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स्विस बैंकों में कम होने लगी भारतीयों की काली कमाई

Fri, 19 Jun 2015 08:14 AM IST
Updated Fri, 19 Jun 2015 08:14 AM IST
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black money of Indians in Swiss banks

भारत और दुनिया की ओर से स्विट्जरलैंड की बैंकिंग व्यवस्था की गोपनीयता के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बीच स्विस बैंकों  में भारतीयों के धन में पिछले एक साल में 10 फीसदी से अधिक की कमी आई है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2014 के अंत में वहां के बैंकों में भारतीयों के करीब 12,615 करोड़ रुपये जमा थे।

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वर्ष 2013 में उससे पिछले साल की तुलना में भारतीयों की जमा राशि में 40 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी। वर्ष 2006 में स्विस बैंकों में भारतीयों के रिकार्ड 452 अरब रुपये जमा थे। ताजा आंकड़ों में काला धन के लिए सुरक्षित पनाहगाह माने जाने वाले स्विस बैंकों में जमा भारतीयों के काले धन का खुलासा नहीं किया गया है।
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इसमें दूसरे देश की कंपनी के नाम से भारतीयों द्वारा रखे गए धन की भी जानकारी नहीं दी गई है। आंकड़ों के मुताबिक वेल्थ मैनेजरों की राशि में रिकार्ड गिरावट आई है जबकि करीब सात साल पहले यह राशि अरबों में हुआ करती थी। 
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आंकड़ों में स्विस बैंकों में जमा भारतीयों के काले धन का खुलासा नहीं

black money of Indians in Swiss banks

स्विस बैंकों में विदेशी नागरिकों की ओर से जमा राशि में अच्छी खासी बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2013 में यहां के बैंकों में जहां विदेशी नागरिकों के करीब 90 लाख करोड़ रुपये जमा थे वहीं बीते वर्ष के अंत में यह राशि 103 लाख करोड़ रुपये के करीब थी। अमेरिकी कंपनियों की राशि में लगातार दूसरे वर्ष बढ़ोतरी हुई है।

यहां अमेरिकी कंपनियों के करीब 16,972 अरब रुपये जमा हैं। चीनी नागरिकों के धन में भी बढ़ोतरी हुई है और यह करीब 466 अरब रुपये से बढ़कर 563 अरब रुपये हो गया है। आंकड़ों के मुताबिक बीते वर्ष के अंत तक स्विस बैंकों में भारतीयों के 12,350 करोड़ रुपये जमा थे। यह राशि निजी और कंपनियों के खाते की है। इनमें से करीब 362 करोड़ रुपये ही बचत खाते में हैं। करीब 700 करोड़ रुपये की राशि अन्य बैंकों से प्राप्त की जानी है।

इसके अलावा करीब 7000 करोड़ रुपये को भारतीयों के अन्य पैसे की श्रेणी में रखा गया है। ताजा आंकड़े ज्यूरिख स्थित स्विस नेशनल बैंक की ओर से जारी किया गया है। स्विट्जरलैंड की सरकार ने भारत और अन्य सरकारों की ओर से उनके नागरिकों द्वारा गड़बड़ी करने के मिले तथ्यों पर जानकारियां साझा करने का काम शुरू किया है।

 भारत सहित दुनिया के तमाम देश स्विट्जरलैंड पर उसके बैंक के खाताधारकों के बारे में जानकारी साझा करने का दबाव डालते रहे हैं लेकिन स्विट्जरलैंड के जनप्रतिनिधि ऐसे किसी भी कदम का विरोध कर रहे हैं।

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