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ताबड़तोड़ विवादों ने बिछाए बजट सत्र की राह में कांटे

Tue, 16 Feb 2016 04:00 AM IST
Updated Tue, 16 Feb 2016 04:00 AM IST
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budget session in parliament

नए साल में ताबड़तोड़ विवादों ने 23 फरवरी से शुरू हो रहे संसद के बजट सत्र में कार्यवाही की राह में कांटे बो दिए हैं। साल की शुरुआत में ही पठानकोट में आतंकी हमला, हैदराबाद विश्वविद्यालय में दलित छात्र द्वारा आत्महत्या, अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन और जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय विवाद पर सरकार और विपक्ष के रिश्ते की खाई बेहद चौड़ी हो गई है।

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खास बात यह है कि बीते तीन सत्रों से पहले भाजपा के बड़बोले नेताओं के बयान से विवाद खड़ा हुआ था तो इस बार खुद सरकार और विपक्ष आमने सामने है। इन सभी विवादों में सरकार का शीर्ष नेतृत्व और विपक्ष का शीर्ष नेतृत्व के आमने सामने होने के कारण बीच का रास्ता निकलने की उम्मीद भी धूमिल हो गई है।
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इन सभी मुद्दों पर शीर्ष स्तर पर सियासी कटुता बहुत ज्यादा बढ़ गई है। चूंकि सत्र के तत्काल बाद पश्चिम बंगाल और असम में विधानसभा चुनाव होने हैं। इस कारण सियासी कटुता कम होने के बदले और बढ़ जाने के आसार है। ऐसे में इस सत्र में भी सरकार के आर्थिक एजेंडे में ग्रहण लगना फिलहाल तय दिखाई दे रहा है। एक के बाद एक नए विवादों ने संसद के बजट सत्र में बीते तीन सत्रों की तरह ही कामकाज के ठप करने के मजबूत हालात तैयार कर दिए हैं।
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बीते शीतकालीन सत्र में महज एक प्रमुख मुद्दा असहिष्णुता पर कामकाज ठप हुआ था तो इस बार मुद्दों की भरमार है। कांग्रेस जहां सरकार को घेरने के लिए विपक्ष को एकजुट करने में जुटी है, वहीं सरकार जेएनयू के मुद्दे को राष्ट्रवाद से जोड़कर विपक्ष पर जवाबी हमला बोलने की तैयारी कर रही है।

विपक्ष का सरकार पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप

budget session in parliament

जदयू महासचिव केसी त्यागी कहते हैं इन सभी मुद्दों पर सरकार ने तानाशाही रवैया अपनाया है। ऐसे में सभी मुद्दे सत्र के दौरान प्रमुखता से उठेंगे। माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने भी इन सभी मुद्दों को बेहद गंभीर बताते हुए संसद में सरकार को घेरने की घोषणा की है।

मालूम हो कि पठानकोट आतंकी हमला मामले में विपक्ष की रणनीति एयरफोर्स बेस में आतंकियों के छिपे होने के बावजूद गृह मंत्री की ओर से ऑपरेशन खत्म करने की घोषणा को मुद्दा बनाने की है।

इसके अलावा दलित छात्र की आत्महत्या मामले में विपक्ष मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी, अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन और जेएनयू विवाद पर सीधे सरकार पर धावा बोलने की रणनीति बनाई है।

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