छोटी सी भूल से RBI को हुआ 37 करोड़ का नुकसान
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
छोटी से लापरवाही के कारण रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) को करीब 37 करोड़ रुपये की चपत लग गई। दरअसल, मुद्रा छपाई के लिए आरबीआई की नामित एजेंसी बीआरबीएनएमपीएल ने डॉ. डी सुब्बाराव के सेवानिवृत्त होने के महीनों बाद तक उनके हस्ताक्षर वाला करेंसी छापता रहा।
वह भी तब जब आरबीआई ने उसे सुब्बाराव की विदाई के बाद, नए बने गवर्नर डॉ. रघुराम राजन के हस्ताक्षर वाले नोट ही छापने की हिदायत दी थी।
इस दौरान, बीआरबीएनएमपीएल से संबंधित बैंक नोट प्रेस (बीएनपी) देवास ने 20, 100 और 500 रुपये के 227 लाख नोट छाप डाले। चूंकि 36.69 करोड़ की लागत से छापे गए इन सभी नोटों पर पुराने गवर्नर सुब्बाराव के हस्ताक्षर थे, इसलिए आरबीआई ने इन्हें स्वीकार करने से मना कर दिया।ये सभी नोट अभी भी बीएनपी देवास के स्टोर में पड़े हुए हैं।
वित्त मंत्रालय फिलहाल चुप
खास बात यह है कि इस मामले में हुई चूक पर वित्त मंत्रालय फिलहाल चुप
है। कैग ने बीते साल दिसंबर महीने में ही हुई इस चूक से मंत्रालय को अवगत
कराने के साथ की गई कार्यवाही के बारे में जानकारी मांगी थी।
हालांकि,
रिपोर्ट सार्वजनिक होने तक मंत्रालय ने इस संबंध में की गई किसी भी तरह की
कार्रवाई से कैग को अवगत नहीं कराया था। सुब्बाराव 5 सितंबर 2008 से 4
सितंबर 2013 तक आरबीआई के गवर्नर रहे।
इसके बाद उनकी जगह डॉ. रघुराम राजन
ने इस पद की जिम्मेदारी संभाली। कैग रिपोर्ट के मुताबिक आरबीआई ने नए
गवर्नर की नियुक्ति का हवाला देते हुए बीआरबीएनएमपीएल को जनवरी 2014 से
करेंसी पर सुब्बाराव की जगह राजन का हस्ताक्षर लेने संबंधी पत्र लिखा।
यह है करेंसी नोट छापने की प्रक्रिया
बीआरबीएनएमपीएल से जुड़े बीनएपी नासिक ने तो आरबीआई के नए दिशानिर्देशों का
पालन किया मगर बीएनपी देवास जनवरी 2014 से लगातार कई दिनों तक नए गवर्नर
की नियुक्ति से बेखबर राजन की जगह सुब्बाराव के हस्ताक्षर वाली करेंसी ही
छापता रहा।
आरबीआई नए करेंसी की जरूरतों से इसके लिए नामित भारतीय रिजर्व बैंक प्रतिभूति मुद्रण ओर मुद्रा निर्माण निगम लिमिटेड (बीआरबीएनएमपीएल) को अवगत कराता है।
इसके बाद बीआरबीएनएमपीएल देश के आधा दर्जन बैंक प्रेस नोट (बीएनपी) को करेंसी छापने की जिम्मेदारी देती है। नमूने की जांच के बाद बीएनपी ऑर्डर के मुताबिक करेंसी नोट छापना शुरू करता है। आरबीआई करेंसी नोट छापने का भुगतान नमूने की जांच के बाद कर देता है।
नोटों का मूल्य जितना कम, छपाई की लागत उतनी ज्यादा
साल 2012 में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी की गई जानकारी के अनुसार, करेंसी नोट का मूल्य जितना कम होता है उसकी छपाई में लागत उतनी ही अधिक होती है।
उदाहरण के तौर पर 10 रुपये के नोट की छपाई की लागत लगभग 10 फीसदी आती है जबकि 100 रुपये के नोट की छपाई में दो फीसदी से भी कम की लागत आती है।
इसी तरह, 500 और 1000 रुपये की छपाई में मूल्य के नजरिये से आधी फीसदी से भी कम की लागत आती है।