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म्यांमार हिंसा से जुड़े हैं महाबोधि धमाके के तार
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Sun, 07 Jul 2013 08:00 PM IST
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बिहार के बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर में रविवार तड़के हुए सीरियल ब्लास्ट की घटना के तार म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ हिंसा से जुड़ते दिख रहे हैं।
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गृह मंत्रालय का मानना है कि इस हिंसा का बदला लेने के लिए आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) ने इन धमाकों को अंजाम दिया।
इसके लिए खतरनाक आतंकी संगठन अलकायदा ने अपने सहयोगी आतंकी संगठन जमात अल तवाहिद वल जिहाद के जरिए आईएम की मदद की।
महाबोधि मंदिर पर आतंकी हमला, 8 सीरियल धमाके
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बौद्ध मंदिरों और तिब्बत से जुड़े इलाकों में आतंकी कार्रवाई की खुफिया सूचना के मद्देनजर गृह मंत्रालय ने इस घटना के बाद सभी राज्यों को एडवाइजरी जारी कर ऐसी जगहों की सुरक्षा बढ़ाने का निर्देश दिया है।
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महाबोधि मंदिर पर हमले की आशंका पहले से थी। इस संबंध में गृह मंत्रालय के साथ-साथ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए), आईबी के साथ-साथ दिल्ली पुलिस ने भी बिहार सरकार को अलर्ट भेजा था। इसके बावजूद घटी आतंकी घटना से नाराज गृह मंत्रालय ने बिहार सरकार से जवाब तलब किया है।
महाबोधि ब्लास्टः अलर्ट के बावजूद क्यों हुई चूक?
गृह मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक बीते साल अक्टूबर महीने में पुणे धमाकों से जुड़े आईएम के आतंकी सैयद मकबूल से पूछताछ में बौद्ध स्थलों पर हमले की साजिश का पता चला था।
एनआईए की पूछताछ में मकबूल ने महाबोधि मंदिर की रेकी करने की बात कबूल की थी। उसने बताया था कि आईएम का बीज बोने वाले भटकल भाइयों इकबाल भटकल और यासीन भटकल ने म्यांमार में बौद्ध भिक्षुओं द्वारा रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ की गई हिंसा का बदला लेने की तैयारी कर ली है।
तस्वीरों में देखें: धमाकों से थर्रा उठा महाबोधि मंदिर
इनकी योजना बौद्ध स्थलों पर आत्मघाती हमला कराने की है। इसके अलावा आईबी और दिल्ली पुलिस की आईएम के कुछ अन्य गिरफ्तार आतंकवादियों से पूछताछ में भी इस साजिश का खुलासा हुआ था।
मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि तीनों एजेंसियों के अलावा खुद गृह मंत्रालय ने महाबोधि मंदिर पर हमले के प्रति बिहार सरकार को सचेत किया था। आईबी ने तो बीते हफ्ते ही अलर्ट भेजा था। इसके मद्देनजर मंदिर के मुख्य पुजारी ने बिहार सरकार से हथियार की भी मांग की थी।
गृह मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि महाबोधि मंदिर में सुबह की पूजा अर्चना काफी महत्वपूर्ण होती है। खासतौर पर रविवार को इसी समय विशेष तरह की परिक्रमा होती है।
इस दौरान विदेशों से आने वाले बौद्ध भिक्षु खासतौर पर परिक्रमा में हिस्सा लेते हैं, इसलिए धमाके का समय बहुत सोच समझ कर सुबह का ही तय किया गया।
हालांकि बम रखने वाले सही जगह की पहचान नहीं कर पाए और सभी बम कम मारक क्षमता वाले थे, इसलिए नौ धमाकों के बावजूद महज कुछ ही लोग घायल हुए।
महाबोधि मंदिर पर हमला: किसने क्या कहा
उल्लेखनीय है कि बीते कुछ सालों से बिहार के दो जिले दरभंगा और मधुबनी आईएम का गढ़ बनते जा रहे हैं। इन्हीं दो जिलों से कई आतंकी घटनाओं से जुड़े लोगों की गिरफ्तारियों के बाद इस बात का खुलासा हुआ था।
मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि इस धमाके के बाद जांच एवं खुफिया एजेंसियों की खास निगाह इन दो जिलों पर है।