क्या आतंकवादी थे क्रांतिकारी खुदीराम बोस?
बांग्ला में छपी पुस्तक में क्रांतिकारी आतंकवाद नामक अध्याय में उक्त शहीदों की गतिविधियों को आतंकवाद और उग्रवाद करार दिया गया है।
स्वाधीनता संग्राम का अपमान
इतिहासकारों ने राज्य शिक्षा बोर्ड की आलोचना करते हुए इसे स्वाधीनता संग्राम का अपमान करार दिया है। वैसे, ममता बनर्जी ने सत्ता में आने के बाद इतिहास की पुस्तकों से कार्ल मार्क्स से संबंधित अध्याय ही हटा दिया गया।
अब इस ताजा विवाद के सामने आने के बाद सरकार की भारी किरकिरी हो रही है। इतिहासकार अतीश दासगुप्ता कहते हैं कि खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चाकी जैसे महान सेनानियों के लिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करने वाले देशद्रोही हैं।
मामले को दिया राजनीतिक रंग
दूसरी ओर, शिक्षा बोर्ड में शामिल इतिहासकार इस कदम का बचाव करते हैं। उनकी दलील है कि ऐसे शब्दों के इस्तेमाल के पीछे मंशा यह ती कि उस समय के हालात की सही तस्वीर पेश की जा सके।
राज्य सरकार ने कहा है कि वह इस मुद्दे पर विचार के लिए तैयार है बशर्ते कि इसे राजनीतिक रंग नहीं दिया जाए।