नीतीश के खिलाफ ये ब्रह्मास्त्र इस्तेमाल करेगी BJP
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बिहार विधान परिषद चुनाव में नीतीश-लालू की अगुवाई वाले महागठबंधन के खिलाफ जीत मिलने से गदगद भाजपा विधानसभा चुनाव में इस लय को बनाए रखने में जोरशोर से जुट गई है।
इस क्रम में केंद्र की राजग सरकार बिहार को विशेष पैकेज देने का ऐलान करने जा रही है। मोदी सरकार विशेष पैकेज के तहत राज्य की बुनियादी व्यवस्था को सुधारने के लिए ढांचागत विकास के साथ कुछ अहम संस्थानों को स्थापित करने का भी ऐलान कर सकती है।
केंद्र सरकार के उच्चपदस्थ सूत्रों के अनुसार विशेष पैकेज के तहत बिजली व्यवस्था को सुधारने के साथ ही कई नए शिक्षण संस्थान खोलने का ऐलान भी हो सकता है।
मांगा है ब्लू प्रिंट
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सभी मंत्रालयों से इसके लिए ब्लू प्रिंट मांगा
है। साथ ही इसे राजनीतिक रूप से मजबूत बनाने के लिए बिहार से जुड़े भाजपा
के सभी वरिष्ठ नेताओं से भी राय-मशविरा किया गया है। राजग के सहयोगी दलों
के नेताओं रामविलास पासवान और उपेंद्र कुशवाहा से भी इस बारे में चर्चा की
गई है।
अब सिर्फ पैकेज के ऐलान का इंतजार है। बिहार में नीतीश कुमार के
विकास और सुशासन का चेहरा होने के दावे को कमजोर करने के लिए भी राज्य को
विशेष पैकेज देने को जरूरी माना जा रहा है।
लोकसभा चुनाव 2014 के दौरान खुद
मोदी ने केंद्र की सत्ता में आने के बाद बिहार को विशेष पैकेज देने का
वादा किया था। इस लिहाज से भी इसकी जरूरत है। 25 जुलाई को प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी की प्रस्तावित मुजफ्फरपुर यात्रा के दौरान इसका ऐलान संभव है।
नीतीश और लालू के साथ आने से बढ़ी भाजपा की चिंता
मोदी के इस दौरे को ही भाजपा के बिहार विधानसभा चुनाव के प्रचार अभियान की
औपचारिक शुरुआत माना जा रहा है। जदयू-राजद-कांग्रेस-एनसीपी के
महागठबंधन के आकार लेने के बाद चिंतित भाजपा में विधान परिषद के नतीजों ने
नई जान फूंक दी है।
नीतीश और लालू के एक साथ आने से भाजपा को ओबीसी और
मुसलमानों की गोलबंदी की चिंता सता रही है लेकिन ताजा नतीजों से पार्टी को
नीतीश-लालू के सामाजिक-जातीय समीकरण में सेंध लगने की उम्मीद दिख रही है।
इसलिए पार्टी के वरिष्ठ नेता अब राज्य के लिए विशेष पैकेज को जरूरी मान रहे
हैं। महागठबंधन को जातीय समीकरण के मोर्चे पर थामने के लिए भाजपा जबरदस्त
होमवर्क कर रही है।
मांझी लगा सकते हैं नैया पार!
नीतीश की महादलित समुदाय पर पकड़ को कमजोर करने के लिए
भाजपा ने पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी को अपने साथ खड़ा किया है।
जबकि
प्रभावशाली यादव बिरादरी पर लालू की जबरदस्त पकड़ को झटका देने के लिए
उनके करीबियों पर सेंध लगानी शुरू कर दी है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री
देवेंद्र यादव की भाजपा से नजदीकियां किसी से छिपी नहीं है तो राजद से
बगावत कर सांसद पप्पू यादव ने न केवल अलग पार्टी बनाई है बल्कि लालू के
यादव वोट बैंक पर चोट पहुंचाने में जुटे हैं।