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मनरेगा को लेकर सरकार को सुप्रीम कोर्ट का अहम आदेश

Sat, 12 Jul 2014 05:27 PM IST
Updated Sat, 12 Jul 2014 05:27 PM IST
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bring wages under mgnregs on par with minimum wages: sc

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार से कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत देय पारिश्रमिक विभिन्न राज्यों में दिए जाने वाले न्यूनतम वेतन के बराबर लाया जाए।

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जस्टिस एसजे मुखोपाध्याय और जस्टिस एसए बोबड़े की पीठ ने केंद्र को निर्देश दिया कि मनरेगा के तहत देय पारिश्रमिक राज्य सरकार की ओर से खेतिहर मजदूरों के लिए निर्धारित न्यूनतम पारिश्रमिक से कम नहीं हो सकता।
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सरकार ने पीठ को सूचित किया कि उसने पहले ही राज्य सरकार की ओर से निर्धारित न्यूनतम मजदूरी के बराबर पारिश्रमिक देने के बारे में अधिसूचना जारी कर दी है।

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'श्रमिकों को करें बकाया राशि का भुगतान'

bring wages under mgnregs on par with minimum wages: sc

सुप्रीम कोर्ट कर्नाटक हाईकोर्ट के 23 सितंबर, 2011 के आदेश के खिलाफ केंद्र सरकार की अपील पर सुनवाई कर रहा है। हाईकोर्ट ने कहा था कि मनरेगा के तहत देय पारिश्रमिक न्यूनतम मजदूरी से कम नहीं हो सकता।

कोर्ट ने यह भी कहा था कि केंद्र को उन श्रमिकों को बकाया राशि का भुगतान करना चाहिए जिन्हें कम पारिश्रमिक दिया गया था।

सर्वोच्च अदालत में एक श्रमिक यूनियन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वीके बीजू ने पारिश्रमिक में अंतर को न्यायोचित ठहराने की केंद्र सरकार की दलील का पुरजोर विरोध किया।

इससे पहले, शीर्षस्थ अदालत ने कम पारिश्रमिक देने पर सरकार से जवाब मांगा था। केंद्रीय रोजगार योजना के तहत राज्यों में 118 रुपये से 181 रुपये के बीच पारिश्रमिक दिया जाता है। यह पारिश्रमिक छह राज्यों में निर्धारित न्यूनतम मजदूरी से कम है, जबकि 16 राज्यों में मनरेगा के तहत श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी से अधिक दिया जाता है।

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