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गुजरात के विवादित आतंकवाद विरोधी कानून को केंद्र की हरी झंडी

Fri, 25 Sep 2015 12:07 AM IST
Updated Fri, 25 Sep 2015 12:07 AM IST
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Cabinet approves Gujcoc bill for Gujarat

केंद्र में निजाम बदलने के बाद गुजरात में लंबे अरसे से लटके चर्चित आतंकवाद विरोधी कानून को मंजूरी मिलने की राह खुल गई है। गुजरात आतंकवाद और संगठित अपराध निरोधक बिल 2015 (गुजकोक) को गृह मंत्रालय ने हरी झंडी दे दी है।

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बतौर गुजरात का मुख्यमंत्री रहते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2001 में पहली बार इस कानून को राज्य विधानसभा में पेश किया था। मगर केंद्र की पिछली यूपीए सरकार ने तीन बार इस प्रस्तावित कानून को मंजूरी देने से मना कर दिया था। बताया जा रहा है कि गृह मंत्रालय ने गुजकोक को हरी झंडी देते हुए आगे की कार्यवाही के लिए इसे राष्ट्रपति के सचिवालय भेज दिया है।
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राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह बिल कानून बन जाएगा। हालांकि गृह मंत्रालय के इस कदम पर सियासत शुरू हो गई है। जदयू महासचिव केसी त्यागी ने गृह मंत्रालय के कदम का विरोध करते हुए राष्ट्रपति से आग्रह किया है कि इस विधेयक को लौटाएं। यह विधेयक जन अधिकारों का हनन करता है।
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जबकि बिल के पक्ष में तर्क दे रहे गृह मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि आतंकवाद और संगठित अपराध से लड़ने के लिए गुजरात को अधिकार देने में पहले ही काफी देर हुई है।

फोन टेपिंग की बात सबूत होंगी

Cabinet approves Gujcoc bill for Gujarat

इस कानून के लागू होने से आतंकवाद के मामलों में फोन टेपिंग की बातों को सबूत के तौर माना जाएगा।  पुलिस अधीक्षक के सामने दिए गए बयान को भी साक्ष्य के रूप में माना जाएगा।

शायद यही वजह है कि इस कानून का विरोध लंबे समय से सियासी दल कर रहे हैं। इसका दुरुपयोग होने पर फोन टेपिंग के मामलों में तेजी आ सकती है और निजता हनन के मामले बढ़ सकते हैं।

वैसे यह देखा गया है कि आम तौर पर गृह मंत्रालय की सिफारिशें राष्ट्रपति द्वारा स्वीकार कर ली जाती हैं। लेकिन संवैधानिक वैधता के आधार पर इस बिल को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल और एपीजे अब्दुल कलाम ने वापस लौटा दिया था।

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