चीन के कम्युनिस्ट आंदोलन में भी शरीक हुए थे नेताजी
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नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने अपनी रहस्यमय गुमशुदगी के बाद आजाद हिंद फौज के जरिये चीन के कम्यूनिस्ट आंदोलन में भी हिस्सा लिया था और आंदोलन को खुला समर्थन दिया था।
पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा खोली गई नेताजी से जुड़ी फाइलों में खुफिया रिपोर्ट के आधार पर यह दावा किया गया है। इनमें कहा गया है कि ताइवान में हुई विमान दुर्घटना के बाद अपनी रहस्यमय गुमशुदगी के दौरान वर्ष 1949 में नेताजी ने चीन में शरण ले रखी थी और उसी दौरान उन्होंने वहां कम्यूनिस्ट आंदोलन में भी सक्रिय हिस्सा लिया था। यह रिपोर्ट नेताजी के बड़े भाई शरत चंद्र के दावों पर आधारित है।
गुमशुदगी के बाद 1949 में चीन पहुंच गए थे सुभाष
नेताजी के बड़े भाई शरत चंद्र बोस के यूरोप से लौटने के बाद 26 जनवरी, 1949 को लिखे एक नोट में खुफिया एजेसियों की ओर से यह दावा किया गया है। शरत ने यूरोप के अपने दौरे के दौरान कई लोगों के साथ मुलाकात की थी।
वहां से लौटने के तुरंत बाद उन्होंने फॉरवर्ड ब्लॉक और सोशलिस्ट रिपब्लिकन पार्टी के नेताओं के साथ भी गोपनीय बैठकें की थी। पहले फॉरवर्ड ब्लॉक का नेतृत्व करने वाले शरत ने बंगाल और भारत में एक समाजवादी व्यवस्था की वकालत करते हुए सोशलिस्ट रिपब्लिकन पार्टी का गठन किया था।
इन बैठकों में उन्होंने बताया था कि अपने यूरोप दौरे के दौरान उनको विभिन्न स्रोतों से पता चला है कि नेताजी ने चीनी मुक्ति आंदोलन में हिस्सा लिया है।
शरत ने कहा था कि उनकी राय में नेताजी जीवित हैं और अब भी चीन में ही रह रहे हैं। उस समय चीन में सत्तारूढ़ ताकतों और कम्युनिस्ट पार्टी के बीच गृह युद्ध जैसे हालात थे।
वर्ष 1949 में माओत्से तुंग की ओर से पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के गठन के ऐलान के बाद ही युद्ध खत्म हुआ। गोपनीय फाइलों में से एक में खुफिया एजेसियों ने शरत चंद्र के हवाले से लिखा है कि कम्यूनिस्ट पार्टी की जीत में नेताजी की भी अहम भूमिका रही है।