सड़क पर वसूली जाती है 22 हजार करोड़ की रिश्वत

अमर उजाला, दिल्ली Updated Mon, 25 Nov 2013 05:04 PM IST
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bribe of 22,000 crore paid on roads every year

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सड़कों पर दी जाने वाली रिश्वत जगजाहिर है लेकिन इसके जरिए इकट्ठा हुआ पैसा हैरान करने वाला है। एक अध्ययन के मुताबिक हर साल सड़क पर करीब 22 हजार करोड़ की रिश्वत दी जाती है।
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इतना ही नहीं अध्यन में शामिल 60 प्रतिशत मामलों में नियम न तोड़ने पर भी जुर्माना लगाया गया है। रिश्वत का 90 प्रतिशत हिस्सा पुलिसकर्मियों और ट्रांसपोर्ट विभाग के कर्मियों को जाता है।
सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज (सीएमएस) और एमडीआरए ने ट्रांसपोर्ट हब माने जाने वाले 12 शहरों के 1200 ट्रक ड्राइवर्स को अध्ययन में शामिल किया गया है। लुधियाना, दिल्ली, अहमदाबाद, इंदौर, मुंबई, कोलकाता, विजयवाड़ा, बंगलुरू और चेन्नई भी इसमें शामिल हैं।
पिछले हफ्ते सीएमएस के एक कार्यक्रम में दो दर्जन से अधिक ट्रक ड्राइवर्स उपस्थित हुए और उन्होंने सड़क पर अपने अनुभव साझा किए। सीएमएस के निदेशक आलोक श्रीवास्तव ने कहा कि स्थिति में कोई सुधार नहीं है।

उन्होंने जब ड्राइवर्स को दिए जाने वाले अवैध टोकन, पास और स्टीकर्स का जिक्र किया तो ड्राइवर्स ने बताया कि यह केवल एक महीने के लिए वैध होता है और बिना जांच के जाया जा सकता है।

श्रीवास्तव ने बताया कि कई मामलों में सरकारी अधिकारी असली और फर्जी रसीद में अंतर करने के लिए उन पर होलोग्राम्स लगाते हैं और 'अप्रैल फूल, मे डे और इंडिपेंडेंस डे' जैसे कोड वर्ड का इस्तेमाल करते हैं।

पुलिस से परेशान ड्राइवर
ड्राइवर्स, फ्लीट ऑपरेटर्स और कानूनी एजेंसियों से बातचीत में सामने आया की किस तरह ट्रक और भारी कमर्शियल वाहन एनफोर्समेंट एजेंसियों के लिए कमाई का जरिया बन गए हैं।

ड्राइवर्स ने दावा कि 12 प्रतिशत मामलों में ओवरलोडिंग न होने पर भी चालान किया जाता है। 77 प्रतिशत ड्राइवर्स का कहना है कि पुलिस उन्हें सड़क पर सबसे ज्यादा परेशान करती है और 73 प्रतिशत का मानना है कि ट्रैफिक पुलिस उनका उत्पीड़न करती है।

नियम तोड़कर दी रिश्वत
ड्राइवरों और ट्रक ऑपरेटर्स ने माना कि उन्होंने नियमों का पालन न करने और जल्दी काम करने के लिए रिश्वत दी है। उन्होंने स्वीकार किया कि ट्रांसपोर्ट विभाग में रजिस्ट्रेशन और फिटनेस सर्टिफिकेट पाने के लिए वे रिश्वत देते हैं।

सड़क पर वे वैध और पूर्ण दस्तावेज न होने, ओवरलोडिंग और तेज गाड़ी चलाने पर रिश्वत देते हैं। उन्होंने बताया कि सामान के फिजिकल वेरिफिकेशन में आने वाली परेशानियों से भी बचने के लिए भी रिश्वत दी है।

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