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सांप्रदायिकता विरोधी रैली से दूर रहेगी बीएसपी, टीएमसी
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Thu, 24 Oct 2013 11:54 AM IST
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आगामी लोकसभा चुनावों से पहले तीसरे मोर्च को धार देने में जुटे दलों से कई पार्टियां राजनीतिक कारणों से दूर रहना चाहती हैं।
उत्तर प्रदेश से बहुजन समाज पार्टी, पश्चिम बंगाल से सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और आंध्र प्रदेश्ा से वाईएसआर कांग्रेस तीसरे मोर्च से दूरी रख सकते हैं।
वामदलों ने तीसरे मोर्च को मजबूती देने के लिए 30 अक्टूबर को सांप्रदायिकता विरोधी रैली का आयोजन नई दिल्ली में किया है। इस आयोजन से तीनों दलों से अपनी दूरी बनाने का फैसला किया है।
इस सांप्रदायिकता विरोधी रैली में अन्नाद्रमुक, सपा, जद यू, बीजद, जद एस और झारखंड विकास मोर्चा समेत कई अन्य पार्टियां शामिल हो रही हैं।
वाम दलों की तरफ से तीसरे मोर्चे के गठन की पहल के बाद से ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस ने इस आयोजन से अपनी दूरी बनाने की कोशिश में लग गई हैं। क्योंकि पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल और वाम दल एक दूसरे के विरोधी हैं। जबकि बसपा ने मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्टी की सक्रियता के चलते सांप्रदायिकता विरोधी सम्मेलन से दूरी बना रखी है।
वाईएसआर कांग्रेस की बात है तो तीसरे मोर्चे की वकालत करने वाले ज्यादातर नेता इस बात के पक्षधर हैं कि सम्मेलन में जगन मोहन रेड्डी को रैली में बुलाया जाए। लेकिन भाकपा के विरोध के चलते आयोजकों ने फिलहाल जगन मोहन रेड्डी से किनारा कर रखा है।
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आंध्र प्रदेश में भाकपा वाईएसआर कांग्रेस के खिलाफ सघन अभियान छेड़े हुए है। सूत्रों का कहना है कि कुछ वाम नेता तो तेदेपा प्रमुख चंद्रबाबू नायडू को भी सम्मेलन में बुलाने के पक्ष में थे, लेकिन भाजपा से नायडू की बढ़ती निकटता के चलते आयोजकों ने फिलहाल उनसे दूरी बनाए रखने का निर्णय किया है।
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उत्तर प्रदेश से बहुजन समाज पार्टी, पश्चिम बंगाल से सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और आंध्र प्रदेश्ा से वाईएसआर कांग्रेस तीसरे मोर्च से दूरी रख सकते हैं।
वामदलों ने तीसरे मोर्च को मजबूती देने के लिए 30 अक्टूबर को सांप्रदायिकता विरोधी रैली का आयोजन नई दिल्ली में किया है। इस आयोजन से तीनों दलों से अपनी दूरी बनाने का फैसला किया है।
इस सांप्रदायिकता विरोधी रैली में अन्नाद्रमुक, सपा, जद यू, बीजद, जद एस और झारखंड विकास मोर्चा समेत कई अन्य पार्टियां शामिल हो रही हैं।
वाम दलों की तरफ से तीसरे मोर्चे के गठन की पहल के बाद से ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस ने इस आयोजन से अपनी दूरी बनाने की कोशिश में लग गई हैं। क्योंकि पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल और वाम दल एक दूसरे के विरोधी हैं। जबकि बसपा ने मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्टी की सक्रियता के चलते सांप्रदायिकता विरोधी सम्मेलन से दूरी बना रखी है।
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वाईएसआर कांग्रेस की बात है तो तीसरे मोर्चे की वकालत करने वाले ज्यादातर नेता इस बात के पक्षधर हैं कि सम्मेलन में जगन मोहन रेड्डी को रैली में बुलाया जाए। लेकिन भाकपा के विरोध के चलते आयोजकों ने फिलहाल जगन मोहन रेड्डी से किनारा कर रखा है।
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आंध्र प्रदेश में भाकपा वाईएसआर कांग्रेस के खिलाफ सघन अभियान छेड़े हुए है। सूत्रों का कहना है कि कुछ वाम नेता तो तेदेपा प्रमुख चंद्रबाबू नायडू को भी सम्मेलन में बुलाने के पक्ष में थे, लेकिन भाजपा से नायडू की बढ़ती निकटता के चलते आयोजकों ने फिलहाल उनसे दूरी बनाए रखने का निर्णय किया है।