काले धन पर अपनों से ही घिरी मोदी सरकार
स्विस बैंकों में काला धन रखने वालों के नाम का खुलासा करने के मामले में मोदी सरकार अब अपनों से ही घिरती नजर आ रही है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता, वरिष्ठ अधिवक्ता व पूर्व कानून मंत्री राम जेठमलानी ने वित्त मंत्री अरुण जेटली को बेहद कड़ा पत्र लिखा है।
पत्र में उन्होंने जेटली पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और देश को गुमराह करने का आरोप लगाया है। उन्होंने प्रधानमंत्री न बन पाने की वजह से मौजूदा पीएम से बदला लेने की भी आशंका जताई है।
उधर, भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने भी खाताधारकों के नाम सार्वजनिक करने की जेठमलानी की मांग का समर्थन किया है।
जेठमलानी ने काला धन रखने वाले 18 लोगों की सूची में पुणे के घोड़ा व्यवसायी हसन अली का नाम न होने पर भी आश्चर्य जताते हुए कहा है कि सरकार असली अपराधियों की पहचान छुपाना चाहती है। उन्होंने जेटली को आपराधिक कानून और जांच के मामले में बहुत कम जानकारी होने की बात करते हुए अपने से ज्यादा बौद्घिक लोगों से सीखने में शर्म महसूस न करने की नसीहत दी है।
स्वामी ने भी खुलासे की मांग की
जेठमलानी ने लिखा है, "आप देश और मोदी जी को गुमराह कर रहे हैं। हो सकता है कि यह आपका मोदी जी से बदला लेने का तरीका हो क्योंकि जिस पीएम ऑफिस को आप अपना आफिस समझते थे, वह उन्होंने ले लिया है। इसलिए आप बड़े अपराधियों को बचाने में मदद कर मोदी जी को एक्सपोज कर रहे हैं।"
इस बीच सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि लोकसभा चुनाव प्रचार और घोषणा पत्र में पार्टी ने देश से इस आशय का वादा किया था। इसलिए सरकार को अपने वादे से नहीं मुकरना चाहिए।
जेठमलानी ने अपने पत्र में लिखा है, "दिवाली के दिन यह पत्र लिखने का मुझे खेद है। मुझे संदेह हो रहा है कि बाकी लोगों की तरह आप भी नहीं चाहते कि सच सामने आए। आपने सुप्रीम कोर्ट में जिस ढंग की याचिका दायर की है, वह भी मेरी नजर में सबसे ज्यादा गलत सलाह देने वाला कदम है।"
पिछले हफ्ते ही सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दायर कर विदेशी बैंकों में खाताधारकों के नाम सार्वजनिक करने में असमर्थता जताई थी। केंद्र का कहना है कि द्विपक्षीय दोहरे कर से बचाव के लिए की गई संधि डीटीएटी की वजह से वह ऐसा करने में असमर्थ है।
जेठमलानी ने अपने पत्र में लिखा है, "जर्मन सरकार ने कभी भी डीटीएटी की बात नहीं की। हमारे लोग ही जानबूझकर इसे बहाना बनाने में लगे हुए हैं ताकि हमारे वर्तमान भ्रष्टाचारी शासकों को बचाया जा सके।" जर्मनी की सरकार से संपर्क स्थापित नहीं करने के मामले में उन्होंने सुषमा स्वराज पर भी उंगली उठाई है।
'काला धन रखना निजी अपराध, पार्टी का नहीं'
कांग्रेस ने उन चर्चाओं को और बल दे दिया है, जिसमें कहा गया है कि विदेशी बैंकों में काला धन रखने वालों में पूर्ववर्ती यूपीए सरकार के कुछ मंत्री और सांसद शामिल हैं।
पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने एक इंटरव्यू में कहा, "अगर सूची में पार्टी के किसी नेता का नाम आता है, तो इसके लिए कांग्रेस शर्मिंदा नहीं होगी। यह व्यक्तिगत अपराध है। मुझे नहीं पता कि इस सूची में किसके नाम हैं। सरकार को इस मामले में ब्लैकमेल करने के बदले पूरी सूचना के साथ सामने आना चाहिए।"
पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि भाजपा सरकार का आज वही रुख है, जो हमारा था। कानूनी दृष्टि से यही सही स्थिति भी है और हमारी निंदा करके वह गलती कर रही थी।