{"_id":"2163667c-143c-11e2-abb2-d4ae52bc57c2","slug":"bpl-women-will-become-anganbadi-wokers","type":"story","status":"publish","title_hn":"बीपीएल महिला ही अब बन सकेगी आंगनबाड़ी कार्यकत्री","category":{"title":"India News Archives","title_hn":"इंडिया न्यूज़ आर्काइव","slug":"india-news-archives"}}
बीपीएल महिला ही अब बन सकेगी आंगनबाड़ी कार्यकत्री
लखनऊ/ब्यूरो
Updated Fri, 12 Oct 2012 12:42 PM IST
विज्ञापन
आंगनबाड़ी में कार्यकत्री और सहायिका अब संपन्न वर्ग की महिलाएं नहीं बन पाएंगी। इन दोनों पदों के लिए अब केवल गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) जीवनयापन करने वाले परिवारों की महिलाएं ही पात्र होंगी। यही नहीं, भर्ती प्रक्रिया में बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) की मनमानी पर भी नकेल लगा दी गई है। चयन समिति का अध्यक्ष जिलाधिकारी द्वारा नामित मुख्य विकास अधिकारी या अपर जिलाधिकारी स्तर का अधिकारी होगा। अभी तक चयन समिति का अध्यक्ष सीडीपीओ होता था। समिति में अब उसकी हैसियत केवल सदस्य की होगी।
विज्ञापन
विशेष सचिव महिला एवं बाल विकास मिश्रीलाल पासवान ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि इस संबंध में जिलाधिकारियों को निर्देश भेज दिया गया है। उत्तर प्रदेश में 6 माह से 6 वर्ष तक के बच्चों के लिए आंगनबाड़ी केंद्र संचालित किए जाते हैं। इसकी देखरेख के लिए कार्यकत्री 3200 और सहायिका 1600 रुपये मानदेय पर रखी जाती हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग ने इनकी भर्ती का अधिकारी सीडीपीओ को दे रखा था और इनकी भर्ती में बीपीएल होने की अनिवार्यता भी नहीं थी। इसलिए अधिकतर जिलों में संपन्न वर्ग की महिलाओं को सहायिका के पदों पर रखे जाने से आए दिन गड़बड़ी की शिकायतें मिलती रहती थीं। इसलिए राज्य सरकार ने पूर्व में दी गई व्यवस्था को समाप्त करते हुए नई व्यवस्था लागू कर दी है।
विज्ञापन
नई व्यवस्था के मुताबिक बीपीएल परिवार की महिलाएं ही अब सहायिका और कार्यकत्रियां बन सकेंगी। बीपीएल सूची में शामिल महिलाओं के लिए आय प्रमाण पत्र लगाने से छूट होगा और जिनका नाम सूची में नहीं होगा, उन्हें आय प्रमाण पत्र लगाना होगा। शहरी क्षेत्र में 25,546 तथा ग्रामीण क्षेत्र में 19,884 रुपए का आय प्रमाण पत्र होना चाहिए। इन दोनों पदों पर 21 से 45 वर्ष की महिलाओं का चयन किया जाएगा और 62 वर्ष की उम्र पर स्वत: मानदेय बंद कर दिया जाएगा। भर्ती में पहली प्राथमिकता विधवा महिला को दी जाएगी। इसके बाद तलाकशुदा व परित्यक्ता को दी जाएगी।
विज्ञापन
एक श्रेणी में एक से अधिक पात्र अभ्यर्थियों के होने पर मेरिट लिस्ट बनाई जाएगी। एक आंगनबाड़ी केंद्र पर एक ही परिवार की दो महिलाओं की अब नियुक्ति नहीं की जाएंगी। चयन समिति में जिला कार्यक्रम अधिकारी सदस्य सचिव होगा। इसमें एससी, एसटी, पिछड़ी जाति व अल्पसंख्यक समुदाय का एक-एक अधिकारी व सीडीपीओ सदस्य होगा।