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धमाके में घायल तो नहीं हुआ महाबोधि वृक्ष?

Tue, 09 Jul 2013 08:21 AM IST
देहरादून/प्रवेश कुमारी
देहरादून/प्रवेश कुमारी Updated Tue, 09 Jul 2013 08:21 AM IST
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bodh gaya mahabodhi temple serial blasts may harm mahabodhi tree

आतंकी हमला झेल चुके बौद्धों की आस्था के केंद्र महाबोधि मंदिर पर अब देहरादून स्थित वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) की भी नजर है। टीम जल्द ही मंदिर परिसर का निरीक्षण करने के लिए बोधगया जाएगी।

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दरअसल, संस्थान की पैथोलॉजी डिवीजन की टीम पर मंदिर परिसर में स्थित महाबोधि वृक्ष के संरक्षण की जिम्मेदारी है। धमाकों में मंदिर समेत महाबोधि वृक्ष को कोई नुकसान न पहुंचने की बात बेशक सामने आ रही है, लेकिन निरीक्षण के बाद ही वस्तु स्थिति सामने आ सकेगी।
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पढ़ें, महाबोधि मंदिर पर आतंकी हमला, 9 सीरियल धमाके
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संस्थान की पैथोलॉजी डिवीजन के डॉ. एनएसके हर्ष ने बताया कि हमले के बाद उनकी श्री बोध गया मंदिर समिति के सचिव एन दोरजी से बात हुई है।

एफआरआई वृक्ष समेत मंदिर के संरक्षण के लिए तकनीकी सहायता मुहैया करा रहा है। इस नाते टीम वहां की वस्तुस्थिति का जायजा लेने जल्द रवाना होगी।

तस्वीरों में देखिए, धमाकों से थर्रा उठा महाबोधि मंदिर

हर्ष तकरीबन एक माह पहले ही परिसर का नियमित दौरा कर लौटे हैं। एफआरआई के पास महाबोधि वृक्ष के संरक्षण का जिम्मा वर्ष 2015 तक है।

यूं बना था एफआरआई तकनीकी मददगार
वर्ष 2007 में गया के तत्कालीन डीएम ने महाबोधि वृक्ष की एक टहनी के काटे जाने से जुड़े मामले की जांच के दौरान एफआरआई के विशेषज्ञों को आमंत्रित किया था।

इसी दौरान इस वृक्ष की खराब स्थिति को देखते हुए विशेषज्ञों ने कई सुझाव भी दिए थे, जिस पर बाद में मंदिर समिति और एफआरआई के बीच एमओयू के जरिए काम हुआ।

इस तरह के नुकसान आए थे सामनेः-
- परिसर में सीमेंट की दीवार की वजह से जड़ों को नुकसान।
- हाई इंटेंसिटी लाइट की वजह से श्वसन में दिक्कत।
- आसपास सिंचित क्षेत्र अधिक होने से अत्यधिक नमी।
- भक्तों के दीपक, मोमबत्ती जलाने, धागे, कपड़े बांधने से दिक्कत।

नुकसान से यूं बचाया गया महाबोधि वृक्ष को:-
- जड़ों को हो रहे नुकसान को दूर करने के लिए इसके समीप स्थित सीमेंट की दीवार को हटाया गया।
- श्वसन बेहतर करने के लिए हाई इंटेंसिटी लाइट का प्रकाश सीधे वृक्ष के ऊपर न पड़े, यह व्यवस्था की गई।
- मंदिर के आसपास सिंचित क्षेत्र अधिक होने के कारण मिलने वाली अधिक नमी को नियंत्रित किया गया।
- वृक्ष के समीप दीपक, मोमबत्ती जलाना, वृक्ष के इर्द-गिर्द कपड़ा आदि लपेटना प्रतिबंधित किया गया।

बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था महाबोधि के नीचे
महाबोधि वृक्ष के नीचे भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था। यह काल 566-486 ईसा पूर्व माना जाता है। महाबोधि मंदिर का निर्माण 260 ईसा पूर्व में सम्राट अशोक ने किया था। यह बौद्धों की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है।

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