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मेडिकल सीटों की कालाबाजारी का खेल, 12,000 करोड़ से ज्यादा का कारोबार

Updated Sat, 30 Jan 2016 02:15 PM IST
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Black money quota: 25,000 MBBS, PG seats at Rs 12,000 crore
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हर माता-पिता का ख्वाब होता है कि उसका बच्चा बड़ा होकर या तो डॉक्टर बने या फिर इंजीनियर लेकिन ऐसे बहुत कम ही परिजन होते हैं जिनका यह सपना पूरा होता है। इसके पीछे बड़ी वजह यह है कि इन पाठ्यक्रमों में मेरिट के आधार पर एडमिशन होता है। लेकिन टीवी पर अक्सर ऐसे विज्ञापन दिखाई दे जाते हैं जिनमें एमबीबीएस के पाठ्यक्रमों में सीधी भर्ती का दावा किया जाता है तो फिर इन बच्चों का दाखिला होता क्यों नहीं है?
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दरअसल, इसकी आड़ में काला बाजारी का एक बहुत बड़ा धंधा चलाया जाता है जहां से सलाना हजारों करोड़ की कमाई होती है। मेडिकल के सीटों पर दाखिला दिलाने के लिए कई लोग अलग-अलग तरह के दावे करते मिल जाते हैं जो कहते हैं कि वे सीधे एमबीबीएस के पाठ्यक्रम में आपका दाखिला करवा देंगे। अब इसमें यह बात समझ में नहीं आती कि जब भारत में मौजूद एमबीबीएस की सीटों पर मेरिट के आधार पर दाखिला होता है तो ये लोग सीधी भर्ती का दावा कैसे कर सकते हैं? दरअसल मेडिकल कॉलेजों में सीधी भर्ती करवाने का यह पूरा खेल ही काला बाजारी पर टीका है।


इन वादों के पीछे एक बहुत बड़ा काला बाजार काम करता है जो दलालों और कॉलेज मैनेजमेंट की सांठगांठ से चलता है। ये लोग मिलकर हर साल करीब 30 हजार से ज्यादा एमबीबीएस और 9,600 के करीब पोस्ट ग्रेजुएट सीटों पर सीधी भर्ती करवाते हैं। इसके एवज में छात्रों वसूली जाती है मोटी रकम। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक इस कालाबाजारी के धंधे में हर साल करीब 12 हजार करोड़ रुपये का व्यापार होता है जिसमें नकद भुगतान किया जाता है।
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