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पीएम मोदी के फरमान से अफसरों में मची खलबली

Sun, 29 Jun 2014 07:42 AM IST
Updated Sun, 29 Jun 2014 07:42 AM IST
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By decree of the Prime Minister Modi officers resembled turmoil

मोदी सरकार ने यूपीए सरकार के दौरान सुस्त और गैर जवाबदेह हो चुकी नौकरशाही को झकझोर कर रख दिया है। सत्ता में परिवर्तन और नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यभार संभालते ही ऊंघ रही नौकरशाही को जिम्मेदार और जवाबदेह बनाने की कवायद शुरू हो गई है।

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नौकरशाहों को उनके काम के प्रति जिम्मेदार बनाने के लिए मोदी सरकार ने आला सचिवों के लिए फाइलों को निपटाने के साथ ही कैबिनेट से जुड़े नोट और अंतर मंत्रालय विचार-विमर्श के लिए डेडलाइन तय करने का फैसला किया है।
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इतना ही नहीं प्रधानमंत्री कार्यालय ने खुद इस दिशा में मिसाल पेश करने की ठानी है। उसने कैबिनेट सचिव अजित सेठ के जरिये यह संदेश दिया है कि उसने अंतर मंत्रालय नोट और कैबिनेट से जुड़े मुद्दों पर फैसला करने के लिए 15 दिन की मियाद तय की है।
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इस अवधि के दौरान अगर उसकी अनुमति नहीं मिलती है तो संबंधित मंत्रालय या विभाग आगे की कार्यवाही के लिए स्वतंत्र है। इसे एक तरह से पीएमओ की अनुमति ही मानी जाएगी।

पीएम मोदी ने की जवाबदेही तय

By decree of the Prime Minister Modi officers resembled turmoil

मोदी सरकार के फैसले के मुताबिक अगर कैबिनेट या कैबिनेट की उप कमेटी या अंतर मंत्रालय विचार-विमर्श से जुड़े किसी मामले पर मंत्रालय से जुड़ा केंद्र का सचिव निश्चित समय सीमा में पहल नहीं करता या जवाब नहीं देता है तो उसे कैबिनेट के सामने पेश होकर इसकी वजह बतानी होगी।

सचिव को इस सिलसिले में संबंधित मंत्रालय और मंत्री की राय रखनी होगी। कैबिनेट सचिवालय ने सभी मंत्रालयों को साफ निर्देश दिया है कि कैबिनेट नोट पर जल्दी फैसला करें।

सचिवालय का कहना है कि इस कवायद का असली मकसद फैसला लेने की प्रक्रिया में तेजी लाना और कैबिनेट और अंतर मंत्रालय विचार-विमर्श का ठीक तरह से पालन कराना है।

मोदी सरकार यूपीए सरकार के बुरे अनुभव से सबक लेना चाहती है। उस दौैरान बने तीन दर्जन से अधिक मंत्री समूहों और अधिकार प्राप्त मंत्री समूहों में से कुछ की बैठक तो एक भी बार नहीं हुई थी।

पीएमओ में अफसरों को साबित करना होगा सब

By decree of the Prime Minister Modi officers resembled turmoil

नई व्यवस्था के तहत सभी सचिवों और मंत्रियों को साफ कह दिया गया है कि कैबिनेट मीटिंग में आखिरी वक्त में कोई एजेंडा नहीं जोड़ा जाएगा। इसके लिए संबंधित विषय के बारे में एक सप्ताह पहले नोटिस देना होगा।

कैबिनेट सचिवालय ने यह भी कहा है कि सभी मंत्रालयों और विभागों को अंतर मंत्रालय विचार-विमर्श के लिए भेजे जाने वाले मसौदे के नोट को पीएमओ में जमा करना होगा।

पीएमओ में मसौदे के नोट जमा करने के बाद 15 दिन का इंतजार खत्म होते ही अंतिम नोट तैयार कर लेना होगा ताकि इस पर कैबिनेट या कैबिनेट कमेटियां विचार-विमर्श कर सकें। इसकी एक प्रति पीएमओ और कैबिनेट सचिवालय में भी जमा करनी होगी।

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