जानिए, कितनी मुश्किल है काले धन की वापसी?
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भारत में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में 627 लोगों के नामों की सूची बंद लिफाफे में सौंपी है। इसके बाद से लोगों की बीच इस बात को लेकर चर्चा हो रही है कि विदेशों से काला धन भारत वापस लाना कितना आसान या मुश्किल है।
अगर इतिहास पर ग़ौर करें तो कह सकते हैं कि विदेशों से पैसा वापस भारत लाना काफ़ी मुश्किल है। इस काम को किसी निष्कर्ष तक पहुंचाने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी।
वरिष्ठ अर्थशास्त्री अरविंद विरमानी ने विदेशों से काला धन लाने की मुश्किलों को बीबीसी हिन्दी के साथ साझा किया।
पढ़िए अरविंद विरमानी का विश्लेषण
बहुचर्चित बोफ़ोर्स मामले में 20-30 साल पहले काफ़ी शोर मचा था कि मेरे पास बैंक खातों का नंबर है। अर्थशास्त्री कहते हैं कि भारत में मौजूद काला धन विदेशों से ज़्यादा है।
लेकिन जहां तक मेरी जानकारी है, उस मामले में एक कौड़ी भी ट्रैक करके वापस नहीं लाई जा सकी है। ऐसा हो सकता है कि दस में कुछ एक व्यक्तियों को पकड़ लें, लेकिन उसमें से काले धन का जो हिस्सा ला सकेंगे, वह भी बहुत कम होगा।
पहले भी कुछ एक नेताओं ने कहा कि उनके पास एक बड़े उद्योगपति का नंबर है, जिनका खाता विदेश में है। लेकिन यह सारी कहने की बातें है।
कितना काला धन है विदेशों में?
ऐसे खाते की जानकारी हासिल करना और पैसे को वापस लाना वाकई मुश्किल है। भारत में काले धन के बारे में शोध करने वाले लोगों को लगता है कि बड़े नंबर बताने से सुर्खियां मिलेंगी, इसलिए इस तरह के आँकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर बताया जाता है।
अनुमान लगाते समय आय और संपत्ति को कई सारे अध्ययन में बिल्कुल उलझा दिया गया है। कहीं से संपत्ति ले ली गई, तो कहीं से आय ले ली गई, उन सबको आपस में जोड़कर अनुमान लगाए जाते हैं। कुल मिलाकर काले धन को काफ़ी बढ़ाकर बताया जाता है।
देश में है ज़्यादा काला धन
दूसरी बात है कि आप घरेलू स्तर पर पकड़ी जाने वाली कर चोरी को देख लें, विदेशों में इस तरह के जो मामले पकड़े जाएंगे वह घरेलू स्तर की तुलना में काफ़ी कम होंगे। यहां पर तो सरकार की अपनी पुलिस है और देश की न्याय व्यवस्था है। लेकिन विदेशों में तो आपको अनुरोध करना पड़ेगा, उनके नियमों का पालन करना होगा, उनसे मांग करनी होगी।
जैसे स्विस बैंक में गोपनीयता के नियम हैं, इस वजह से किसी मामले के संदर्भ में विशिष्ट जानकारी ही साझा की जाती है। वहां सूची देने जैसी स्थिति नहीं है। वहीं बहुत से देश तो कोई जानकारी ही साझा नहीं करते। वैश्विक स्तर पर व्यवस्था बदल रही है। हो सकता है कि पाँच-दस साल बाद परिस्थितियां आसान हों, लेकिन अभी तो इस राह में काफ़ी मुश्किल हैं।
अनुमान है कि देश में काले धन विदेशों में रखे धन से कहीं ज़्य़ादा है। इस बारे में काले धन का अध्ययन करने वाले एक प्रोफ़ेसर कहते हैं कि विदेशों में भारत के काले धन का मात्र दसवां हिस्सा है।
(अरविंद विरमानी भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के आर्थिक सलाहकार रह चुके हैं। उनसे बात की बीबीसी संवाददाता ज़ुबैर अहमद ने)