{"_id":"93eeefef88949c9d681ff658348da6de","slug":"bodies-of-two-naval-personnel-on-board-ill-fated-submarine-sindhurakshak-found","type":"story","status":"publish","title_hn":"सिंधुरक्षक में 5 शव मिले, बाकी के बचने की उम्मीद कम","category":{"title":"India News Archives","title_hn":"इंडिया न्यूज़ आर्काइव","slug":"india-news-archives"}}
सिंधुरक्षक में 5 शव मिले, बाकी के बचने की उम्मीद कम
मुंबई/ब्यूरो
Updated Fri, 07 Mar 2014 04:59 PM IST
विज्ञापन
आईएनएस सिंधुरक्षक पनडुब्बी हादसे में लापता नौसैनिकों को बचाने की उम्मीद को शुक्रवार को झटका लगा है। शुक्रवार को तलाशी अभियान में जुटे गोताखोरों को पांच नौसैनिकों के शव मिले।
विज्ञापन
इसके बाद नौसेना ने स्वीकार किया कि बाकी 13 लापता सैनिकों के बचने की उम्मीद बेहद कम है। 14 अगस्त की रात 12 से 12.10 के बीच सामरिक रूप से महत्वपूर्ण इस पनडुब्बी में दो से तीन जोरदार धमाके हुए और आग लग गई थी।
विज्ञापन
नौसेना अधिकारियों के अनुसार पनडुब्बी में घुसने में काफी दिक्कतें आ रही हैं। गोताखोरों को दुर्घटना के 36 घंटे बाद पनडुब्बी में घुसने में कामयाबी मिल सकी। पनडुब्बी में पानी घुस जाने की वजह से बचाव अभियान में दिक्कतें आ रही हैं।
विज्ञापन
जंगी बेड़े के अंदर का खौलता पानी गोताखोरों को अंदर आने से रोक रहा है। दरवाजों के जाम हो जाने की वजह से भी अंदर घुसना मुश्किल हो रहा है। गोताखोरों को खराब रोशनी का सामना कर पड़ रहा है। तेल और कीचड़ घुसने से गोताखोरों को रास्ता नहीं दिख रहा है।
विस्फोट की वजह से इसके उपकरण बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं और उनसे होकर कंपार्टमेंट में घुसना मुश्किल हो रहा है। पनडुब्बी अरब सागर में कुछ मीटर नीचे तक डूबी हुई है और उसके भीतर से पानी निकालने के लिए पंप लगाए गए हैं। जिससे गोताखारों को आगे बढ़ने में आसानी हो। फिलहाल स्थितियां इतनी विपरीत हैं कि पनडुब्बी में जाकर एक बार में एक गोताखोर ही काम कर पा रहा है।
शुक्रवार की सुबह गोताखोर सिंधुरक्षक के दूसरे चेंबर (कक्ष) तक पहुंच सके, जहां उन्हें पहले तीन शव मिले और दोपहर के बाद 2 नौ सैनिकों के शव मिले। ये सभी शव इतनी खराब हालत में हैं कि इन्हें पहचाना तक नहीं जा सकता है। ये बुरी तरह जले हुए हैं।
शवों को नौसेना के अस्पताल आईएनएचएस अश्विनी भेजा गया है, जहां डीएनए टेस्ट करके इनकी पहचान की जाएगी। बृहस्पतिवार को नौसेना ने पनडुब्बी में मौजूद सभी 18 लोगों की सूची जारी कर दी थी। सभी के परिजनों को मुंबई बुला लिया गया है।
वैसे अभी तक चार शव गोताखोरों को जिस हाल में मिले हैं, उससे नौसेना अधिकारियों को बाकी लोगों के बचने की उम्मीद नहीं है। इसके बावजूद नौसेना का पूरा प्रयास पनडुब्बी के हर कोने को खंगालने का है, ताकि सभी शवों को बाहर लाया जा सके।
अभी नौसेना पनडुब्बी को बचाने की कोई कोशिश नहीं कर रही है।
क्यों हो रही तलाश में देर
-विस्फोट के कारण पनडुब्बी के सारे दरवाजे जाम
-सीढ़ियां भी पूरी तरह टूट-फूट चुकी हैं
-पनडुब्बी के भीतर और आसपास कीचड़ और तेल
-गोताखोरों को इस वजह से कुछ दिख नहीं रहा
-हाई पावर अंडरवाटर लैंप में भी एक फीट से ज्यादा देखना मुश्किल
कुछ शव हो चुके हैं राख?
गोताखोरों ने पनडुब्बी की विस्फोट वाली जगह के विपरीत यानी पीछे से प्रवेश किया है। इन हिस्सों में मिले शवों की हालत देखने के बाद नौसेना अधिकारी आशंका व्यक्त कर रहे हैं कि हो सकता है कुछ शव अंदर ही राख हो चुके हों।
नौसेना द्वारा जारी जानकारी के अनुसार पनडुब्बी के कंट्रोल रूम एरिया को जबर्दस्त क्षति पहुंची है। विस्फोट से निकली आग और तापमान इतना अधिक था कि इस्पात की मोटी चादरें तक पिघल चुकी हैं। ऐसे में संभव है कि कुछ शव इस आग में राख हो चुके हों।
जो थे पनडुब्बी पर
अधिकारी: निखिल पाल, आलोक कुमार, आर वेंकटराज
नौसैनिक: संजीव कुमार, केसी उपाध्याय, टिमोथी सिन्हा, केवल सिंह, सुनील कुमार, दसारी प्रसाद, लीजू लॉरेंस, राजेश टूटिका, अमित के सिंह, अतुल शर्मा, विकास ई, नरोत्तम देयूरी, मलय हलधर, विष्णु वी, सीताराम बड़ापल्ली
मिसाइलों का खतरा
सूत्रों के अनुसार माना जा रहा है कि पनडुब्बी में मौजूद दो मिसाइलों के चलने से ये हादसा हुआ है। अब बचाव कार्य के दौरान गोताखोर इस बात के प्रति सावधानी बरत रहे हैं कि किसी चेंबर में मौजूद अन्य मिसाइलें न चल जाएं। यही कारण है कि खतरे की आशंका को भांपते हुए मुंबई डॉकायार्ड पर खड़े अन्य जहाजों को कुछ किलोमीटर दूर भेज दिया गया है।