फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   black money issue big success govt.

काले धन के मामले में केंद्र सरकार को अहम कामयाबी

Mon, 22 Sep 2014 10:58 AM IST
Updated Mon, 22 Sep 2014 10:58 AM IST
विज्ञापन
black money issue big success govt.

विदेश में जमा काले धन को वापस लाने की दिशा में सरकार को एक बड़ी कामयाबी मिली है। दरअसल, जी-20 देशों ने 2017 तक उस तंत्र को क्रियान्वित करने की मंजूरी दे दी है जिसके जरिय विभिन्न देशों के बीच कर संबंधी सूचनाओं का स्वत: आदान-प्रदान होने लगेगा।

विज्ञापन


वैश्विक स्तर पर ऐसे किसी समझौते के आभाव में भारत को कर चोरी के मामले में कई देशों विशेषकर स्विट्रलैंड से सूचनाएं हासिल करने में दिक्कत हो रही थी।

स्विट्जरलैंड का कहना है कि उसके बैंकों में धन रखने वाले भारतीय खाताधारकों के बारे वित्तीय अनियमितता के ठोस सबूत के बगैर वह सूचना साझा नहीं कर सकता।

वर्तमान में किसी देश के अनुरोध करने पर ही कोई देश कर संबंधी सूचनाओं को साझा करता है, लेकिन इसमें केवल कर चोरी या वित्तीय अपराध के ही मामले शामिल किए जाते हैं। ऐसे में जी-20 देशों के बीच बनी इस सहमति को कर चोरी पर रोक लगाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
विज्ञापन

कर चोरी की मिलेगी सूचना

black money issue big success govt.

जी-20 देशों की दिवसीय बैठक के बाद जारी एक बयान में कहा गया है कि हम आपस में कर के बारे में सूचनाओं के स्वत: आदान-प्रदान के लिए वैश्विक स्तर पर कॉमन रिपोर्टिंग स्टैंडर्ड को मंजूरी देते हैं। इससे विदेश में कर चोरी के मामलों को पकड़ने में सहायता मिलेगी। हम आपस में और अन्य देशों के साथ सूचनाओं का स्वत: आदान-प्रदान 2017 या 2018 के अंत तक शुरू कर देंगे।

इस बैठक में वित्त राज्य मंत्री निर्मला सीतारमण, रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन और वित्त सचिव अरविंद मायाराम भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इसी साल पेरिस स्थित संस्था ओईसीडी ने इस बारे में शुरुआती फ्रेमवर्क जारी किया था और इसे सबसे पहले स्वीकार करने वाले कुछ देशों में भारत भी शामिल था। स्विट्जरलैंड और मॉरीशस ने भी इस फ्रेमवर्क को स्वीकार करने की इच्छा जाहिर की है।

इस नए तंत्र के तहत सभी वित्तीय संस्थाओं को अपने ग्राहकों से अनिवार्य रूप से सूचनाएं एकत्रित कर उसे अपने नियामक को देना होगा। नियामक वार्षिक आधार पर स्वत: सूचनाओं का आदान-प्रदान करेगा।

इस फ्रेमवर्क पर अमेरिका, इंग्लैंड, जर्मनी, यूरोपीय संघ, जापान, सिंगापुर, चीन सहित कई अन्य देश हस्ताक्षर कर चुके हैं। हालांकि इन सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए विभिन्न देशों को अपने यहां भी कानून बनाने होंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed