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बड़ा फैसला: शादी के बाद भी बेटियां परिवार का हिस्सा

Thu, 21 Aug 2014 08:07 AM IST
Updated Thu, 21 Aug 2014 08:07 AM IST
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bombay high court said Daughters part of the family after marriage.

बांबे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार के उस प्रस्ताव को रद्द कर दिया है, जिसके तहत रिटेल केरोसिन लाइसेंस करने के लिए शादीशुदा बेटी को परिवार का हिस्सा नहीं मानता था। कोर्ट ने इस प्रस्ताव को संविधान का उल्लंघन बताया है और कहा कि बेटियां शादी के बाद भी परिवार का हिस्सा होती हैं।

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जस्टिस अभय ओका और एएस चांडूरकर की पीठ ने यह फैसला सुनाया। महाराष्ट्र सरकार ने 20 फरवरी, 2004 को यह सरकारी प्रस्ताव (जीआर) पारित किया था। इसके तहत रिटेल केरोसिन लाइसेंस हासिल करने के लिए शादीशुदा बेटी को परिवार का हिस्सा नहीं माना गया था।
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रिटेल केरोसिन लाइसेंस धारक शादीशुदा बेटी रंजना अनेराव ने इस प्रस्ताव को अदालत में चुनौती दी थी। उनका कहना है कि वह भी परिवार का हिस्सा है और इसलिए उसकी मां के निधन के बाद उनकी जगह उसे लाइसेंस मिलना चाहिए।
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अनुकंपा के आधार पर नौकरी का हक

bombay high court said Daughters part of the family after marriage.

हालांकि उसके भाई ने अपनी बहन के दावे को चुनौती दी थी और कहा था कि उसकी शादी हो चुकी है और जीआर में ‘परिवार’ में शादीशुदा बेटी को शामिल नहीं किया गया है।

रंजना ने 26 फरवरी, 2013 को एक अन्य सरकारी प्रस्ताव का हवाला दिया, जो शादीशुदा बेटी को अनुकंपा के आधार पर नौकरी का हक देता है। हालांकि इसके लिए बेटी और उसके पति को परिवार की देखभाल करने का शपथपत्र देना होता है।

उसने 19 मई, 2014 के एक अन्य जीआर का हवाला भी दिया, जो स्वतंत्रता सेनानी की शादीशुदा बेटी को स्वतंत्रता सेनानी को मिलने वाली सुविधाएं देने का अधिकार देता है। इन्हीं के आधार पर जजों ने शादीशुदा बेटी के हक में फैसला सुनाया।

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