फिर जोड़ा जाएगा सरकार और संगठन में टूटा संवाद
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भ्रष्टाचार और महंगाई की बदनामी में झुलसी सरकार की छवि सुधारने की चुनौती कांग्रेस के सामने खड़ी हो गई है। आर्थिक सुधारों की गाड़ी को टॉप गीयर में लाकर सरकार ने विकास का मुद्दा तो उठाया है। मगर सामाजिक और बुनियादी ढांचे में विकास की गति अभी भी सुस्त है। लिहाजा, इस क्षेत्र को तेज रफ्तार देने के लिए बाकायदा संगठन और सरकार के बीच टूटे संवाद को जोड़ने की कोशिश की गई है।
पार्टी के अंदर एक धड़े का मानना है कि सरकार संगठन की बात सुनती नहीं है। मनमोहन सरकार के मंत्री मदमस्त होकर आगे बढ़ रहे हैं। साथ ही चुनाव घोषणा पत्र के कई बड़े वायदों को अभी तक मूर्त रूप नहीं दिया गया है। इससे आगामी चुनाव में पार्टी को बड़ा नुकसान हो सकता है।
पार्टी के एक नेता ने कहा कि 2009 लोकसभा चुनाव का घोषणा पत्र सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र के कई बड़े दिग्गजों की राय के बाद बना था और इसका फायदा चुनाव में हुआ था। मगर इसे मूर्त रूप देने में सरकार ने अभी तक कुछ खास दिलचस्पी नहीं दिखाई है।
वहीं कांग्रेस महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने कहा कि संवाद बैठक का एजेंडा मौजूदा राजनीतिक मुद्दों, चुनाव घोषणा पत्र में बचे वायदों को पूरा करने और आर्थिक चुनौती के मसले पर आधारित होगा। बैठक में कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य के साथ ही कैबिनेट और स्वतंत्र प्रभार के राज्य मंत्री मौजूद होंगे।