'मरणासन्न अर्थव्यवस्था के लिए संजीवनी है बजट'
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी सरकार के पहले आम बजट को मरणासन्न अर्थव्यवस्था के लिए संजीवनी करार दिया है।
बृहस्पतिवार को बजट पेश होने के बाद मोदी ने कहा कि उनकी सरकार भारत को संकट से बाहर निकालने के लिए प्रतिबद्ध और आश्वस्त है। हमें यह विश्वास 125 करोड़ भारतवासियों की क्षमता और शक्तियों के कारण है।
प्रधानमंत्री मोदी ने वित्तमंत्री अरुण जेटली को उनके पहले बजट के लिए बधाई देते हुए कहा कि इस बजट ने जनता की उम्मीदों और आकांक्षाओं को विश्वास में बदल दिया है।
मोदी ने विश्वास जताया कि यह बजट भारत को तरक्की की नई ऊंचाइयों पर पहुंचाएगा और यह गरीबों तथा समाज के वंचित तबकों के लिए उममीद की किरण है।
उन्होंने कहा कि मरणासन्न अर्थव्यवस्था के लिए यह बजट अंतिम पंक्ति में खड़े आदमी के लिए एक संजीवनी और अरुणोदय के रूप में आया है।
'हम सही दिशा की ओर जा रहे हैं'
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह बजट जनभागीदारी और जनशक्ति को बढ़ावा देगा। यह बजट भारत को आधुनिक प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल के साथ कुशल और डिजिटल बनाने का प्रयास है।
मोदी ने कहा कि विकास को समावेशक, सर्वदेशक और सर्वस्पर्शी होना चाहिए और इसे देश के उन क्षेत्रों तक पहुंचना चाहिए जो अभी तक अविकसित हैं।
उन्होंने कहा कि मुश्किल समय के बावजूद सरकार गरीबों, नवमध्यम वर्ग और मध्यम वर्ग को सबका साथ-सबका विकास के मंत्र के साथ हरसंभव सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि हमने जब सरकार बनायी थी तब यह बहस चल रही थी कि क्या यह सरकार राष्ट्र को मुश्किलों से निजात दिला पाई थी। लेकिन रेलवे बजट और आज के आम बजट ने स्पष्ट कर दिया है कि हम सही दिशा की ओर जा रहे हैं।
दृष्टिहीन और मिशनहीन है बजट: ममता
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बृहस्पतिवार को संसद में पेश केंद्रीय बजट को दृष्टिहीन और मिशनहीन करार देते हुए नरेंद्र मोदी की सरकार को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) वाली सरकार बताया है।
उन्होंने कहा कि आम लोगों के नजरिए से यह बजट बेकार है। इससे न तो विकास को बढ़ावा मिलेगा और न ही गरीब तबके का कोई भला होगा।
उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार की ओर से पेश बजट में एक ही सकारात्मक बात है और वह यह कि नई सरकार एफडीआई की, एफडीआई की और एफडीआई के लिए है। खुदरा क्षेत्र में तो पहले से ही एफडीआई है। अब रक्षा व निवेश क्षेत्रों में भी एफडीआई की सीमा बढ़ा कर 49 फीसदी कर दी गई है। इसके अलावा बैंकिंग क्षेत्र में भी विनिवेश की सीमा 49 फीसदी कर दी गई है। ममता ने दावा किया कि इन सबसे देश के लोगों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।
केंद्र पर दोनों बजटों में राजनीतिक बदले का आरोप लगाते हुए तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने कहा कि बंगाल समेत कई राज्य उपेक्षा के शिकार हुए हैं। कपड़ा क्षेत्र में काफी संभावना के बावजूद बंगाल को बजट में प्रस्तावित छह नए समूहों (कलस्टर्स) में जगह नहीं मिली है। इसी तरह फल व सब्जियों का सबसे बड़ा उत्पादक होने के बावजूद राज्य के लिए हार्टिकल्चर विश्वविद्यालय का ऐलान नहीं किया गया है। सौ दिनों के काम के मामले में भी आवंटन में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है।