पटाखा फैक्ट्री में जोरदार धमाका, 11 लोगों की मौत
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पश्चिम बंगाल के पश्चिम मिदनापुर में एक अवैध पटाखा फैक्टरी की इकाई में हुए धमाके में कम से कम 11 लोगों की मौत हो गई है। पुलिस का कहना है कि ये घटना बुधवार रात मिदनापुर ज़िले में पिंगला के निकट एक गाँव में हुई।
हालांकि गांववाले मरने वालो की संख्या ज्यादा होने का दावा कर रहे हैं। इस धमाके में घायल हुए लोगों को अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है और तीन लोग गंभीर रुप से घायल बताए जा रहे हैं।
पश्चिम मिदनापुर के पुलिस अधीक्षक भारती घोष का कहना है कि उन्होंने इमारत के मालिक रंजन मैती को गिरफ्तार कर लिया है. फैक्टरी के मालिक राम मैती और उनकी पत्नी की इस धमाके में मौत हो गई है.
पुलिस को पता थी अवैध फैक्ट्री की बात?
घटनास्थल पर गुरुवार सुबह पहुंचे स्थानीय संवाददाता का कहना है कि घटनास्थल के पास शरीर के अंग बिखरे पड़े हैं। गांववालों ने तालाब के नजदीक कई शवों के पड़े होने का दावा किया है। गांववालों का आरोप है कि इस पटाखा फैक्टरी के पास लाइसेंस नहीं था और पुलिस को इस अवैध फैक्टरी के बारे में सूचना थी।
स्थानीय सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की है इस फैक्टरी में पटाखें बनाने के अलावा देसी बम भी बड़ी संख्या में बनाए जाते थे। ये बम राज्य के अलग अलग भागों में भेजे भी जाते थे। स्थानीय लोगों का दावा है कि इसके बावजूद फैक्टरी के मालिक की सत्ताधारी पार्टी से नज़दीकी होने के कारण कोई कार्रवाई नहीं हुई। सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने कहा है कि गिरफ़्तार हुए व्यक्ति से उसका कोई संबंध नही
धमाके की जांच की मांग
धमाके की प्रकृति को समझने के लिए फ़ॉरेंसिक टीम घटनास्थल के लिए रवाना हो गई है। पुलिस का कहना है कि ये सिर्फ अवैध पटाखा फैक्टरी थी लेकिन विपक्षी पार्टी ने इस मामले की केंद्र से जांच करने की मांग की है।
पिछले साल बर्धवान ज़िले के खागरागढ़ में एक घर में हुए धमाके की गंभीरता को स्थानीय पुलिस समझ नहीं पाई थी। लेकिन इस धमाके के बाद अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी नेटवर्क के जिहादी संबंधों के बारे में पता चला था जिसके बाद आतंकवाद निरोधी एजेंसी एनआईए को इस मामले की जांच सौंपी गई थी।
एनआईए ने अपनी चार्जशीट में कहा था कि इस फैक्टरी में आईईडी बनाए जा रहे थे जिनका इस्तेमाल बांग्लादेश के कई उच्च राजनीतिज्ञों को मारने के लिए किया जाना था।