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ब्लास्ट से सहमा बोधगया, पर्यटन को बड़ा झटका
वाराणसी/हेमंत श्रीवास्तव
Updated Mon, 08 Jul 2013 12:00 AM IST
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बिहार में पर्यटन के बढ़ते बाजार को बोधगया सीरियल ब्लास्ट से जोरदार झटका लगा है। महज एक दशक में ही बोधगया बौद्ध धर्म के अनुयायी देशों के सैलानियों के धार्मिक पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में उभर चुका है।
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यूपी में बुद्ध से जुड़े स्थलों का भ्रमण करने के बाद जो सैलानी पहले बिहार जाने से कतराते थे, वे अब बोधगया जरूर जाते हैं। दशिण पूर्वी एशिया, यूरोप, अमेरिका से आने वाले सैलानी दिनभर सारनाथ भ्रमण करने के बाद शाम को बोधगया रवाना हो जाते हैं।
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तेजी से पर्यटन उद्योग का बड़ा केंद्र बन चुका बोधगया रविवार की सुबह हुए सीरियल ब्लास्ट से हिल गया है। इसका असर न सिर्फ बोधगया बल्कि बौद्ध परिपथ के साथ ही समूचे देश के पर्यटन कारोबार पर पड़ने की आशंका है।
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बोधगया एक दशक पूर्व तक अव्यवस्थित नजर आता था पर अब उसकी तस्वीर बदल चुकी है। अब वहां पहुंचने पर सैलानी दक्षिणी पूर्वी एशिया के प्रमुख शहरों जैसे माहौल का अनुभव करते हैं।
सिर्फ शहर का लुक ही नहीं लोगों का रहन-सहन और भाषा भी बदल गई है। साधारण सा दिखने वाला व्यक्ति भी धड़ल्ले से अंग्रेजी में बात करता है।
महाबोधि मंदिर पर आतंकी हमला, 9 सीरियल धमाके
बोधगया के साथ ही आसपास के पर्यटन स्थल राजगीर, वैशाली, नालंदा का भी विकास बहुत तेजी से हुआ है। मुंगेर का विपश्यना केंद्र हर समय विदेशी सैलानियों से भरा रहता है।
बिहार में पर्यटन के तेजी से फैलते कारोबार का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दिल्ली, बनारस में बौद्धभन परिपथ की मार्केटिंग करने वाली प्रमुख ट्रेवेल्स एजेंसियों ने अपना दूसरा सेंटर बोधगया में खोल दिया है।
इसका कारण है बोधगया का सीधे कई देशों से हवाई सेवा से जुड़ जाना। बोधगया देश के विभिन्न शहरों के साथ ही बैंकाक, थाईलैंड, सिंगापुर और भूटान से सीधी विमान सेवा से जुड़ गया है। बिहार के पर्यटन विकास में वहां के बौद्ध परिपथ खासकर बोधगया का अहम रोल है।
तस्वीरों में देखें: धमाकों से थर्रा उठा महाबोधि मंदिर
पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों के मुताबिक बिहार में बौद्ध परिपथ के साथ ही रामायण सर्किट, जैन सर्किट, गांधी सर्किट, सूफी और सिख सर्किट, रिवर गंगा क्रूज, वाइल्ड लाइफ टूर, सोनपुर फेयर काफी लोकप्रिय हो गया है। अब धमाकों से वहां का पर्यटन कारोबार प्रभावित हो सकता है।
12 फीट ऊंचे कमल पर रखा था बम
महाबोधि मंदिर के पास भगवान बुद्ध की 80 फीट ऊंची प्रतिमा के कमल पर रखा गया बम अगर फट गया होता तो काफी नुकसान होता। इस बम में 8:45 बजे का टाइम सेट था।
यह बम करीब 12 फीट ऊंचे कमल पर रखा मिला। शुरुआती विस्फोट के बाद सुरक्षा बलों ने इसे देख लिया और समय रहते इसे निष्क्रिय कर दिया।
म्यांमार हिंसा से जुड़े हैं महाबोधि धमाके के तार
मंदिर में जिस कमल पर भगवान बुद्ध विराजमान हैं, उसकी ऊंचाई जमीन से लगभग 12 फीट है। इसे रखने में कम से कम दो लोग रहे होंगे। फिलहाल अब यह जांच के बाद सामने आएगा कि आतंकी किस तरह सुरक्षा बलों की आंख में धूल झोंककर बमों के साथ मंदिर परिसर में पहुंच गए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस बम में जो समय दर्ज है, उस समय मूर्ति के आसपास काफी भीड़ हो जाती है। अगर यह समय पर देख न लिया गया होता तो क्षति अधिक होती।
बोधगया में पर्यटन विकास के प्रमुख कारण
राज्य की सड़कों की स्थिति में सुधार।
देश-विदेश से हवाई मार्ग से तेजी से जुड़ाव।
राज्य में कानून व्यवस्था में सुधार।
यूरोप और अमेरिका में तैनात बिहार मूल के लोगों का सहयोग।
बिहार पहुंचने वाले पर्यटक
वर्ष--विदेशी सैलानी--भारतीय सैलानी
2007--1,77,362--1,03,52,887
2011(नवंबर तक)--5,27,737--1,27,05,531
श्रावस्ती बौद्ध विहार में हाई अलर्ट
बोधगया में सीरियल बम ब्लास्ट के बाद जिले के बौद्ध विहार में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। पुलिस ने श्रावस्ती बौद्ध विहार में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है।
जिला प्रशासन के आला अधिकारियों ने पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित जेतवन, कच्चीकुटी, पक्की कुटी के साथ ही डेन महामंकोल, आनंद बोधि, भिक्षु कल्याण समिति आश्रम, म्यामार (वर्मा मंदिर) सहित कई अन्य मठों का दौरा कर सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश दिए।
कोरिया मंदिर के मठाधीश आर्यानंद ने बौद्ध भिक्षुओं, मठाधीशों से संयम बनाए रखने की अपील की है। भिक्षु यूओ बाथा ने कहा कि यह अहिंसा पर हमला है।
जम्मू में सुरक्षा कड़ी
बोधगया में बम धमाकों के बाद जम्मू में भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है और नाके बढ़ा दिए। विशेषकर धार्मिक स्थल श्री अमरनाथ यात्रा आधार शिविर, बावे वाली माता, मोहमाया मंदिर, श्री रघुनाथ मंदिर के बाहर और आसपास क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ाकर विशेष तलाशी अभियान चलाया गया।
इन धार्मिक स्थलों में तैनात सरकारी कर्मचारी, ड्यूटी दे रहे कर्मचारी और उन्हें जारी हुए पहचान पत्रों की भी पुलिस ने दोबारा से जांच की।
स्थानीय पुलिस ने सीआरपीएफ के डिप्टी कमांडेंट पूर्ण सिंह, असिस्टेंट कमांडेंट आरके पांडे और बीएस रावत को भी सिविल कपड़ों में होने के कारण बिना जांच पड़ताल के शिविर के अंदर जाने नहीं दिया और उन्हें भी सुरक्षा घेरे से तलाशी के बाद गुजरना पड़ा।