IAS अधिकारियों का भरोसा नहीं जीत पाए मोदी!
अधिकारियों को खुल कर फैसले लेने के प्रधानमंत्री के प्रोत्साहनों के बावजूद अफसरशाही आशंका से ग्रसित है। देश की अफसरशाही तंत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) अपने को मजबूत कर अफसरशाही से काम तो ले रहा है लेकिन एक साल में उसका यकीन नहीं जीत पाया है।
अपने मंत्री को अनदेखा कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके पीएमओ से सीधे संपर्क में रहने की खुली छूट के बावजूद खासतौर पर शीर्ष अफसरशाही में राजनीतिक नेतृत्व के प्रति यकीन ठोस रूप नहीं ले पाया है।
पूर्व कैबिनेट सचिव बी के चतुर्वेदी ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में कहा कि अगर सरकार अधिकारियों को फैसले के लिए वाकई सुरक्षा कवच देने के प्रति गंभीर है तो उसे भ्रष्टाचार निरोधक कानून (पीसीए) में संशोधन कर इस दिशा में कदम उठाना चाहिए था। लेकिन प्रधानमंत्री सहित सभी मंत्रियों के अफसरशाहों को फैसले लेने के प्रोत्साहन के बावजूद जमीनी स्तर पर कुछ काम नहीं दिख रहा है।
'हर बड़ा फैसला सीधे पीएमओ से हो रहा'
रक्षा मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी ने अपनी मनोदशा बताते हुए कहा कि वह पिछले कुछ महीनों से लगभग रोज सात से आठ हजार करोड़ के रक्षा सौदों के फाइल पर हस्ताक्षर कर रहे हैं। लेकिन उस हस्ताक्षर से पहले उनके हाथ अक्सर कांपने लगते हैं।
अधिकारी कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में पूर्व कोयला सचिव पी सी पारिख के लिए गए फैसले पर सीबीआई की गिरी गाज को उदाहरण के तौर पर पेश करते हैं।
वरिष्ठ अफसरशाह रहे चतुर्वेदी के मुताबिक सरकार मुख्य सतर्कता आयुक्त (सीवीसी) और मुख्य सूचना आयुक्त (सीआईसी) और लोकपाल जैसे अहम पदों की नियुक्ति पर फैसला नहीं कर पा रही है। ये वैसे संस्थान हैं जो सरकार को सवाल पूछते हैं। एक उच्चपदस्थ अधिकारी ने ‘अमर उजाला’को बताया कि हर बड़ा फैसला सीधे पीएमओ से हो रहा है।
मोदी के गुजरात कैडर के अधिकारी यहां भी
वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी मोदी के नजदीकी रहे गुजरात कैडर के आईएएस अधिकारियों के दिल्ली तबादले को भी इसकी बड़ी वजह बताते हैं। मोदी के लंबे समय से खास रहे हसमुख आदिया का वित्तीय सेवा व गिरीश चंद्र मुरमु का व्यय विभाग का सचिव नियुक्त करने का फैसला सीधा पीएमओ से हुआ था।
इतना ही नहीं 1987 बैच के आईएएस राजकुमार का आर्थिक मामले के विभाग के संयुक्त सचिव की नियुक्ति में भी किसी की सलाह नहीं ली गई। गौरतलब है कि पीएमओ में भी नियुक्त हुए अतिरिक्त प्रमुख सचिव पी के मिश्रा, निजी सचिव राजीव टोपनो और संयुक्त सचिव ए के शर्मा की गिनती मोदी के खासमखास में होती है।
सूत्रों के मुताबिक गुजरात कैडर के आईपीएस और मोदी के खास अरुण कुमार सिंह को गृह मंत्रालय में नियुक्त किए जाने का फरमान भी जारी हुआ था। लेकिन गृहमंत्री राजनाथ सिंह के दखल के बाद उन्हें सीबीआई में संयुक्त निदेशक के पद पर बहाल किया गया। अभी करीब छह ऐसे अधिकारी हैं जिन्हें सीधे गुजरात से दिल्ली लाया जा रहा है।