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बौद्धों की बसों पर भी हो सकता है हमला

Mon, 08 Jul 2013 11:24 PM IST
महराजगंज/ब्यूरो
महराजगंज/ब्यूरो Updated Mon, 08 Jul 2013 11:24 PM IST
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buddhists buses may also attacked after mahabodhi temple serial blasts

बोधगया में आतंकी हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं। खुफिया की मानें तो आतंकवादियों का अगला निशाना बौद्धों की बसें हो सकती हैं।

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बताया जाता है कि सोमवार को रॉ और आईबी की टीम ने सोनौली सीमा की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। इसके बाद एसएसबी कैंप कार्यालय पर बैठक हुई।

गौतम बुद्ध का जन्म स्थान नेपाल के लुंबिनी में है। सोनौली सीमा के रास्ते रोजाना बौद्ध धर्म से जुड़े लोग दर्शन करने जाते हैं। बोधगया में आतंकी हमले के बाद नेपाल बार्डर की सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है।
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रविवार को एसएसबी ने संदिग्धों की चेकिंग की थी। सूत्रों की मानें तो रॉ और आईबी की टीम ने सोमवार सुबह 11:30 बजे सोनौली सीमा की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया।

रॉ के अधिकारियों ने नेपाल जाने वाले छोटे मार्गों का निरीक्षण कर सुरक्षा के आवश्यक निर्देश दिए। वहां से टीम सोनौली एसएसबी कैंप पहुंची।

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वहां बैठक में सुरक्षा एजेंसियों ने आगाह किया कि आतंकवादियों का अगला निशाना लुंबिनी जाने वाली बौद्ध पर्यटकों की बसें हो सकती हैं। बता दें कि रोजाना बौद्ध धर्म से जुड़े लोग सोनौली के रास्ते नेपाल लुंबिनी आते-जाते हैं।

दलाईलामा भी आतंकियों के निशाने पर
म्यांमार के रोहिंज्ञा मुसलमानों और बौद्धों के बीच तनाव में पाक समर्थित आतंकी संगठनों की दिलचस्पी ने तिब्बती धर्मगुरु दलाईलामा को भी निशाने पर ला खड़ा किया है।

रोहिंज्ञा मुसलमानों पर बौद्धों के कथित अत्याचार के बदले की आशंका के मद्देनजर केंद्र सरकार ने दलाईलामा की सुरक्षा कवच को और मजबूत करने का फैसला किया है।

यह फैसला बोधगया के धमाकों से पहले ही कर लिया गया था। केंद्र ने इस बाबत उन सभी राज्यों को निर्देश भेज रखा है, जहां दलाईलामा अपने 78वें जन्मदिन के सिलसिले में यात्रा कर रहे हैं।

दलाईलामा रविवार तक कर्नाटक में थे। गौरतलब है कि तिब्बती धर्मगुरु के पास पहले से जेड प्लस सुरक्षा कवच मौजूद है।

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उच्चपदस्थ सरकारी सूत्रों के मुताबिक दलाईलामा की जेड प्लस सुरक्षा कवच में अति प्रशिक्षित स्पेशल फ्रंटियर फोर्स (एसएफएफ) को शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार इस मुद्दे पर एक-दो दिन में अंतिम फैसला हो जाएगा। खुफिया एजेंसियां सेंट्रल तिब्बत प्रशासन (सीटीए) के सुरक्षा सचिव से लगातार संपर्क में हैं।

इतना ही नहीं, बोधगया धमाकों के बाद दलाईलामा की निजी सुरक्षा के साथ उनके आधिकारिक महल और शुग्लाखांग मंदिर की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है।

गृह मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक म्यांमार में रोहिंज्ञा मुसलमानों और बौद्धों के बीच तनाव का असर भारत पर भी हो रहा है। यही वजह है कि देश भर के बौद्ध और तिब्बती केंद्रों की सुरक्षा के लिए संबंधित राज्यों को कई एलर्ट भेजे जा चुके हैं।

पिछले साल अक्तूबर में दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल द्वारा पकड़े गए आईएम आतंकी के खुलासे के बाद दलाईलामा की सुरक्षा की समीक्षा की गई थी।

बहरहाल, जून में रोहिंज्ञा मुसलमानों और बौद्धों के बीच विवाद में पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-ताइबा की दिलचस्पी की जानकारी मिलने के बाद से सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े हो गए हैं।

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