BHU के छात्रों से 'चंबल के डकैतों' जैसा सलूक
काशी हिंदू विश्वविद्यालय परिसर में दो दिन से जारी बवाल के दौरान पुलिस ने निरंकुशता की सारी हदें पार कर दीं। यूपी पुलिस का व्यवहार निहायत ही बर्बर और अमानवीय दिखा। बीएचयू में छात्रों के साथ पुलिस के रवैये पर यह प्रतिक्रिया है बीएचयू विधि संकाय के पूर्व प्रमुख व देश के जानेमाने अपराधशास्त्री प्रो. महेंद्र प्रताप सिंह की।
प्रो. सिंह ने कहा कि गुरुवार को जिस तरह प्रदेश के कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश सिंह के निहत्थे बेटे राहुल राज सिंह को छह से अधिक कांस्टेबल घेरकर डंडे से पीट रहे थे, वह किसी भी दृष्टि से उचित नहीं था। भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता में ऐसा प्रावधान कहीं भी नहीं है। वह लड़का न तो भाग रहा था, न हमला कर रहा था और न ही कुख्यात अपराधी है। पुलिस को इस तरह पीटने का कोई अधिकार नहीं है।
उन्होंने कहा कि शुक्रवार को तो सुनने में आया कि बनारस के डीएम और एसएसपी ने भारी संख्या में फोर्स लेकर छात्रों को पीटते हुए हास्टल से निकाला और जबरन ले गए। पुलिस एक शैक्षणिक संस्थान में ऐसा व्यवहार कर रही थी कि मानो वह चंबल में डकैतों के खिलाफ मोर्चा लेने आई हो।
प्रो. सिंह ने कहा कि वे वर्ष 1965 से बीएचयू से जुड़े हैं। इतना अनुभवहीन और संवेदनशून्य विश्वविद्यालय और जिला प्रशासन नहीं देखा। किसी भी शैक्षणिक संस्थान में हिंसा और शिक्षा एक साथ नहीं चल सकती। चाहे यह हिंसा छात्रों की हो या फिर पुलिस प्रशासन की।
बिड़ला-ब्रोचा हॉस्टल के छात्रों में खूनी संघर्ष
बीएचयू में छात्र आंदोलन की चिंगारी से लगी आग दूसरे दिन और भड़क उठी। शुक्रवार को छात्र परिषद और छात्रसंघ के समर्थक छात्र आपस में ही भिड़ गए। बिड़ला हॉस्टल में रहने वाले कला संकाय और ब्रोचा के विज्ञान संकाय के छात्रों के बीच पांच घंटे तक पथराव, फायरिंग हुई। पेट्रोल बम के धमाके से कैंपस थर्रा उठा। इस खूनी संघर्ष में चार सौ से अधिक छात्रों को चोटें आई हैं। एक की हालत गंभीर है। उसे बीएचयू के आईसीयू में भर्ती कराया गया है।
बेबस छात्र लगातार पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन को फोन करते रहे लेकिन उनकी सुध लेने कोई नहीं आया। दोपहर 12 बजे डीएम और एसएसपी की अगुवाई में परिसर पहुंची पुलिस फोर्स ने बिड़ला हॉस्टल में घुसकर छात्रों की बेरहमी से पिटाई की। उपद्रव को देखते हुए बीएचयू प्रशासन ने पांच हॉस्टलों को छात्रों से खाली कराकर उसे पीएसी के सुपुर्द कर दिया है।
पुलिस ने 150 से अधिक छात्रों को हिरासत में लिया है, जिन्हें अलग-अलग थानों में रखा गया है। उधर, उपद्रवी छात्रों ने मैत्री जलपान गृह के सामने से गुजरने वालों से भी मारपीट की और कला संकाय में घुसकर तोड़फोड़ की। देर शाम प्रभारी कुलपति ने प्रो. सत्येंद्र सिंह को नया चीफ प्राक्टर नियुक्त कर दिया।
पांच घंटे बाद पुलिस ने शुरू किया ‘आपरेशन’
पुलिस और बिड़ला हॉस्टल के छात्रों के बीच गुरुवार को पथराव के दौरान ब्रोचा के कुछ छात्रों को चोटें आई थीं। इस बात पर दोनों हॉस्टलों के छात्रों के बीच देर रात से ही तनातनी चल रही थी। सुबह होते-होते मामला इतना बढ़ गया कि दोनों तरफ से पथराव होने लगा। दोनों हॉस्टलों के छात्र एक-दूसरे पर हमला करते रहे। फायरिंग की और राहगीरों की गाड़ियों से पेट्रोल निकालकर उससे बम बनाकर फेंकते रहे। हॉस्टल में मौजूद छात्र मदद के लिए सौ नंबर पर लगातार फोन मिलाते रहे।
जिलाधिकारी और विश्वविद्यालय प्रशासन से मदद की गुहार लगाते रहे लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। मामला नियंत्रण से बाहर होता देख बीएचयू प्रशासन ने दोपहर में जिला प्रशासन से जब मदद की गुहार की। उसके बाद पुलिस ने ‘आपरेशन’ शुरू किया। बिड़ला ए, बी और सी हॉस्टल में घुसकर छात्रों की जमकर पिटाई की गई। इनमें रहने वाले 40 से ज्यादा शारीरिक रूप से अक्षम और दृष्टिहीन छात्र भी पुलिस की बर्बरता से बच नहीं सके। बिड़ला ए के प्रशासनिक वार्डेन डॉ. नीरज खरे, कर्मचारी ब्रह्मा और नागेंद्र को भी पुलिस ने पीटा और उठा ले गई।
बिड़ला सहित पांच हॉस्टल खाली कराए गए
वाराणसी। छात्रों पर पुलिस ने न केवल बर्बरता से लाठियां बरसाईं बल्कि एक घंटे के अंदर उन्हें हास्टल छोड़ने के लिए भी बाध्य किया। आनन-फानन में बिड़ला ए, बी और सी के अलावा राजाराम हास्टल और लाल बहादुर शास्त्री छात्रावास खाली करा लिए गए।
कमिश्नर और डीआईजी भी डटे रहे
जब डीएम प्रांजल यादव और एसएसपी जोगेंद्र कुमार हॉस्टल में सर्च आपरेशन को अंजाम दे रहे थे तो बाहर कमिश्नर आरएम श्रीवास्तव और डीआईजी एसके भगत मोर्चा संभाले हुए थे। जब तक पुलिस टीम ने पांचों हॉस्टल खाली नहीं करा लिए, दोनों मौके पर ही डटे रहे। हालांकि पूरी कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मीडिया को मौके से दूर रखा।
सुरक्षा के लिए प्रदर्शन
एक तरफ कला संकाय के छात्रावास खाली कराए जा रहे थे, दूसरी ओर ब्रोचा चौराहे पर आईआईटी और साइंस फैकल्टी के सैकड़ों छात्र जुट गए और सुरक्षा की मांग करने लगे। बाद में कुलपति प्रो. राजीव संगल ने उनको समझा-बुझाकर शांत कराया।
आखिर कहां से आए हास्टल में असलहे
बीएचयू कैंपस में शुक्रवार की सुबह दो हास्टल के छात्रों के बीच मारपीट और फायरिंग की घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे अहम यह कि हास्टल में रहने वाले छात्रों के पास असलहे आए कहां से ? दोनों पक्षों की ओर से कई राउंड गोलियां चलाई गईं। इससे पुलिस के अधिकारी भी हैरान हैं। बीएचयू कैंपस में करीब 65 हास्टल हैं।
गुरुवार को पुलिस और छात्रों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद परिसर जिला प्रशासन के हवाले कर दिया गया लेकिन स्थितियां शुक्रवार को भी नियंत्रित नहीं हुईं। सुबह बिड़ला और ब्रोचा हास्टल के छात्र आमने-सामने आ गए। मारपीट के दौरान दोनों पक्षों की ओर से कई राउंड फायरिंग की गई। लंका थानाध्यक्ष विनोद यादव का दावा है कि हास्टलों में छात्रों ने अवैध असलहे छिपाकर रखे थे। यदि छात्रावासों की ठीक से चेकिंग कराई जाए तो बड़ी संख्या में असलहे बरामद किए जा सकते हैं। गौरतलब है कि बीएचयू कैंपस की सुरक्षा व्यवस्था प्राक्टोरियल बोर्ड के जिम्मे है।
बोर्ड की टीम समय-समय पर हास्टलों में चेकिंग करती है और विश्वविद्यालय के सुरक्षा कर्मी भी उनके निर्देशन में लगातार निगरानी करते हैं। बावजूद इसके हास्टलों में अवैध असलहे कैसे पहुंचे, इसे लेकर पुलिस-प्रशासन के अधिकारी हैरान हैं। एसओ लंका के मुताबिक दोनों हास्टलों में किसी भी तरफ से कोई तहरीर नहीं दी गई है। यदि तहरीर आएगी तो मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। उधर, बीएचयू प्रशासन का दावा है कि परिसर में कहीं कोई फायरिंग नहीं हुई।
दो हजार से अधिक छात्रों ने छोड़ा कैंपस
कैंपस में शुक्रवार को छात्रों के दो गुटों में टकराव के बाद दहशत और बढ़ गई है। घटना के बाद से दो हजार से अधिक छात्र-छात्राएं कैंपस छोड़ चुके हैं। पठन-पाठन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। हास्टलों में रहने वाले छात्र-छात्राओं के परिवारवाले भी चिंतित हैं। मनोज पाठक, अजय गिरी, ओमप्रकाश आदि छात्रों ने बताया कि माहौल न सुधरा तो जो छात्र अभी यहां हैं वे भी घर चले जाएंगे।
बिड़ला हास्टल के दो छात्रों को लगी गोली
लंका क्षेत्र के साकेत नगर में शुक्रवार की दोपहर बीएचयू के बिड़ला हास्टल के दो छात्रों को गोली लग गई। हास्टल खाली कराए जाने के बाद वे यहां अपने दोस्त के कमरे पर आए थे। उन्हें गोली किसी ने मारी या कोई तमंचा उनके पास था जिससे असावधानीवश गोली चल गई, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है। एक के सिर और दूसरे के हाथ में गोली लगी है। मौके से .12 बोर का एक खोखा बरामद हुआ है। दोनों को बीएचयू अस्पताल में भर्ती कराया गया है। लंका पुलिस मामले की छानबीन में जुटी है।
गाजीपुर का रहने वाला अमित केशरी बीएचयू में एमए प्रथम वर्ष और बिहार के सासाराम का रहने वाला अंकुर केशरी बीए प्रथम वर्ष का छात्र है। दोनों बिड़ला छात्रावास में रहते हैं। शुक्रवार को बवाल के बाद प्रशासन ने दोपहर में हास्टल खाली करा दिया। इसके बाद दोनों साकेत नगर में रहने वाले अपने दोस्त आशुतोष के कमरे पर पहुंचे। आशुतोष एसएससी की तैयारी करता है। कु छ देर बाद आशुतोष किसी काम से कहीं चला गया। अमित और अंकुर खाना बना रहे थे। इसी दौरान कमरे से तीन बार गोली चलने की आवाज आई। मकान मालिक प्रथम तल से नीचे आए तो अमित और अंकुर लहूलुहान पड़े थे। अमित के सिर और अंकुर के हाथ में गोली लगी थी। सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंची। दोनों को बीएचयू अस्पताल में भर्ती कराया गया। अमित की हालत गंभीर बनी हुई है।
सीओ भेलूपुर सोमेंद्र का कहना है कि दोनों छात्र बीएचयू के हैं। गोली कैसे लगी इसका पता अभी नहीं चल पाया है। घटना स्थल से .12 बोर का एक खोखा बरामद किया गया है। वहां कोई तमंचा नहीं मिला। हो सकता है कि पुलिस के पहुंचने से पहले कोई वहां से असलहा हटा दिया हो। घायलों के बयान के बाद ही स्थितियां स्पष्ट होंगी। वहीं दूसरी ओर चर्चा यह भी रही घटना से कु छ देर पहले बाइक सवार तीन युवक आशुतोष के कमरे पर आए थे। उन्होंने ही अमित और अंकुर को गोली मारी। घटना के बाद तीनों मुंह बांध कर भाग निकले। हालांकि पुलिस इससे इंकार कर रही है।
छात्रों का बवाल सुनियोजित साजिश: कुलपति
बीएचयू के प्रभारी कुलपति प्रो. राजीव संगल का कहना है कि छात्र आंदोलन की आड़ में दो दिनों से परिसर में अराजक हुए माहौल के पीछे सुनियोजित साजिश है। इसमें विश्वविद्यालय के ही कुछ लोग शामिल हैं। ऐसे लोगों की पहचान की जा रही है। पूरे प्रकरण की जांच के लिए एक कमेटी बनाई जाएगी। रिटायर्ड जज जांच कमेटी के मुखिया होंगे। इस कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
शुक्रवार की शाम परिसर स्थित एलडी गेस्ट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान प्रभारी कुलपति प्रो. संगल ने कहा कि परिसर में हिंसा और उपद्रव करने वाले 15 छात्रों को प्राक्टोरियल टीम ने चिह्नित किया है। इनमें से पांच के खिलाफ गुरुवार को मुकदमा दर्ज कराया गया था। दस छात्रों के खिलाफ शुक्रवार को केस दर्ज कराया गया है। वीडियोग्राफी के दौरान ये सभी छात्र उपद्रव में शामिल पाए गए हैं।
परिसर में पुलिस के देर से पहुंचने के सवाल पर प्रो. संगल ने कहा कि पुलिस प्रशासन से सुबह 9:30 के करीब कार्रवाई करने के लिए लिखित अनुरोध किया गया था। पुलिस अधिकारियों ने पर्याप्त फोर्स न होने का हवाला देकर तत्काल कार्रवाई करने में असमर्थता जताई थी। बाद में अतिरिक्त फोर्स के आने के बाद पुलिस ने छात्रावासों में सर्च आपरेशन शुरू किया।
अध्यापकों-छात्रों में है संवाद की कमी
प्रभारी कुलपति प्रो. राजीव संगल का कहना है कि इतनी बड़ी घटना के पीछे विश्वविद्यालय में संवाद का अभाव भी एक बड़ा कारण है। छात्रों और अध्यापकों के बीच संवाद की कमी है। प्रो. संगल ने बताया कि सुबह कार्रवाई करने में इस वजह से भी देर हुई क्योंकि पहले विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपने स्तर से इस मामले को सुलझाने का प्रयास किया। अध्यापकों की टीम को हास्टल भेजा और बातचीत से मामला सुलझाने की कोशिश की। कुछ अध्यापक ब्रोचा हास्टल पहुंचने में कामयाब भी हो गए थे लेकिन पथराव और फायरिंग देख उन्हें पीछे हटना पड़ा। इसके बाद विश्वविद्यालय की ओर से साढ़े नौ बजे के करीब जिला प्रशासन से लिखित कार्रवाई का अनुरोध किया गया।
प्रो. सत्येंद्र सिंह बने चीफ प्राक्टर
जियोलॉजी विभाग के प्रो. सत्येंद्र सिंह को बीएचयू का नया चीफ प्राक्टर बनाया गया है। वह प्रो. एके जोशी की जगह लेंगे, जिन्होंने गुरुवार को इस्तीफा दे दिया था। प्रेसवार्ता में कुलपति प्रो. संगल ने यह जानकारी दी।
स्थगित की गई परीक्षा
बीएचयू में हुए बवाल को देखते हुए दिसंबर में होने वाली सेमेस्टर परीक्षाएं स्थगित कर दी गई हैं। कुलपति ने बताया कि परीक्षा की नई समय सारिणी जल्द जारी की जाएगी। बता दें कि परीक्षाएं दो दिसंबर से शुरू होने वाली थीं। शुक्रवार को बवाल के दौरान परिसर में पांच हास्टल खाली करा लिए गए हैं। अगले आदेश तक ये हास्टल बंद रहेंगे।