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सत्ता मिली तो रिटेल एफडीआई रोलबैक

Thu, 27 Sep 2012 12:42 AM IST
सूरजकुंड/हरीश लखेड़ा
सूरजकुंड/हरीश लखेड़ा Updated Thu, 27 Sep 2012 12:42 AM IST
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bjp will rollback retail fdi if came in power
महंगाई और भ्रष्टाचार को लेकर यूपीए सरकार के खिलाफ ताल ठोक रही भाजपा आगामी लोकसभा चुनावों में खुदरा बाजार में एफडीआई के फैसले को भी बड़ा मुद्दा बनाएगी। राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में बुधवार को पार्टी ने संकेत दिए कि यदि वह केंद्र में सत्ता में आई तो यूपीए सरकार के इस विवादित फैसले को उलट सकती है।
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पार्टी ने कहा कि एनडीए में रिटेल में एफडीआई के विरुद्ध कोई मतभेद नहीं हैं। पार्टी की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में बृहस्पतिवार को पेश होने जा रहे आर्थिक प्रस्ताव में भाजपा एफडीआई पर रुख स्पष्ट करेगी। यह प्रस्ताव राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली पेश करेंगे।
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यूपीए सरकार पर चौतरफा हमला बोलते हुए भाजपा ने साफ कर दिया है कि खुदरा क्षेत्र में उसे 51 फीसदी एफडीआई मंजूर नहीं है। यहां राष्ट्रीय कार्यकारिणी और राष्ट्रीय परिषद की तीन दिनी बैठक के पहले दिन यूपीए सरकार, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी भाजपा के निशाने पर रहे।
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पार्टी प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि खुदरा क्षेत्र में कितना भी एफडीआई हो, भाजपा को मंजूर नहीं है। भाजपा के सत्ता में आने पर इसका नतीजा दिखेगा। पार्टी प्रवक्ता प्रकाश जावडे़कर ने भी कहा कि भाजपा शासित राज्यों में इस फैसले पर अमल नहीं होगा। भाजपा उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि पार्टी सत्ता में आने पर इस फैसले को वापस ले लेगी। भाजपा के आर्थिक प्रस्ताव में भी एफडीआई पर विशेष ध्यान दिया गया है। वैसे भाजपा ने 2004 के चुनाव घोषणा पत्र में मल्टी ब्रांड खुदरा क्षेत्र में 26 फीसदी एफडीआई का समर्थन किया था।

बहरहाल, महंगाई, भ्रष्टाचार और खुदरा बाजार में एफडीआई को यूपीए सरकार के खिलाफ ‘ब्रह्मास्त्र’ बनाते हुए भाजपा ने लोकसभा चुनाव के लिए कमर कस ली है। ममता बनर्जी की समर्थन वापसी और बाकी घटक दलों के साथ कांग्रेस के बिगड़ते संबधों से भाजपा को अब आम चुनाव बहुत निकट लग रहे हैं। इसलिए यूपीए सरकार को डूबता जहाज करार देते हुए पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने कार्यकर्ताओं से चुनाव के लिए तैयार रहने को कहा है। भाजपा ने कहा है कि यदि यूपीए सरकार अपने कारनामों से गिरती है तो वह चुनाव के लिए तैयार है।

कांग्रेस और सरकार पर जड़ा ‘पंच’
1- 2009 लोकसभा चुनाव में सौ दिन में महंगाई कम करने के वादे का क्या हुआ।
2- आजादी के बाद की सबसे भ्रष्ट सरकार, कुशासन इसकी सबसे बड़ी विशेषता।
3- संप्रग सरकार डूबता जहाज है, जनता का इससे मोहभंग हो चुका है।
4- सरकारी कारगुजारियों का पर्दाफाश करने वाली संवैधानिक संस्थाओं का अवमूल्यन किया।
5- भाजपा को सत्ता मिली तो पलट दिया जाएगा खुदरा क्षेत्र में एफडीआई का फैसला।

येदियुरप्पा ने किया बायकॉट
कर्नाटक के प्रमुख भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी और राष्ट्रीय परिषद की बैठक में नहीं आकर अपनी नाराजगी और स्पष्ट कर दी है। बीते कुछ दिनों से उनके पार्टी छोड़ने की तैयारी की चर्चा है। बताया गया है कि वह राज्य में आर्ट ऑफ लिविंग वर्कशॉप में हिस्सा ले रहे हैं। वहीं पूर्णिया (बिहार) के सांसद उदय सिंह भी नहीं आए। वह अपने क्षेत्र में 30 सितंबर को एक कार्यक्रम की तैयारी में हैं, जिसमें वह राज्य की जदयू-भाजपा सरकार द्वारा क्षेत्र की उपेक्षा पर नाराजगी प्रकट करेंगे। दोनों के न आने को सीधी बगावत के रूप में देखा जा रहा है।


बीमार सुषमा नहीं पहुंच सकीं
लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज अस्वस्थ होने के कारण नहीं पहुंचीं। दस दिन पहले उन्हें बीमार होने पर एम्स में भर्ती कराया गया था। वह अभी अस्पताल में ही हैं। रविशंकर प्रसाद ने कहा, ‘वह स्वस्थ हो रही हैं। डॉक्टरों ने उन्हें पूर्ण विश्राम की सलाह दी है। उन्होंने बैठक के लिए अपना शुभकामना संदेश भेजा है।’

'भाजपा का काम गिरती सरकार को बचाना नहीं है। यदि यह सरकार गिर जाती है और एक महीने में ही चुनाव होते हैं तो भी हम तैयार हैं।'
- रविशंकर प्रसाद
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