लाला लाजपत राय: गोरे भी डरते थे शेर-ए-पंजाब से

सुनील चड्ढा/शिमला Updated Sat, 17 Nov 2012 11:12 AM IST
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british government was also afraid of lala lajpat rai

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मेरे शरीर पर पड़ी एक-एक लाठी ब्रिटिश सरकार के ताबूत में एक-एक कील का काम करेगी...। शेर-ए-पंजाब के नाम से मशहूर महान स्वतंत्रता सेनानी लाला लाजपत राय के ये सरफरोशी भरे लफ्ज 20 साल बाद सच साबित हुए, जब हिंदुस्तान को अंग्रेजों के पिंजरे से आजादी मिली।
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22 अगस्त, 1922 को अंग्रेजों ने लाला लाजपत राय को लाहौर जेल से धर्मशाला शिफ्ट किया। उन दिनों देश में असहयोग आंदोलन की आग चर्म पर थी। हर तरफ ब्रिटिश हुकूमत का विरोध हो रहा था। ऐसे में गर्म मिजाज लाला जी के आने से अमूमन शांत और ठंडी रहने वाली धौलाधार की वादियां सियासी मायनों में एकाएक गर्म हो गईं। इन दिनों वह उत्तरी भारत के आंदोलन के अगुआ थे। इन्हीं क्रांतिकारी गतिविधियों के चलते उन्हें लाहौल जेल में बंद किया गया था। इसके बाद हिंदुस्तानियों में ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ नफरत का जहर और फैल गया।
कहा जाता है कि ब्रिटिश हुकूमत ने बड़ा विद्रोह होने के डर से ही उन्हें धर्मशाला जेल में रखने का निर्णय लिया। धर्मशाला जेल में आने के बाद उन्होंने क्रांतिकारी गतिविधियां परोक्ष रूप से जारी रखीं। उनके धर्मशाला जेल में आने के बाद हिमाचली भी सरफरोशी की तमन्ना पालने लगे। यहां उनके साथ कई हिमाचली स्वतंत्रता सेनानी भी कैद थे।
युद्धवीर कटोच, धर्मशाला निवासी स्वतंत्रता सेनानी पंचम चंद कटोच, सर्व मित्र अवस्थी, पालमपुर निवासी लाला बांशी राम, पहाड़ी गांधी की उपाधि से अलंकृत बाबा कांशीराम भी उनके साथ रहे। 10 मार्च, 1922 को कई हिमाचली स्वतंत्रता सेनानी क्रांतिकारी गतिविधियों के चलते जेल में बंदी बनाए गए थे। 4 फरवरी, 1921 को धर्मशाला में एक विशाल जनसभा करने पर इन्हें जेल में डाल दिया गया था। हिमाचली स्वतंत्रता सेनानी बाबा कांशीराम पांच मई 1920 को दो साल के लिए धर्मशाला जेल में डाले गए थे। 9 जनवरी, 1923 को साढ़े चार माह बाद लाला जी को रिहा किया गया था।

धर्मशाला कॉलेज के इतिहास विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर अमर सिंह पराशर का कहना है कि धर्मशाला जेल में हिमाचली स्वतंत्रता सेनानियों ने लाला लाजपत राय से राजनीति के गुर सीखे थे। 30 अक्तूबर, 1928 को लाहौर में साइमन कमीशन के विरोधस्वरूप अंग्रेजों के लाठीचार्ज में गंभीर घायल लाला जी ने 17 नवंबर, 1928 को देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी।

लाहौर से शिमला लाई गई लाला जी की प्रतिमा
लाला जी का धर्मशाला के अलावा हिमाचल की राजधानी शिमला से भी गहरा नाता रहा है। माल रोड के पास स्कैंडल प्वाइंट में स्थापित लाला लाजपत राय की प्रतिमा लाहौर से लाई गई थी। हिंदुस्तान के विभाजन के बाद 15 अगस्त, 1948 को डॉक्टर गोपी चंद भार्गव ने यहां इसका अनावरण किया था।
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