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चिट्ठी से खुली केजरी की पोल, 6 संगीन आरोप

Thu, 12 Mar 2015 08:39 AM IST
Updated Thu, 12 Mar 2015 08:39 AM IST
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blames on kejriwal by prashant bhushan and yogendra yadav in letter to aap volunteers

आम आदमी पाटी का अंतर्कलह चरम पर पहुंच गया है। योंगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण ने बुधवार को आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं को एक चिट्ठी लिखी है। उस चिट्ठी में अरविंद केजरीवाल पर कई सनसनीखेज आरोप लगाए गए हैं।

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माना जा रहा है कि योगेंद्र, प्रशांत की चिट्ठी के बाद आम आदमी पार्टी में हंगामा और बढ़ सकता है। उल्लेखनीय है कि मंगलवार को आप के भीतर हो रहा हंगामा सड़क पर आ गया था। योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण को आप की पीएसी से निकाले जाने के बाद अरविंद केजरीवाल के करीबियों ने औपचारिक रूप से दोनों नेताओं पर खुल कर हमला किया।
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मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, गोपाल राय और पंकज गुप्ता ने आरोप लगाया कि योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण दिल्ली चुनाव के दौरान पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल थे। दोनों ने केजरीवाल की छवि खराब करने की भी कोशिश की तभी उन्हें पीएसी से निकाला गया।
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हालांकि दोनों नेताओं ने सभी आरोपों को गलत बताया था और मामले में अपना पक्ष रखने की बात की थी। बुधवार को आप कार्यकर्ताओं को पत्र लिखकर दोनों नेताओं के सामने अपना पक्ष रखा और अरविंद केजरीवाल पर सनसनीखेज आरोप लगाए।

कांग्रेस के सहयोग से दोबारा सरकार बनाना चाहते थे केजरीवाल

blames on kejriwal by prashant bhushan and yogendra yadav in letter to aap volunteers

योगेंद्र और प्रशांत ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने लोकसभा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस से समर्थन लेकर दिल्ली में दोबारा सरकार बनाने का प्रयास किया था। पार्टी के अन्य नेताओं ने केजरीवाल को समझाने का प्रयास किया, हालांकि वह और उनके अन्य सहयोगी अपने फैसले पर अड़े रहे।

योगेंद्र, प्रशांत ने अपने पत्र में लिखा कि आप के तमाम नेताओं के समझाने-बुझाने की तमाम कोशिशों के बावजूद केजरीवाल और कुछ अन्य सहयोगी सरकार बने पर अड़े रहे। दिल्ली के अधिकांश विधायकों ने उनका समर्थन किया। लेकिन दिल्ली और देश भर के जिस-जिस कार्यकर्ता और नेता को पता लगा, अधिकांश ने इसका विरोध किया, और पार्टी छोड़ने तक की धमकी दी।

उन्होंने लिखा कि आप ने हाईकोर्ट में विधानसभा भंग करने की मांग कर रखी थी। यूं भी कांग्रेस पार्टी लोक सभा चुनाव में जनता द्वारा खारिज की जा चुकी थी। ऐसे में कांग्रेस के साथ गठबंधन पार्टी की साख को खत्म कर सकता था। हमने पार्टी के भीतर यह आवाज उठाई। यह आग्रह भी किया कि ऐसा कोई भी निर्णय पीएसी और राष्ट्रीय कार्यकारिणी की राय के मुताबिक़ किया जाए। लेकिन लेफ्टिनेंट गवर्नर को चिट्ठी लिखी गई और सरकार बनाने की कोशिश हुई। यह कोशिश विधान सभा के भंग होने से ठीक पहले नवंबर माह तक चलती रही।

योगेंद्र और प्रशांत ने लिखा कि हम दोनों ने संगठन के भीतर हर मंच पर इसका विरोध किया। इसी प्रश्न पर सबसे गहरे मतभेद की बुनियाद पड़ी। यह फैसला हम आप पर छोड़ते हैं कि यह विरोध करना उचित था या नहीं। अगर उस समय पार्टी कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बना लेती तो क्या हम दिल्ली की जनता का विश्वास दोबारा जीत पाते?

उल्लेखनीय है कि 2012 विधानसभा चुनावों के बाद आप ने कांग्रेस के सहयोग से ही सरकार बनाई थी, हालांकि जनलोकपाल के मुद्दे बाद 49 दिनों बाद ही अरविंद केजरीवाल  ने इस्तीफा दे दिया।

लोकसभा चुनावों के बाद हुई पीएसी को भंग करने की कोशिश

blames on kejriwal by prashant bhushan and yogendra yadav in letter to aap volunteers

योगेंद्र, प्रशांत ने पत्र में लिखा की लोकसभा चुनावों के बाद अरविंद केजरीवाल के करीबी नेताओं ने पीएसी को भंग कराने का प्रयास भी किया।

उन्होंने लिखा कि लोकसभा चुनाव का परिणाम आते ही मनीष सिसोदिया, संजय सिंह और आशुतोष ने एक अजीब मांग रखनी शुरू की। उन्होंने कहा कि हार की जिम्मेवारी लेते हुए पीएसी के सभी सदस्य अपना इस्तीफा अरविंद को सौंपे, ताकि वे अपनी सुविधा से नयी पीएसी का गठन कर सके। राष्ट्रीय कार्यकारिणी को भंग करने तक की मांग उठी। हम दोनों ने अन्य साथियों के साथ मिलकर इसका कड़ा विरोध किया।

योगेंद्र, प्रशांत ने आगे लिखा कि अगर हम ऐसी असंवैधानिक चालों का विरोध न करते तो हमारी पार्टी और कांग्रेस या बसपा जैसी पार्टी में क्या फरक रह जाता?

अन्य राज्यों में चुनाव लड़ने के सवाल से केजरीवाल नाराज

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योगेंद्र और प्रशांत ने अपने पत्र में अन्य राज्य में चुनाव लड़ने का सवाल भी उठाया। उन्होंने लिखा कि महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखण्ड और जम्मू-कश्मीर में पार्टी के चुनाव लड़ने के सवाल पर पार्टी की जून माह की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में पार्टी कार्यकर्ताओं का मत जानने का निर्देश दिया गया था। कार्यकर्ताओं का मत जानने के बाद हमारी और राष्ट्रीय कार्यकारिणी के बहुमत की यह राय थी कि राज्यों में चुनाव लड़ने का फैसला राज्य इकाई के विवेक पर छोड़ देना चाहिए। यह अर‌विंद केजरीवाल को मंजूर ना था। उन्होंने कहा कि अगर कहीं पर भी पार्टी चुनाव लड़ी तो वे प्रचार करने नहीं जाएंगे।

पत्र में बताया गया कि उनके आग्रह को स्वीकार करते हुए राष्ट्रीय कार्यकारिणी को अपना फैसला पलटना पड़ा, और राज्यों में चुनाव न लड़ने का फैसला हुआ। आज यह फैसला सही लगता है, उससे पार्टी को फायदा हुआ है। लेकिन सवाल यह है कि भविष्य में ऐसे किसी फैसले को कैसे लिया जाय? क्या स्वराज के सिद्धांत में निष्ठा रखने वाली हमारी पार्टी में राज्यों की स्वायत्तता का सवाल उठाना गलत है?

आप कार्यकर्ताओं ने दिल्ली में लगाए भड़काऊ पोस्टर

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योगेंद्र, प्रशांत ने आगे लिखा है कि पिछले साल जुलाई महीने में जब कांग्रेस के कुछ मुस्लिम विधायकों के बीजेपी में जाने की अफवाह चली, तब दिल्ली में मुस्लिम इलाकों में एक गुमनाम साम्प्रदायिक और भड़काऊ पोस्टर लगा। पुलिस ने आरोप लगाया कि यह पोस्टर आम आदमी पार्टी ने लगवाया था। दिलीप पांडे और दो अन्य वालंटियर को आरोपी बताकर इस मामले में गिरफ्तार भी किया। इस पोस्टर की जिम्मेदारी पार्टी के एक कार्यकर्ता अमानतुल्लाह ने ली, और अर‌विंद केजरीवाल ने उनकी गिरफ्तारी की मांग की।

पत्र में बताया गया कि बाद में अमानतुल्लाह को ओखला का प्रभारी और फिर पार्टी का उम्मीदवार बनाया गया। योगेंद्र ने सार्वजनिक बयान दिया कि ऐसे पोस्टर आम आदमी पार्टी की विचारधारा के खिलाफ हैं। साथ ही विश्वास जताया कि इस मामले में गिरफ्तार साथियों का इस घटना से कोई संबंध नहीं है।

योगेंद्र, प्रशांत ने पत्र में लिखा कि पार्टी ने एक ओर तो कहा कि इन पोस्टर्स से हमारा कोई लेना देना नहीं है, लेकिन दूसरी ओर योगेन्द्र के इस बयान को पार्टी विरोधी बताकर उनके खिलाफ कार्यकर्ताओं में काफी विष-वमन किया गया। योगेंद्र, प्रशांत ने पत्र के जरिए कार्यकर्ताओं से पूछा कि वे ही बताएं क्या ऐसे मुद्दे पर चुप रहना चाहिए था?

आप ने अवाम के मामले में प्रशांत को फंसाने की कोश‌िश की

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योगेंद्र, प्रशांत ने आगे लिखा कि अवाम नामक संगठन बनाने के आरोप में जब पार्टी के कार्यकर्ता करन सिंह को दिल्ली इकाई ने निष्काषित किया, तो करन सिंह ने इस निर्णय के विरुद्ध राष्ट्रीय अनुशासन समिति के सामने अपील की, जिसके अध्यक्ष प्रशांत भूषण हैं। करन सिंह के विरुद्ध पार्टी-विरोधी गतिविधियों का एक प्रमाण यह था कि उन्होंने पार्टी वालंटियरों को एक एसएमएस भेजकर बीजेपी के साथ जुड़ने का आह्वान किया था।

उन्होंने लिखा कि करन सिंह की दलील थी कि यह एसएमएस फर्जी है, जिसे कि पार्टी पदाधिकारियों ने उसे बदनाम करने के लिए भिजवाया था। अनुशासन समिति का अध्यक्ष होने के नाते प्रशांत भूषण ने इस मामले की कड़ी जांच पर जोर दिया, लेकिन पार्टी के पदाधिकारी टाल-मटोल करते रहे। अंततः करन सिंह के अनुरोध पर पुलिस ने जांच की और एसएमएस वाकई फर्जी पाया गया। पता लगा की यह एसएमएस दीपक चौधरी नामक वालंटियर ने भिजवाई थी। जांच को निष्पक्ष तरीके से करवाने की वजह से उल्टे प्रशांत भूषण पर आवाम की तरफदारी का आरोप लगाया गया।

योगेंद्र, प्रशांत ने लिखा कि इसमें कोई शक नहीं कि बाद में अवाम पार्टी विरोधी कई गतिविधियों में शामिल रहा, लेकिन आप ही बताइए अगर कोई कार्यकर्ता अनुशासन समिति में अपील करे तो उसकी निष्पक्ष सुनवाई होनी चाहिए या नहीं?

आप ने दागी उम्मीदवारों को बांटे टिकट

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योगेंद्र, प्रशांत ने अपने पत्र में लिखा कि जब दिल्ली चुनाव में उम्मीदवारों का चयन होने लगा तब हम दोनों के पास पार्टी कार्यकर्ता कुछ उम्मीदवारों की गंभीर शिकायत लेकर आने लगे। शिकायत यह थी कि चुनाव जीतने के दबाव में ऐसे लोगों को टिकट दिया जा रहा था जिनके विरुद्ध संगीन आरोप थे, जिनका चरित्र बाकी पार्टियों के नेताओं से अलग नहीं था। शिकायत यह भी थी की पुराने वालंटियर को दरकिनार किया जा रहा था और टिकट के बारे में स्थानीय कार्यकर्ताओं की बैठक में धांधली हो रही थी। ऐसे में हम दोनों ने यह आग्रह किया कि सभी उम्मीदवारों के बारे में पूरी जानकारी पहले पीएसी और फिर जनता को दी जाए, ऐसे उम्मीदवारों की पूरी जांच होनी चाहिए और अंतिम फैसला पीएसी में विधिवत चर्चा के बाद लिया जाना चाहिए, जैसा कि हमारे संविधान में लिखा है। क्या ऐसा कहना हमारा फर्ज नहीं था?   

योगेंद्र, प्रशांत ने पत्र में लिखा कि ऐसे में हमारे आग्रह का सम्मान करने की बजाय हमपर चुनाव में अड़ंगा डालने का आरोप लगाया गया। अंततः हमारे निरंतर आग्रह की वजह से उम्मीदवारों के बारे में शिकायतों की जांच कि समिति बनी। फिर बारह उम्मीदवारों की लोकपाल द्वारा जांच हुई, दो के टिकट रद्द हुए, चार को निर्दोष पाया गया और बाकि छह को शर्त सहित नामांकन दाखिल करने दिया गया।

उन्होंने पूछा कि आप ही बताइए, क्या आप इसे पार्टी की मर्यादा और प्रतिष्ठा बचाए रखने का प्रयास कहेंगे याकि पार्टी-विरोधी गतिविधि?

योगेंद्र, प्रशांत ने लिखा कि इन छह बड़े मुद्दों और अनेक छोटे-बड़े सवालों पर हम दोनों ने पारदर्शिता, लोकतंत्र और स्वराज के उन सिद्धांतों को बार-बार उठाया जिन्हें लेकर हमारी पार्टी बनी थी। हमने इन सवालों को पार्टी की चारदीवारी के भीतर और उपयुक्त मंच पर उठाया।

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