब में केंद्र सरकार ने शुक्रवार को दुष्कर्म कानून के प्रावधानों में बड़े बदलाव वाले अध्यादेश को मंजूरी दे दी।
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दुष्कर्म की परिभाषा में बदलाव करते हुए सरकार ने इस अध्यादेश में जस्टिस जेएस वर्मा समिति की सिफारिशों के आधार पर और इन सिफारिशों से आगे जाकर भी कई प्रावधान किए हैं। इसमें दुष्कर्म के आरोपियों को ताउम्र सलाखों के पीछे रखने और तेजाब से हमला करने वालों को बीस साल की सजा का प्रस्ताव है।
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इसके साथ ही रेप पीड़ित को मुआवजा दिए जाने का भी कानूनी प्रावधान किया गया है। केंद्रीय कैबिनेट में निर्णय लेने के बाद सरकार ने अध्यादेश लाने के लिए प्रस्ताव राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के पास भेज दिया है। इस अध्यादेश पर राष्ट्रपति की ओर से मुहर लगाने के बाद शनिवार को अधिसूचना जारी की जाएगी।

सरकार ने दुष्कर्म की परिभाषा में बदलाव कर इसे यौन अत्याचार कर दिया है, ताकि महिलाओं के खिलाफ सभी तरह की यौन हिंसा इसके दायरे में आ सके। साथ ही महिलाओं का पीछा करने, कपड़े फाड़ने और अश्लील व्यवहार को अपराध की श्रेणी में रखने को अध्यादेश में शामिल किया गया है।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में पहली बार खासकर महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे को लेकर विशेष बैठक बुलाई गई थी। कैबिनेट ने जस्टिस वर्मा समिति की सिफारिशों से आगे जाकर दुष्कर्म के चलते पीड़ित की मौत या उसके मरणासन्न हालत में पहुंचने के मामलों में मृत्युदंड का प्रावधान किया।

सूत्रों ने बताया कि ऐसे मामलों में न्यूनतम 20 साल की सजा का प्रावधान किया गया है, जबकि अधिकतम ताउम्र कैद या मृत्युदंड भी दिया जा सकता है। मालूम हो कि हाल ही में प्रधानमंत्री ने जस्टिस वर्मा को लिखे पत्र में स्पष्ट किया था कि उनकी सिफारिशों को लागू करने के मसले पर सरकार तत्परता दिखाएगी। मालूम हो कि जस्टिस वर्मा समिति ने मृत्युदंड की सिफारिश की नहीं की थी।

कैबिनेट की विशेष बैठक के बाद कानून मंत्री अश्विनी कुमार ने कहा कि दिल्ली गैंगरेप घटना के बाद देश की भावनाओं को देखते हुए सरकार ने अध्यादेश के जरिए कानून में बदलाव का यह ऐतिहासिक फैसला लिया है।

जस्टिस वर्मा समिति की सिफारिशों के साथ संसदीय स्थायी समिति के सुझावों को भी अध्यादेश में शामिल किया गया है। कैबिनेट में अध्यादेश पर मुहर लगाने से पहले सात रेसकोर्स रोड पर कांग्रेस कोर ग्रुप की बैठक में सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री की मौजूदगी में इस पर चर्चा की गई। इससे पहले प्रधानमंत्री ने दिन में गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे और कानून मंत्री के साथ अलग से लंबी चर्चा कर अध्यादेश को अंतिम रूप दिया।


परिभाषा बदली
‘दुष्कर्म’ शब्द की जगह इसमें ‘यौन अत्याचार’ शब्द का इस्तेमाल किया गया है, ताकि महिलाओं के खिलाफ सभी तरह की यौन हिंसा इसके दायरे में आ सके।

नए प्रावधान
--दुष्कर्म के चलते पीड़ित की मौत होने या उसके मरणासन्न हालत में पहुंचने के मामलों में दोषियों को --सजा-ए-मौत या ताउम्र कैद की सजा दी जा सकेगी।
--ऐसे जघन्य मामलों में न्यूनतम 20 साल की सजा दी जाएगी।
--तेजाब से हमलों के लिए अलग धारा, इसमें 20 साल की सजा का प्रावधान।
--महिलाओं का पीछा करने, कपड़े फाड़ने और अश्लील व्यवहार को अपराध की श्रेणी में रखा गया।
--शील भंग करने में सजा दो साल से बढ़ाकर पांच साल की गई।
--अश्लील इशारे करने में सजा को एक साल से बढ़ाकर तीन साल।
--आईपीसी के तहत अदालत सजा को कम कर सकती है, लेकिन अध्यादेश के बाद कोर्ट ऐसा नहीं कर सकेगा।

कानून होगा वुमन फ्रेंडली
--यौन हिंसा की शिकार पीड़ित का बयान महिला पुलिस अधिकारी ही दर्ज करेगी।
--18 साल से कम की पीड़ित का सामना आरोपियों से नहीं कराया जाएगा।
--पुलिस अधिकारियों के सामने गवाहों का निजी तौर पर पेश होना जरूरी नहीं।
--तेजाब हमले के दौरान यदि पीड़ित बचाव में हमलावर की हत्या कर देती है तो उसे खुद की रक्षा के अधिकार के तहत सुरक्षा दी जाएगी।

मनमोहन ने दिया था भरोसा
जस्टिस वर्मा को दो दिन पहले लिखे पत्र में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि सरकार की ओर से मैं आपको आश्वासन देता हूं कि समिति की सिफारिशों को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा। समिति ने रिपोर्ट 30 दिन की अल्प अवधि के भीतर पेश कर दी जो सार्वजनिक भलाई वाले कार्य के प्रति आपकी प्रतिबद्धता और चिंता का परिचायक है।

मौजूदा स्थिति
दुष्कर्म में फिलहाल सात साल से उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है।

--630 पन्नों की रिपोर्ट में जस्टिस वर्मा समिति ने सरकार को 23 जनवरी को सौंपी थी सिफारिशें।

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