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जानिए, कौन हैं 'बाहुबली' धनंजय सिंह और जागृति?
अमर उजाला, जौनपुर
Updated Wed, 06 Nov 2013 09:04 AM IST
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दिल्ली स्थित सरकारी आवास में नौकरानी की हत्या मामले में पत्नी जागृति सिंह समेत गिरफ्तार होने वाले बसपा सांसद धनंजय सिंह के परिवार और विवादों का चोली-दामन का साथ रहा है। पहली पत्नी की मौत के बाद उन्होंने दूसरा विवाह किया है। सांसद की मौजूदा पत्नी जागृति सिंह विधानसभा चुनाव में भी भाग्य आजमा चुकी हैं।
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पहली पत्नी मीनाक्षी सिंह की रहस्यमयी मौत के बाद धनंजय सिंह ने लोकसभा चुनाव जीतते ही डेंटिस्ट डा. जागृति से सतना के मैहर देवी मंदिर में विवाह कर लिया था। जागृति सिंह मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली हैं। दोनों से करीब तीन वर्ष का बेटा अर्जुन है।
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इससे पहले सांसद की शादी पटना की मीनाक्षी सिंह के साथ हुई थी। वर्ष 2007 में मीनाक्षी की लखनऊ के गोमती नगर स्थित आवास पर संदिग्ध परिस्थितियों में आत्महत्या कर ली थी।
मुश्किलों भरा रहा धनंजय का राजनीतिक सफर
सांसद धनंजय सिंह का राजनीतिक सफर काफी मुश्किलों भरा रहा है। वह 2002 में पहली बार रारी विधानसभा से निर्दलीय विधायक चुने गए। दुबारा 2007 के आम चुनाव में लोजपा के टिकट पर विधानसभा पहुंचे।
धनंजय सिंह 2009 में बसपा के टिकट पर चुनाव जीते। 2009 में लोकसभा चुनाव जीतने के बाद रिक्त हुई विधानसभा सीट पर अपने पिता राजदेव सिंह को खड़ा किया और जितवाने में सफल रहे।
तत्कालीन सपा महासचिव अमर सिंह से मुलाकात के बाद 21 सितंबर 2011 को बसपा ने धनंजय सिंह को पार्टी से निलंबित करने का ऐलान कर दिया था। निलंबन का सांसद ने खुला विरोध किया।
इस बीच 26 सितंबर को सीबीसीआईडी ने बेलांव घाट के डबल मर्डर की दोबारा जांच शुरू कर दी। 20 नवंबर को सांसद की बसपा में वापसी हो गई। 11 दिसंबर 2011 को सांसद को बेलांव घाट के दोहरे हत्याकांड में गिरफ्तार कर लिया गया। यह गिरफ्तारी विधानसभा चुनाव के ठीक पहले की गई।
पुलिस ने गैंगस्टर भी तामील करा दिया। विधानसभा चुनाव बीतने के बाद मार्च में उच्च न्यायालय से जमानत हुई।
वर्ष 2012 में विधानसभा के आम चुनाव में मल्हनी विधानसभा क्षेत्र से अपनी पत्नी डा. जागृति सिंह को निर्दल प्रत्याशी के रूप में उतारा। उन दिनों वह जेल में थे।
चुनाव में सपा उम्मीदवार और मौजूदा उद्यान मंत्री पारसनाथ यादव से डा. जागृति का मुकाबला हुआ। सांसद के जेल में होने के बावजूद डा. जागृति सिंह को 50,100 वोट मिले। जबकि विजयी प्रत्याशी पारसनाथ यादव को 81, 602 मत मिले।
17 जनवरी, 2013 को बक्शा के पूरा हेमू निवासी अनिल मिश्रा हत्याकांड में सांसद के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया।
तत्कालीन एसपी मंजिल सैनी ने विवेचना कराई तो पता चला कि मर्डर अनिल मिश्रा के गोल के लोगों ने ही कराया था। इस पर पुलिस ने सांसद को क्लीनचिट दे दी थी।
अब नौकरानी की हत्या का मामला
इन मुसीबतों से मुक्त धनंजय सिंह लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुटे थे। लोकसभा चुनाव का अपने स्तर से आकलन कर रहे थे। एक तरह से सांसद का चुनावी अभियान शुरू हो गया था। निर्वाचन क्षेत्र में बैठकों का दौर जारी था। सोमवार रात में नौकरानी की मौत की खबर आई तो वह कामकाज छोड़कर दिल्ली चले गए।
दिल्ली में हुई घटना की गूंज जौनपुर तक
सांसद धनंजय सिंह के दिल्ली स्थित आवास पर नौकरानी की मौत मामले में उनकी पत्नी जागृति सिंह की गिरफ्तारी की हलचल जौनपुर तक सुनी गई। इस घटना से जौनपुर का सियासी पारा चढ़ गया।
लोग अपने तरह से इस घटना से सांसद को होने वाले राजनीतिक नफे-नुकसान का आकलन करते रहे। लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुटे दल मामले को तूल देने की कोशिश में लग गए हैं।
भदोही पुलिस ने फर्जी इनकाउंटर में मारा था
जिले में जौनपुर के धनंजय सिंह 15 वर्ष पूर्व अद्भुत कारणों से चर्चा में आए। 18 अक्टूबर, 1998 को भदोही के सर्रोई गांव के पास भदोही पुलिस ने चार कथित बदमाशों का इनकाउंटर किया। पुलिस ने दावा किया कि इसमें एक धनंजय सिंह हैं।
बाद में जांच हुई तो पता चला कि चारों युवक निर्दोष थे। उसमें न तो कोई धनंजय सिंह था न ही कोई बदमाश। इस मामले में 22 पुलिसकर्मियों के खिलाफ अभी भी जिला सत्र न्यायालय में मुकदमा चल रहा है।