मोदी के करिश्मे पर अभी कायम है भरोसा
महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव के नतीजों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करिश्मे पर लोकसभा चुनाव के बाद एक बार फिर से मुहर लगा दी है।
ब्रांड मोदी में भरोसा कायम रखते हुए मतदाताओं ने जहां भाजपा को हरियाणा में स्पष्ट बहुमत दिया है, वहीं महाराष्ट्र में पार्टी को बहुमत के करीब पहुंचा दिया है। दोनों ही राज्यों में भाजपा की सरकार बननी तय है।
इसके साथ ही मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की जोड़ी ने लोकसभा चुनाव के बाद की पहली अग्नि परीक्षा पास कर ली है। चुनाव में सत्ताधारी कांग्रेस हरियाणा और महाराष्ट्र में तीसरे पायदान पर खिसक गई है।
हरियाणा में जहां इनेलो दूसरे बड़े दल की रूप में उभरी है, वहीं महाराष्ट्र में भाजपा की सहयोगी रही शिवसेना दूसरे स्थान पर रही है। कांग्रेस ने जहां हार को स्वीकार कर भाजपा को जीत की बधाई दी है, वहीं भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने लोकसभा में मोदी लहर को विधानसभा चुनाव में सुनामी बन जाने का दावा किया है।
संघ नही चाहता ऐसे सरकार बनाए भाजपा
मोदी को देश का निर्विवाद नेता करार देते हुए शाह ने कहा है कि इस नतीजे के बाद पार्टी देश को कांग्रेस मुक्त करने के अभियान में दो कदम और आगे बढ़ी है। इस बीच राकांपा ने महाराष्ट्र में भाजपा को बिना शर्त समर्थन की पेशकश की है।
हालांकि भाजपा-शिवसेना की ढाई दशक पुरानी दोस्ती को फिर से बहाल करने के लिए अंदरखाने दोनों ही ओर से प्रयास हो रहे हैं। शिवसेना प्रमुख उद्घव ठाकरे ने भाजपा मुख्यालय में संसदीय बोर्ड की बैठक के बीच ही मोदी और शाह से बातचीत कर इस आशय की पहल की है।
संघ भी नहीं चाहता कि भाजपा महाराष्ट्र में राकांपा के समर्थन से सरकार बनाए। हरियाणा में कभी चौथे नंबर की पार्टी रही भाजपा अपने दम पर मोदी के करिश्मे से बहुमत का जादुई आंकड़ा छूने में कामयाब हो गई है। इस राज्य में पार्टी की सीटों में करीब 1200 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
12 गुना सीटे मिली हरियाणा में
90 सीटों वाली हरियाणा विधानसभा में पार्टी को 47 सीटें हासिल हुई हैं, जो बहुमत से एक ज्यादा है। इससे पहले भाजपा इस राज्य में अधिकतम 26 सीटों पर लड़ी थी और उसे सर्वाधिक 16 सीट हासिल हुई थी।
बीते विधानसभा चुनाव में अपने दम पर उतरी पार्टी को महज 4 सीटें हासिल हुई थी। उल्लेखनीय है कि दोनों ही राज्यों में पार्टी केपास कोई दमदार चेहरा नहीं था और पार्टी को ठीक विधानसभा चुनाव के समय शिवसेना और हजकां से अलग होने का फैसला करना पड़ा था।
महाराष्ट्र के मतदाताओं ने हालांकि भाजपा को बहुमत तो नहीं दिया, मगर सरकार बनाने का रास्ता साफ कर दिया। पार्टी को 288 सदस्यीय विधानसभा में 123 सीटें हासिल हुई। गौरतलब है कि बीते ढाई दशक से शिवसेना के साथ चुनाव लड़ने वाली भाजपा कभी 60 सीटों का आंकड़ा पार नहीं कर पाई थी।
मगर मोदी की ताबड़तोड़ रैलियों ने न केवल पार्टी के वोटों में सौ फीसदी की बढ़ोत्तरी की, बल्कि सीटों की संख्या में भी करीब 300 फीसदी की बढ़ोत्तरी करा दी। राज्य में शिवसेना 63 सीटों केसाथ दूसरे, 42 सीटों केसाथ कांग्रेस तीसरे और 41 सीटों केसाथ राकांपा चौथे नंबर पर रही।