मोदी PM बने तो सुषमा, जेटली और राजनाथ को मिलेंगे ये मंत्रालय!
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लोकसभा चुनाव के नतीजे आने में अभी एक दिन बाकी है, लेकिन नतीजों से पहले ही भाजपा के सियासी गलियारे में नई सरकार के मंत्रालय भी बंटने लगे हैं।
पार्टी के भीष्म पितामह लालकृष्ण आडवाणी और डा. मुरली मनोहर जोशी की भूमिका को लेकर भी पार्टी में मंथन का दौर जारी है। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बनने वाली सरकार में आडवाणी के शामिल होने के आसार नहीं हैं।
खुद मोदी से लेकर राजनाथ सिंह भी चाहते हैं कि आडवाणी और जोशी अब भाजपा में संरक्षक की भूमिका निभाएं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ चाहता है कि आडवाणी और जोशी जैसे वरिष्ठ नेताओं को सरकार में शामिल नहीं होना चाहिए।
सुषमा रक्षा, जेटली वित्त और राजनाथ बनेंगे गृहमंत्री!
इसलिए अब आडवाणी और जोशी के लिए नई भूमिका तलाशी जा रही है। वैसे तो पार्टी के नेता चुनाव नतीजे आने तक मंत्रिमंडल जैसे मुद्दों पर खुल कर बोलने से बच रहे हैं लेकिन आंतरिक तौर पर दबी जुबान में नेताओं की भूमिका को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
ऐसे में आडवाणी को लोकसभा स्पीकर बनाने का प्रस्ताव चर्चा में है। लेकिन वे शायद ही इसके लिए राजी होंगे। वे अभी एनडीए के कार्यकारी अध्यक्ष हैं। जबकि जोशी यदि नहीं मानें तो उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है।
लेकिन यह तय है कि वे प्रमुख चार मंत्रिपदों में शामिल नहीं होंगे। नार्थ और साउथ ब्लॉक में स्थित चार प्रमुख मंत्रालयों में राजनाथ सिंह, सुषमा स्वराज और अरुण जेटली के नाम तय माने जा रहे हैं। वैंकेया नायडू को भी इसी श्रेणी में माना जा रहा है।
नितिन गडकरी को लेकर संशय
वैसे भी अटल सरकार में उन्होंने ग्रामीण विकास मंत्री के तौर पर बेहतर काम किया था। माना जा रहा है कि राजनाथ सिंह कुछ दिन तक पार्टी की कमान थामे रख सकते हैं। यदि वे मंत्री बने तो उन्हें गृह मंत्रालय तथा जेटली को वित्त मंत्रालय मिलना तय है।
सुषमा स्वराज को विदेश या रक्षा मंत्रालय दिए जाने की चर्चा है। नितिन गडकरी को लेकर कहा जा रहा है कि उन्हें पार्टी की कमान दोबारा सौंपने की बजाए मंत्री पद दिया जा सकता है।
टीम मोदी को मिलेगी अहम जिम्मेदारी
इनके अलावा मोदी की टीम में मुख्तार अब्बास नकवी, रविशंकर प्रसाद, जेपी नड्डा के अलावा चुनाव जीतने पर उमा भारती, भुवन चंद्र खंडूरी, मेनका गांधी, राजीव प्रताप रूडी, शाहनवाज हुसैन, हर्षवर्धन, जुएल उरांव के नाम लगभग तय माने जा रहे हैं।
यह तभी है जब वे चुनाव जीतें। इनके अलावा राम विलास पासवान, रामदास अठावले जैसे नेताओं के नाम भी मंत्री पद के लिए सहयोगी दलों से चर्चा में आने लगे हैं।