मोदी की शादी पर कांग्रेस बोलेगी तो भाजपा खोलगी नेहरू-राजीव के राज
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पहली बार सार्वजनिक तौर पर खुद के शादीशुदा होने संबंधी नरेंद्र मोदी के कबूलनामे पर कांग्रेस के हमलों पर भाजपा ने तीखी नाराजगी जाहिर की है। पार्टी ने मोदी की निजी जिंदगी को राजनीति का मुद्दा न बनाने की चेतावनी देते हुए कहा कि चुनाव में कांग्रेस का ओछा दांव उल्टा पड़ेगा।
पार्टी ने आरोप लगाया कि आम चुनाव में निश्चित हार की हताशा में कांग्रेस मूल मुद्दों पर बहस करने और जनता को जवाब देने के बदले निजी जिंदगी को मुद्दा बना रही है। पार्टी ने संकेत दिया कि मोदी की निजी जिंदगी पर कांग्रेस का हमला जारी रहने की स्थिति में भाजपा कांग्रेस नेताओं के व्यक्तिगत जीवन से जुड़े मामलों में सार्वजनिक टिप्पणी करेगी।
वाराणसी में पार्टी के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और राजीव गांधी से जुड़ी जानकारियां होने की बात कर इसका संकेत दिया है।
भाजपा करेगी कांग्रेस पर पलटवार
वडोदरा सीट से भरे गए नामांकन पत्र में मोदी ने पहली बार अपने शादीशुदा होने की बात कबूली थी। इस पर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने सीधा हमला करते हुए पूछा कि मोदी ने खुद के शादीशुदा होने की बात इतने अरसे तक क्यों छिपाए रखी।
पार्टी के वरिष्ठ नेता वेंकैया नायडू ने कहा कि नामांकन पत्र भरते समय सभी कॉलम को भरना अनिवार्य किए जाने के बाद मोदी ने अपनी वैवाहिक स्थिति स्पष्ट कर दी। इस बारे में पहले भी बहुत कुछ कहा जा चुका है। उन्होंने कहा कि दरअसल आम चुनाव में कांग्रेस का सूपड़ा साफ होने जा रहा है। पार्टी इसी हताशा में मोदी पर निजी हमला करने पर उतारू हो गई है।
उन्होंने कहा कि हताश कांग्रेस कभी लालकृष्ण आडवाणी की पैरोकारी करती है तो कभी अटल बिहारी वाजपेयी की। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि यही कांग्रेस भविष्य में मोदी की भी तरफदारी करती दिखेगी। नायडू ने कांग्रेस को निजी जिंदगी को राजनीतिक मुद्दा न बनाने की चेतावनी देते हुए कहा कि उसका यह ओछा राजनीतिक दांव कांग्रेस पर ही पलटकर वार करेगा। उधर भाजपा सूत्रों का कहना है कि मोदी की शादीशुदा जिंदगी पर अगर कांग्रेस का हमला नहीं रुका तो पार्टी के दूसरी-तीसरी पंक्ति के नेता गांधी परिवार के पूर्व सदस्यों के निजी जीवन से जुड़ी चर्चाओं पर सार्वजनिक टिप्पणी करेंगे।
मोदी के खिलाफ कांग्रेस का ऑपरेशन मैरिज
गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से खुद के शादीशुदा होने के खुलासे को कांग्रेस अब उनके खिलाफ ब्रह्मास्त्र की तरह इस्तेमाल कर रही है। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार सुबह जम्मू-कश्मीर के डोडा से मोदी पर सवाल उठाया कि अपने चुनावी हलफनामे में पत्नी का नाम बताने में उन्हें कई चुनाव का समय लग गया।
इसके बाद पूरी कांग्रेस ने मोदी के खिलाफ मोर्चेबंदी शुरू कर दी। कांग्रेस ने मोदी पर गलत हलफनामे देने और अपने शादीशुदा होने की बात छिपाने को आधार बनाते हुए चुनाव आयोग से उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। पार्टी नेताओं की फौज यह साबित करने में जुट गई है कि सार्वजनिक सभाओं में अपना कोई परिवार नहीं होने की बात कहने वाले मोदी ने आयोग के दिशा निर्देश का उल्लंघन किया है।
इसके आधार पर उनका नामांकन रद्द होना चाहिए। हालांकि पार्टी ने अधिकारिक मंच से इस मसले को कोर्ट में खींचने की बात से इनकार किया है। माना जा रहा है कि प्रियंका गांधी भी अमेठी और रायबरेली में चुनाव प्रचार के दौरान इस मुद्दे को उठाकर मोदी पर निशाना साध सकती हैं।
एकजुट होकर कांग्रेस का मोदी पर हमला
चुनाव प्रक्रिया के बीच मोदी के शादीशुदा होने की बात सामने आने से पार्टी के नेता एकजुट हो गए हैं। राहुल गांधी ने अपनी चुनावी रैलियों में मोदी के खिलाफ मोर्चा खोला तो दिल्ली में नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों की फौज मोदी को महिला विरोधी बताने के लिए एकजुट हो गई। केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल के नेतृत्व में पार्टी प्रतिनिधिमंडल ने आयोग का दरवाजा खटखटा दिया है।
सिब्बल ने कहा कि 2002, 2007 और 2012 के गुजरात विधानसभा चुनाव में मोदी ने कभी अपने शादीशुदा होने की बात आयोग को दिए हलफनामे में नहीं बताई। जबकि यह कानूनी रूप से जरूरी है। पार्टी ने इसी आधार पर मोदी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। वडोदरा में मोदी के खिलाफ कांग्रेस उम्मीदवार मधुसूदन मिस्त्री कहते हैं कि अपनी पत्नी का नाम भर बताकर मोदी कानूनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। अपने हलफनामे में उन्होंने पत्नी का नाम तो बताया है, मगर उनकी संपत्ति, पैन कार्ड नंबर और आयकर के बारे में जानकारी नहीं दी है। वह भी मोदी के खिलाफ कानूनी कदम उठाने की बात कर रहे है।
उधर, पार्टी महासचिव शकील अहमद ने सवाल उठाया है कि चुनावी सभाओं में मोदी जब यह कहते है कि उनके न तो आगे कोई है और न पीछे। कोई परिवार नहीं है। वह भ्रष्टाचार किसके लिए करेंगे। मगर दूसरी तरफ अपने हलफनामे में पत्नी होने का जिक्र करते है। ऐसे में क्या चुनाव आयोग को यह नहीं देखना चाहिए कि मोदी गलत बयान तो नहीं दे रहे हैं।