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धनंजय-जागृति 5 दिन की पुलिस रिमांड पर
अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 06 Nov 2013 11:35 PM IST
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नौकरानी हत्याकांड मामले में गिरफ्तार जौनपुर से बसपा सांसद धनंजय व उनकी पत्नी डॉ. जागृति सिंह को अदालत ने पांच दिन के लिए पुलिस रिमांड पर सौंप दिया है।
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पुलिस ने तर्क रखा कि उनके कब्जे से हत्या में प्रयुक्त हथियार, सीसीटीवी कैमरों की फुटेज व नौकरों को रखवाने वाली प्लेसमेंट एजेंसी का पता लगाया गया है।
पटियाला हाउस स्थित ड्यूटी मजिस्ट्रेट धीरज मित्तल के समक्ष सांसद व उनकी पत्नी जागृति को पेश किया गया।
वहीं, पुलिस ने अदालत के समक्ष नाबालिग नौकर को भी पेश कर उसके शरीर पर चोटों के निशान दिखाए। पुलिस ने अदालत को बताया कि एक अन्य नौकरानी मीना आरएमएल अस्पताल में भर्ती है। वहीं, पुलिस ने केस को मजबूत करने के लिए नौकर के मजिस्ट्रेट के समक्ष भी बयान दर्ज करवा दिए।
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अतिरिक्त सरकारी वकील मुकुल कुमार ने अदालत को बताया कि धनंजय व जागृति के घर पर मृतका राखी, मीना व नाबालिग नौकर रखे गए थे। जागृति तीनों से मारपीट करती थी और धनंजय को इसका पता था।
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उन्होंने कहा कि धनंजय ने पत्नी को रोकने के अपेक्षा कई बार स्वयं भी नौकरों की पिटाई की थी। नौकरानी राखी की डॉ. जागृति ने इतनी बुरी तरह से पिटाई की कि उसकी मौत हो गई। सांसद व उनकी पत्नी ने पुलिस को बताना भी उचित नहीं समझा। चार नवंबर को पता चलने पर पुलिस ने राखी का शव बरामद किया।
उन्होंने अदालत के पूछने पर बताया कि अभी यह पता नहीं चल पाया है कि राखी की मौत दो नवंबर को हुई या फिर तीन को। उसका पोस्टमार्टम होना है और उसी के बाद पता चलेगा कि मौत कब हुई।
उन्होंने कहा कि पता चला है कि दोनों नौकरों को घर से बाहर नहीं निकलने देते थे और उनके गार्ड पूरी निगरानी करते थे। यानि नौकरों को बंधुआ मजदूरों की तरह रखा गया था। इसके अलावा जिन प्लेसमेंट एजेसियों का पता इन दोनों ने दिया है वे पते फर्जी निकले हैं।
उन्होंने अदालत से दोनों आरोपियों का सात दिन का रिमांड प्रदान करने का आग्रह करते बताया कि सांसद के निवास पर 20 सीसीटीवी कैमरे लगे हुए थे और इन लोगों ने कैमरों से हार्ड डिस्क गायब कर दी जिसे बरामद करना है।
इसके अलावा उनके कब्जे से हत्या में प्रयुक्त हथियार यानि प्रैस इत्यादि के अलावा प्लेसमेंट एजेंसी का पता लगाना है। इसी प्रकार दोनों को जोनपुर व बनारस ले जाना है।
बचाव पक्ष के तर्क-
सांसद धनंजय की और से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता हरीहरण ने रिमांड पर आपत्ति जताते हुए कहा उनके मुवक्किल को फर्जी मामले में फंसाया गया है। उन्होंने कहा घटना के समय उनका मुवक्किल जौनपुर में था और पांच नवंबर को सायं सात बजे दिल्ली आया है।
इसके अलावा वह स्वयं जागृति से प्रताड़ित हैं और उनका जागृति सिंह से तलाक का केस चल रहा है। इसी कारण उनका मुवक्किल दूसरे फ्लैट में रहता है।
उन्होंने कहा दिल्ली आते ही उनके मुवक्किल ने स्वयं थाने पहुंच कर पुलिस को सीसीटीवी फुटेज प्रदान की है वहीं प्लेसमेंट एजेंसी का पता भी बताया है। ऐसे में उनका मुवक्किल कैसे दोषी हो सकता है।
डॉ. जागृति सिंह के अधिवक्ता पंकज कुमार ने भी रिमांड पर आपत्ति जताते हुए कहा कि पुलिस ने उनके निवास से प्रैस, हिरण के सींग (मैटल के), लाठी इत्यादि बरामद कर ली है। ऐसे में रिमांड की जरूरत नहीं है। इसके अलावा वह स्वयं घरेलु हिंसा की शिकार है।
अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपने फैसले में कहा कि पूरे रिकार्ड, अपराध की गंभीरता को देखने के बाद उनका मानना है कि हत्या में प्रयुक्त सामान, साक्ष्य जुटाने व रिकवरी करने के लिए पुलिस को रिमांड देना जरूरी है। अत: वे दोनों को पांच-पांच दिन के लिए पुलिस रिमांड पर भेजते है।