काला धन स्वदेश लाने में सरकार को मिली बड़ी सफलता

एजेंसी/जकार्ता,नई दिल्ली Updated Fri, 22 Nov 2013 12:57 AM IST
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विदेशों में जमा काले धन को स्वदेश लाने की दिशा में सरकार को एक बड़ी सफलता मिली है।
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अब तक कर की चोरी करने और काले धन को विदेश में जमा करने वालों के लिए स्वर्ग रहे मध्य यूरोपीय देश लिचटेनस्टिन और चार अन्य क्षेत्रों ने अपनी गोपनीयता संबंधी कानूनों में ढील देते हुए ओईसीडी समझौते में शामिल होने की बात कही है।
लिचटेनस्टिन और सैन मारिनो ने समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस्ले ऑफ मैन, ब्रिटिश वर्जिन आइजलैंड्स और केमैन आइजलैंड्स ने इस समझौते में शामिल होने की बात कही है।
ओईसीडी समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले सभी देशों के बीच टैक्स चोरी और काले धन से जुड़ी सूचनाएं खुद-ब-खुद साझा होती हैं। इस तरह अब लिचटेनस्टिन के बैंकों में जमा काले धन के बारे में सरकार को स्वत: जानकारी मिलती रहेगी।

भारत इस समझौते पर हस्ताक्षर कर चुका है। समझा जाता है भारत के कई रईस अपने काले धन को जमा करने के लिए लिचटेनस्टिन के बैंकों का इस्तेमाल करते हैं।

पिछले माह स्विट्जरलैंड ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किया था। स्विट्जरलैंड के बैंक भारतीयों का काला धन जमा करने के पुराने ठिकाने रहे हैं।

पेरिस स्थित ऑर्गेनाइजेशन फॉर इकोनॉमिक को-ऑपरेशन एंड डेवलपमेंट यानी ओईसीडी ने एक बयान में कहा है कि जकार्ता में आयोजित सम्मेलन में लिचटेनस्टिन और सैन मारिनो इस समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले क्रमश: 62वें और 63वें देश हैं।

दोनों देशों ने पारदर्शिता और टैक्स संबधी जानकारियों को साझा करने पर बने इस ग्लोबल फोरम की 21-22 नवंबर को हो रही बैठक के पहले दिन हस्ताक्षर किए।

दिल्ली में वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि लिचटेनस्टिन की घोषणा से भारत विदेशों में जमा काले धन को लाने कि दिशा में एक बड़ी सफलता मिली है। भारत इस देश से अपने नागरिकों की टैक्स चोरी और काले धन से जुड़ी जानकारी हासिल कर सकेगा।
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