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काले धन के खुलासे में सामने नहीं आया बड़ा नाम

Wed, 07 Oct 2015 08:07 AM IST
Updated Wed, 07 Oct 2015 08:07 AM IST
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विदेशों में काला धन जमा करने वाले या अघोषित आमदनी से प्रॉपर्टी बनाने वालों की घोषणा के लिए केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने जो कंप्लायंस विंडो खोला था, उसमें अधिकतर छोटी मछली ही हैं। पहले जिस तरह से बताया जा रहा था कि इसमें बड़ी मछली भी फंसेगी, उस हिसाब से सरकार को कामयाबी नहीं मिली है। 

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इस विंडो के तहत 90 दिनों में 638 घोषणाएं आईं हैं, जिसमें 4,147 करोड़ रुपये का खुलासा हुआ है। आयकर विभाग के एक सूत्र के मुताबिक कंप्लायंस विंडोके तहत आई 638 घोषणाओं में अधिकतर इंडिविजुअल श्रेणी के करदाता हैं, वो भी प्रोफशनल।
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इनमें भी वैसे करदाताओं की भरमार है, जो कभी विदेशों में काम करते थे और उसी दौरान वहां के बैंकों में खाता खोला था। वहां से वापसी तो हो गई लेकिन वहां के बैंक खाते चल रहे हैं या फिर वहां कोई छोटी-मोटी संपत्ति खरीद ली थी।
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यहां आकर पता चला कि भारतीय आयकर कानून के तहत यह काला धन है क्योंकि इसकी जानकारी भारतीय आयकर विभाग के पास नहीं है।

जरूरी नहीं कि घोषित संपत्ति या राशि काला धन ही हो

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पिछली बार रिटर्न फाइल करने वालों में ज्यादातर कंपनियां, ट्रस्ट और संयुक्त परिवार श्रेणी के ज्यादा करदाता थे लेकिन इस बार यह वैयक्तिक श्रेणी में बदल गया है। इसी में ज्यादा घोषणाएं आईं हैं।

विभाग के अधिकारी बताते हैं कि एक भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर 1990 के दशक में अपने पूरे परिवार के साथ अमेरिका चला गया था लेकिन दो साल पहले ही स्वदेश लौटा है। जब वह अमेरिका में रह रहा था तो उसके बैंक खाते में करीब 50 लाख डॉलर की राशि जमा हो गई थी। 

इसकी जानकारी भारतीय आयकर विभाग को नहीं थी। अब जबकि उसे इसकी घोषणा का मौका मिला है तो उसने इसका लाभ ले लिया है। इस योजना के तहत रिटर्न दायर करने में सहायता करने वाले एक कर सलाहकार का कहना है कि ऐसा जरूरी नहीं कि घोषित संपत्ति या राशि काला धन ही हो।

ऐसा भी हो सकता है कि उस व्यक्ति ने जहां पैसा कमाया, वहां के कर अधिकारियों को कर चुकाया हो। वित्त मंत्रालय के तहत काम करने वाले केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने इस कार्य को देखने के लिए आयुक्त स्तर के एक अधिकारी की नियुक्ति की है, जिसका कार्यालय नई दिल्ली के सिविक सेंटर में बनाया गया है। वहीं इन दिनों पूरे देश में की गई घोषणाओं की विवेचना चल रही है।

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