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अंतिम व्यक्ति के वोट के लिए आई बापू की याद
संजय मिश्र/नई दिल्ली
Updated Wed, 20 Mar 2013 11:48 AM IST
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वोट के लिए ही सही पर सरकार ने महात्मा गांधी के समाज के अंतिम व्यक्ति की चिंता करने के सुझाव पर अमल करते हुए तमाम मतभेदों के बावजूद खाद्य सुरक्षा विधेयक को मंगलवार को मंजूरी दे दी।
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हालांकि मंत्रिमंडल की बैठक में वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने पैसे की कमी का तो कृषि मंत्री शरद पवार ने अनाज भंडारण न कर सकने का रोना रोया।
कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल द्वारा महात्मा गांधी के अंतिम व्यक्ति की चिंता की सलाह की याद दिलाते ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बिल पर सहमति दे दी। इसके साथ ही पीएम ने किसानों का अनाज उत्पादन से मोहभंग होने के खतरे के प्रति भी आगाह किया।
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कैबिनेट सूत्रों के मुताबिक मंत्रिमंडल की बैठक चर्चा के लिए विधेयक पेश किए जाने पर सबसे पहले वित्त मंत्री ने आर्थिक तंगी का रोना रोया।
उनका कहना था कि अर्थव्यवस्था की हालत ठीक नहीं है, इसलिए इसे तीन साल के बदले पहले चरण में महज एक साल के लिए ही लागू किया जाना चाहिए।
पवार ने अन्न भंडारण की समुचित व्यवस्था नहीं होने पर चिंता जताई। उनका कहना था कि हम पहले से ही अन्न का रखरखाव नहीं कर पा रहे हैं।
ऐसे में कानून लागू होने पर हालात संभालना बेहद मुश्किल हो जाएगा। सूत्रों के अनुसार चर्चा के बीच श्रीप्रकाश जायसवाल ने सीधे पीएम को संबोधित करते हुए कहा कि जब हम किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पा रहे तो फिर गांधीजी के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने की बात का ध्यान रखना होगा।
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ऐसे में अगर आपको लगता है कि इस योजना के सहारे हम अंतिम व्यक्ति को लाभ दे सकेंगे तो इस पर आगे बढ़ना चाहिए। जायसवाल की इस टिप्पणी के तत्काल बाद प्रधानमंत्री ने इस विधेयक पर हामी भर दी।
सूत्रों के मुताबिक बिल पर हामी भरने के साथ ही पीएण ने इसके संदर्भ में अपनी अलग चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि विधेयक के अमली जामा पहनने के बाद अनाज दो से तीन रुपये किलो मिलने लगेंगे।
ऐसे में किसान उत्पादन के प्रति उदासीन हो सकते हैं। यह एक बड़ी चुनौती बन सकती है। इसलिए इस पर भी गंभीरता से विचार विमर्श होना चाहिए।
सूत्रों के अनुसार प्रथम चरण में महज एक साल के लिए खाद्य सुरक्षा कानून लागू करने संबंधी चिदंबरम की सलाह का दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल, पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली, संसदीय कार्यमंत्री कमलनाथ तथा कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने यह कह कर विरोध किया कि ऐसा हुआ तो इसे महज एक चुनावी स्टंट माना जाएगा।
सोनिया गांधी का सबसे अहम सियासी एजेंडा माने जा रहे इस बिल की वकालत करते हुए इन मंत्रियों ने कहा कि वैसे भी यूपीए सरकार दूसरी पारी में बड़ी जीत हासिल करने के बावजूद कोई बड़ा काम नहीं कर पाई है।
ऐसे में यूपीए एक में मनरेगा की तरह खाद्य सुरक्षा कानून यूपीए दो के लिए मील का पत्थर बनेगा। सूत्रों के मुताबिक रक्षा मंत्री एके एंटनी ने भी गरीब तबके के हित में इस विधेयक को मंजूरी दिए जाने की पुरजोर वकालत की।