चुनावी दंगल में जमीन पर उतरे 'सितारे'
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अप्रैल का महीना शुरू हो चुका है। भले ही देश में गर्मी ने अपना पूरा जोर दिखाना शुरू ना किया हो लेकिन चुनावी गर्मी अपने पूरे शबाब पर है। और अब बॉलीवुड भी इससे अछूता नहीं है।
कभी राजनीति से दूर भागने वाला मनोरंजन जगत अब इससे हाथ मिलाने को तैयार है। कई कलाकार सोशल मीडिया पर चुनावी माहौल पर चर्चा कर रहे हैं तो कुछ ने सीधे इस चुनावी अखाडे में कूदने का फैसला कर लिया है।
एक नजर ऐसी ही कुछ अभिनेताओं पर जिन्होंने नेता बनने की ठान ली है।
किरण खेर
किरण खेर हिंदी फिल्मों में चरित्र भूमिकाएं और कॉमेडी रोल करने के लिए मशहूर हैं। उन्हें बेहतरीन अभिनय के लिए दो बार राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिल चुका है।
किरण खेर ने भारतीय जनता पार्टी से साल 2009 में अपना नाता जोड़ा और पार्टी के समर्थन में प्रचार करना शुरू कर दिया।
राजनीति से जुडने की वजह बताते हुए उन्होंने बीबीसी से कहा, "मुझे राजनीतिक माध्यम पसंद है क्योंकि ये मुझे मौका देता है अपने आप को अभिव्यक्त करने के लिए। मैंने 15 साल तक टीवी पर लोक सभा की बहस देखी है।"
हालांकि बीबीसी से कुछ दिनों पहले हुई इस मुलाकात में किरण ने साफ कहा था कि उन्हें चुनाव लड़ने में कोई दिलचस्पी नहीं है। लेकिन अब वो बडी शान से भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चंडीगढ से ना सिर्फ चुनाव लड रही हैं बल्कि जोर-शोर से प्रचार भी कर रही हैं।
बप्पी लाहिडी
70 और 80 के दशक के जाने-माने संगीतकार बप्पी लाहिडी भी बडे उत्साह से राजनीति के समंदर में डुबकी लगाने के लिए तैयार हैं।
बप्पी, भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर पश्चिम बंगाल के श्रीरामपुर से लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं।
वो कहते हैं, "चुनावी अखाड़े में मैं तो बहुत देरी से आया। मुझसे पहले अमिताभ बच्चन जी, विनोद खन्ना, शत्रुघ्न सिन्हा, हेमा मालिनी जी राजनीति में किस्मत आजमा चुके हैं। हम फ़िल्म तो करते ही रहेंगे, पर देश की सेवा करनी भी जरूरी है। राजनीति तब तक बुरी नहीं है जब तक आपने कोई घपला नहीं किया हो और हम फ़िल्म स्टार्स की काफी फेस वैल्यू होती है।"
राखी सावंत
राखी सावंत ने टीवी पर कई साल धमाका करने के बाद अब राजनीति का रुख किया।
वो भारतीय जनता पार्टी के नेता राजनाथ सिंह से भी मिली और मुस्कुराकर फोटो खिंचाए। चुनाव लडने में दिलचस्पी भी साफ जाहिर की। नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की और अरविंद केजरीवाल के खिलाफ तीखी बयानबाजी की।
लेकिन बात नहीं बनी। भारतीय जनता पार्टी से जब उन्हें टिकट नहीं मिला तो अपनी ही एक पार्टी बना डाली जिसका नाम दिया राष्ट्रीय आम पार्टी और चुनावी मैदान में कूदने का ऐलान कर डाला।
वो उत्तर-पश्चिम मुंबई से लोकसभा चुनाव लड रही हैं।
राखी दावा करती हैं कि वो इस इलाके के लिए बरसों से काम करते आ रही हैं और उन्हें वहां की जनता का भरपूर समर्थन है।
राजनीति में उतरने के बाद राखी ने ऐलान कर दिया है कि वो फिल्मों में आइटम सॉन्ग कतई नहीं करेंगीं।
बाबुल सुप्रियो
फिल्म 'कहो ना प्यार है' से अपने गायन करियर का सुपरहिट आगाज करने वाले बाबुल सुप्रियो पश्चिम बंगाल के आसनसोल से भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं।
बाबुल का मानना है, "संगीत और राजनीति दोनों समान हैं। संगीत लोगों के दिलों को सुकून पहुंचाता है और राजनीति में आकर हम लोगों की तकलीफें दूर कर सकते हैं।"
बॉलीवुड में गायन के सवाल पर बाबुल कहते हैं, "मीका और हनी सिंह जैसे गायकों के आ जाने से और रॉयल्टी के विवाद की वजह से अब गायकों का काम बहुत कम मिल रहा है। इसलिए वो अब दूसरी जगह अपना हाथ आज़मा रहे हैं लेकिन मेरे राजनीतिक सफर को पेशे का नाम ना दें क्योंकि राजनीति मेरी रोजी रोटी नहीं है।"
उन्होंने ये भी कहा कि जो वादे वो लोगों से कर रहे है अगर उन्हें पूरा करने नहीं दिया गया तो वो राजनीति छोड़ देंगे।
मुन मुन सेन
गुज़रे ज़माने की मशहूर अभिनेत्री सुचित्रा सेन की बेटी अभिनेत्री मुन मुन सेन ने मार्च में तृणमूल कांग्रेस से अपना नाता जोड़ा और लोक सभा चुनाव में वो पश्चिम बंगाल के बांकुरा से चुनाव लड़ेंगी।
इसके अलावा गुल पनाग, परेश रावल, महेश मांजरेकर, रवि किशन और जावेद जाफरी जैसे सितारे भी चुनावी समर में कूद पडे हैं। हेमा मालिनी तो पहले से ही राजनीति के मैदान में सक्रिय है।
वैसे बॉलीवुड सितारों को राजनीति रास ही आ जाए ऐसा भी नहीं है।
इससे पहले अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र जैसे बडे सितारों ने राजनीति में पैर जमाने की कोशिश की और चुनाव में भी विजय पाई लेकिन वो स्थापित राजनेता नहीं बन पाए और जल्द ही राजनीति को अलविदा कह दिया।
इतिहास देखें तो ऐसे कई सितारे हैं जिन्हें राजनीति रास नहीं आई और हमेशा के लिए उन्होंने राजनीति को अलविदा कह दिया।