भाजपा ने हाशिए पर फेंक दिए ब्राह्मण नेता!
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लोकसभा चुनाव में खास तौर पर भाजपा में ब्राह्मण नेताओं की तो जैसे शामत ही आ गई है। टिकट वितरण में इस बिरादरी के कई नेता खेत रहे हैं तो बचे-खुचे नेता सीट बदलने के कारण मुसीबत का सामना कर रहे हैं।
समस्या यह है कि इनकी चीख पुकार का भी पार्टी नेतृत्व पर कोई असर पड़ता नहीं दिख रहा। दिग्गज लालमुनि चौबे, लालजी टंडन, हरिन पाठक, लक्ष्मी नारायण पांडे, कैलाश जोशी का तो टिकट नहीं मिलने के कारण करियर ही खतरे में है तो सीट बदलने के कारण मुरली मनोहर जोशी, कलराज मिश्र और अश्विनी चौबे जैसे नेता अलग असहज महसूस कर रहे हैं।
करुणा शुक्ला पहले ही पार्टी बदलने पर मजबूर हो गई। विरोधी खेमा ब्राह्मणों की अनदेखी को मोदी की साजिश मानने से परहेज नहीं कर रहे। इनका कहना है कि मोदी के आगमन के साथ ही इस बिरादरी के नेताओं पर चुन-चुन कर गाज गिराई गई। अगर नहीं तो इसी बिरादरी की पार्टी में इकलौती बचीं बड़ी नेता सुषमा स्वराज से भी उनके अनबन की वजह क्या है।
खर्राटे ने बढ़ाई जयराम की मुश्किल
एक अदद खर्राटे ने कांग्रेस के तेजतर्रार नेता जयराम रमेश की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मुश्किल इसलिए बड़ी है कि उनसे कोई और नहीं खुद पार्टी की मुखिया सोनिया गांधी नाराज हो गई हैं।
दरअसल हुआ यह कि बीते शनिवार को देर रात अचानक पार्टी के वार रूम का निरीक्षण करने पहुंचीं सोनिया उस समय हैरान रह गईं जब उन्होंने वहां कार्यरत कर्मचारियों को काम करने के बदले जमकर खर्राटे भरते देखा। कोई कुर्सी पर औंधा लेटा था तो कोई टेबल पर पांव रख खर्राटे भर रहा था। अब चूंकि जयराम वार रूम के मुखिया हैं तो उनकी शामत आनी ही थी।
सोनिया ने उसी दौरान उन्हें फोन पर जमकर खरी खोटी सुनाई। इस हादसे से अभी जयराम संभले भी नहीं थे कि घोषणापत्र जारी होने की तारीख भी मीडिया में लीक हो गई। इस मामले में भी सोनिया उनसे भन्नाई हुई हैं।
खुद उलझे रणनीतिकार
भाजपा के सबसे बड़े़ रणनीतिकार माने जाने वाले अरुण जेटली खासे परेशान हैं। कारण अपनी रणनीति से हमेशा दूसरों को घेरने वाले जेटली लोकसभा चुनाव में खुद घिर गए हैं। अमृतसर की जिस लोकसभा सीट को थाली में रखा कौर समझा था, वही कौर भारी पड़ता दिख रहा है।
उन्हें उम्मीद थी कि शिअद मुखिया से बेहतर रिश्ते से वह यह सीट चुटकी बजाते ही निकाल लेंगे। मगर कांग्रेस की ओर से कैप्टन अमरिंदर सिंह के खम ठोकने की घटना ने उनका जायका बिगाड़ कर रख दिया है।
बड़बोले और व्यंग्य बाण चलाने में माहिर कैप्टन ने अमृतसर में डेरा डाल दिया है। इस कारण जेटली को न चाहते हुए भी इस सीट के लिए अभी से दिन रात एक करना पड़ रहा है। अब चाहे सीट का परिणाम जो भी हो, मगर जेटली के सामने मुश्किल है कि वह मोदी के लिए रणनीति बनाएं या अमृतसर में अपनी सीट जीतें।
मीठी बनी जहरीली चाय
पार्टी बदलते ही नेताओं का जायका भी बदल जाता है। विश्वास न हो तो कल तक जदयू के मुस्लिम चेहरा रहे साबिर अली से पूछिए। कभी मोदी की चाय उन्हें जहरीली लगती थी तो नीतियां देश तोड़ने वाली।
मोदी पर ऐसा हमला करते थे मानो गुजरात दंगों का सर्वाधिक दंश खुद उन्होंने ही झेला हो। मगर अब जैसे ही पाला बदला तो जहरीली चाय अचानक ही मीठी हो गई।
देश तोड़ने वाली नीतियां एकाएक देश बचाने वाली नीतियों में तब्दील हो गई। शायद किसी ने सही कहा है दिल बदलते ही जज्बात बदल जाते हैं।