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नई दवा नीति हुई मंजूर, 348 दवाइयां होंगी सस्ती

Fri, 23 Nov 2012 10:46 AM IST
नई दिल्ली/ अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली/ अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 23 Nov 2012 10:46 AM IST
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cabinate approved new drug policy, price of 348 medicines will be reduced

नई दवा नीति को गुरुवार को मंत्रिमंडल की मंजूरी मिल गई। इस नीति के अमल में आने के बाद जरूरी 348 दवाओं की कीमतों पर सरकार का नियंत्रण रहेगा और इनकी कीमतों में करीब पांच फीसदी की कमी आ सकेगी। नई नीति में औसत बाजार कीमत के आधार को पैमाना माना गया है। विशेषज्ञों के अनुसार अगर वित्त मंत्रालय द्वारा सुझाए लागत मूल्य को पैमाना माना जाता तो इन दवाओं की कीमतों में 75 फीसदी तक कमी आती। वित्त मंत्रालय लागत के आधार पर ही दवाओं की कीमत को तय किए जाने के पक्ष में था।

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बुधवार को हुई मंत्रियों के समूह (जीओएम) की बैठक में नई दवा नीति को अंतिम रूप दिया गया जिसमें वित्त मंत्रालय के लागत मूल्य फार्मूला और दवा उद्योग के बाजार में ज्यादा बिकने वाली दवा को ज्यादा तवज्जो (वेटेड एवरेज प्राइस) देने के फार्मूला के बजाय सभी ब्रांड की औसत कीमत (एवरेज प्राइस) को आधार माना गया।
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जरूरी दवाओं के मूल्य निर्धारण को लेकर वित्त मंत्रालय और जीओएम के बीच भी मतभेद रहे हैं। जिसके चलते दवा नीति को कैबिनेट की मंजूरी नहीं मिल पाई थी। बुधवार को हुई मंत्रियों के समूह की बैठक में वित्त मंत्री पी. चिदंबरम भी मौजूद थे और कीमतों को लेकर बीच का रास्ता निकाला गया।
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नई दवा नीति का सबसे ज्यादा असर उन बहुराष्ट्रीय कंपनियों पर पड़ेगा, जिनकी दवाएं बाकी कंपनियों से ज्यादा महंगी हैं। इस मुद्दे पर सरकार को सुप्रीम कोर्ट के सामने 27 नवंबर को अपना पक्ष रखना है। आर्गनाइजेशन ऑफ फार्मास्यूटिकल प्रोड्यूसर्स ऑफ इंडिया के महासचिव तपन रे का कहना है कि नई नीति का दवा उद्योग पर प्रतिकूल असर पड़ेगा क्योंकि मार्जिन बहुत कम हो जाएंगे। वैसे इन्वेस्ट इंडिया सिक्योरिटीज के रिसर्च हेड दलजीत कोहली का मानना है कि सरकार द्वारा बाजार कीमत आधारित तरीका अपनाना दवा कंपनियों के लिए राहत की बात है।

उल्लेखनीय है कि अभी तक सिर्फ 74 दवाएं ही आवश्यक दवाओं की राष्ट्रीय सूची में शामिल थीं, जिनकी कीमतों पर सरकारी नियंत्रण होता है। इस सूची में 348 दवाओं के शामिल होने के बाद कुल दवा बाजार का करीब 30 फीसदी सरकारी नियंत्रण में आ जाएगा। सरकार एक-दो दिन के भीतर इस नीति की अधिसूचना जारी कर सकती है।

75 फीसदी तक सस्ती हो सकती थीं दवा 

दवा उद्योग के जानकार और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. सीएम गुलाटी का कहना है कि अगर लागत के आधार पर दाम तय होते तो दवाएं 75 फीसदी तक सस्ती हो सकती थीं, लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया। बाजार के आधार पर दाम तय करवाना कतई तर्कसंगत नहीं है।


नई दवा नीति से दवाएं कितनी सस्ती होंगी, यह इस बात पर निर्भर करता है कि इसमें दवाओं के कॉम्बिनेशन और फॉर्मूलेशन को लेकर क्या कहा गया है। इन 348 दवाओं के कुल 1,800 से ज्यादा फॉर्मूलेशन बाजार में हैं, अगर सिर्फ 614 ही सरकारी नियंत्रण में लाए जाएंगे तो 67 फीसदी दवाओं के दाम पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

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