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कल तक बताओ काला धन रखने वाले सभी नाम: SC

Tue, 28 Oct 2014 10:12 PM IST
Updated Tue, 28 Oct 2014 10:12 PM IST
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black money account holder and supreme court

काले धन पर कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद उसे होश आया है और अपनी फजीहत बचाने के लिए वित्त मंत्री अरुण जेटली बहानेबाजी कर रहे हैं।

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कांग्रेस नेता अजय माकन ने कहा कि सभी नाम सामने आने चाहिए, जो भी इसके लिए दोषी हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। माकन ने कहा कि सरकार कहती थी कि काले धन की सूची से कांग्रेस को शर्मिंदगी झेलनी पड़ेगी।
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ब्लैक मनी की बात करते-करते सरकार ब्लैकमेलिंग पर तुल गई थी। बाबा रामदेव कह रहे थे कि मोदी सरकार आने पर काले धन में शामिल 55 हजार नामों का पता लग जाएगा और हर भारतीय के खाते में 15 लाख रुपये जमा किए जाएंगे। इस पर भी सरकार को जवाब देना चाहिए। देश को बहाने नहीं बल्कि सभी 55 हजार नाम चाहिए। उधर, भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है।
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कांग्रेस महासचिव ने कहा, ‘चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा नेताओं ने घोषणा की थी कि सरकार बनने के 100 दिन के भीतर काला धन वापस लाया जाएगा। लेकिन जब नाम सार्वजनिक करने की बात आई, तो सिर्फ तीन ही नाम पेश किए।’

कांग्रेसी नेताओं के नाम सूची में होने की बात पर उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति संगठन से बड़ा नहीं है। अगर कोई दोषी पाया जाता है, तो उसे कड़ी सजा दी जाएगी। कांग्रेस के अन्य नेता मनीष तिवारी ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले की सराहना की। उन्होंने कहा, ‘पिछले पांच साल से भाजपा कहती रही है कि सत्ता में आने के बाद वे सारे नाम सार्वजनिक करेंगे। लेकिन अब ठीक इसके उलटे सरकार ने यू टर्न ले लिया।’

कांग्रेस प्रवक्ता संजय झा ने कहा, ‘सरकार विदेशी बैंकों के खाताधारकों के पक्ष में दिखाई दे रही थी। आखिर क्यों उनकी निजता का ध्यान रखा जाए। सच तो यह है कि डीटीएए की कोई भी संधि सरकार को नाम सार्वजनिक करने से नहीं रोकती है।’ माकपा नेता गुरुदास दासगुप्ता ने न्यायपालिका ने सरकार पर कड़ा पलटवार किया है।

मामले में स्थिति को ठीक करने के लिए न्यायपालिका ने बिल्कुल सही कदम उठाया है। समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कहा कि इस आदेश से मोदी सरकार की भारी किरकिरी हुई है। सुप्रीम कोर्ट के पास दूसरा कोई चारा भी नहीं था क्योंकि केंद्र इस मामले में सहयोग नहीं कर रही थी।

खाताधारकों के नाम बताने पर स्विट्जरलैंड के भारत से मतभेद

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स्विट्जरलैंड में कर चोरी अपराध नहीं होने के चलते भारत द्वारा काला धन खाताधारकों के नाम सार्वजनिक करने पर दोनों देशों के बीच मतभेद उभरने लगे हैं। हालांकि स्विस विदेश मंत्रालय ने भारत की नई सरकार के साथ मतभेदों को जल्द ही सुलझाने की उम्मीद जताई है।

स्विस विदेश मामलों के निदेशक और कानूनी सलाहकार वैलेन्टिन जेलवेगर का कहना है कि अवैध मामलों में बैंकिंग गोपनीयता नहीं है। भारत और स्विट्जरलैंड के बीच मतभेदों को स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा कि दूसरे देशों की सरकार द्वारा अवैध धन की जानकारी मांगने पर उन्हें उपलब्ध कराई जा रही है।

साथ ही ‘नो योर कस्टमर रूल’ (केवाईसीआर) के तहत कानून की सख्ती से ग्राहकों को पहले ही अवगत करा दिया जाता है। भारत में खाता धारकों के नाम की पहली सूची के खुलासे पर उन्होंने कहा कि भारत सरकार से केवल कर चोरी पर ही बातचीत हुई है।

सामरिक और अंतरराष्ट्रीय अध्ययन केंद्र द्वारा गठित रिटर्निंग स्टोलेन एसेट्स के पैनल के समक्ष जेलवेगर ने कहा कि स्विस में जमा बेहिसाब विदेशी धन को लौटाने के मामले में स्विट्जरलैंड ने सहयोगात्मक रवैया अपनाया है। स्विस अभियोजक जनरल ने देश में जमा में ट्यूनीशिया और नाइजीरिया के साथ भी सहयोगात्मक रवैया अपनाए जाने की बात कही। जेलवेगर ने कहा कि संपत्तियों की वापसी अंतरराष्ट्रीय मुद्दा है और इसके लिए पिछले दो सालों में सहयोगात्मक सोच बढ़ी है।

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