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मंदिर में रखी है ओम बन्ना की बुलेट

Sun, 23 Nov 2014 03:11 PM IST
आभा शर्मा/बीबीसी हिंदी डॉट कॉम
आभा शर्मा/बीबीसी हिंदी डॉट कॉम Updated Sun, 23 Nov 2014 03:11 PM IST
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bullet temple in rajasthan, om banna temple.

भारत में हर साल जनवरी में सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाया जाता है पर राजस्थान के जोधपुर-पाली हाइवे नंबर 65 पर स्थित ओम बन्ना की मोटरसाइकिल मंदिर सालभर यह संदेश देती है।

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पाली ज़िले के चोटिला गांव के निवासी 25 वर्षीय ओम सिंह राठौड़ (ओम बन्ना) का इसी राजमार्ग पर दो दिसंबर 1988 को सड़क दुर्घटना में देहांत हो गया था।

बन्ना की 350 सीसी रॉयल एनफ़ील्ड बुलेट शीशे के एक आवरण में पूजास्थल पर रखी गई है। अब सीकर, बाड़मेर आदि में भी ओम बन्ना को सड़क सुरक्षा दूत के रूप में पूजा जाने लगा है।
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ओम बन्ना के पुत्र महापराक्रमी सिंह कहते हैं, “यह सड़क मार्ग घुमावदार मोड़ों की वजह से दुर्घटनाओं का केंद्र था और मेरे पिता की मृत्यु भी इसी कारण से हुई। पर पिछले कुछ सालों में इस स्थान पर कोई बड़ी दुर्घटना नहीं हुई है।"
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मंदिर ट्रस्ट लोगों को शराब पीकर गाड़ी न चलाने का संदेश भी देता है।

ओम बन्ना की मोटरसाइकिल का राज

bullet temple in rajasthan, om banna temple.

ओम बन्ना की मोटरसाइकिल के चमत्कारिक होने के बारे में भी कई किंवदंतियां हैं। सिंह ने बीबीसी हिन्दी को बताया कि ओम बन्ना ने अपनी दादी के स्वप्न में आकर दुर्घटना स्थल पर 'थान' (पूजा स्थल) बनाने को कहा था।

कुछ अन्यं लोगों ने भी ओम बन्ना से मिलती-जुलती आकृति को दुर्घटनास्थल के आसपास देखने का दावा किया है। कहा जाता है कि जब मोटरसाइकिल को कडला पुलिस थाने पर ले जाया गया, तो इसमें ख़ुदबख़ुद 'स्टार्ट' हो जाने की आवाज़ आती थी।

जब इसे घर वापस लाने पर भी ऐसा ही हुआ तो ओम बन्ना के पिता जोग सिंह ने घटनास्थल पर एक छोटा सा पूजा स्थल बनवा दिया।

लोगों की आस्था ऐसी बढ़ी कि अब हर साल ओम बन्ना की पुण्यतिथि मार्गशीर्ष माह की कृष्णपक्ष अष्टमी पर यहां मेला लगता है और हज़ारों श्रद्धालु अपने मंगलमय और सुरक्षित जीवन की मन्नत मांगने आते हैं।

जोधपुर के सरदारपुरा थाने में तैनात जीतेंद्र सिंह की कडला में पोस्टिंग रही है। वह कहते हैं, "लोगों की आस्था है कि इस मंदिर में मत्था टेकेंगे तो अकाल मृत्यु नहीं होगी।"

नकारात्मक असर

bullet temple in rajasthan, om banna temple.

भारत सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के मुताबिक़ देश में प्रतिवर्ष चार लाख 97 हज़ार सड़क दुर्घटनाएं होती हैं।

जिनमें हर साल क़रीब 1,42,485 लोगों की मौत हो जाती है। यानी हर 3।7 मिनट पर एक व्यक्ति सड़क दुर्घटना में मारा जाता है। 2011 में हुई दुर्घटनाओं में 30 प्रतिशत से अधिक युवा और किशोर (15-24 आयु वर्ग) थे।

इतनी बड़ी संख्या में लोगों के सड़क दुर्घटनाओं में मारे जाने से किसी देश की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) पर तीन से चार प्रतिशत का नकारात्मक असर पड़ सकता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की ग्लोबल स्टेटस रिपोर्ट 2013 में भी इस संबंध में चिंता जताई गई है। देश में सड़क सुरक्षा सप्ताह की परंपरा कोई 25 साल पहले शुरू हुई। लगभग इतने ही सालों से ओम बन्ना की बुलेट भी आम लोगों को सुरक्षा का पाठ सिखा रही है।

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